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अपात्रों को बंट रहा आवास, पात्र भटक रहे दर-दर

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विनय मिश्रा …..
प्रधानमंत्री आवास योजना एक सुंदर भारत की कल्पना के सांथ एक ऐसी योजना के रूप में सामने आया जिसमे हर गरीब तपके का इंसान अपने आपको पक्के मकान में रहने का ख्वाब बुन सके किन्तु इस योजना को जनपद स्तर के बड़े से लेकर छोटे कर्मचारी पंजीरी की तरह बांट रहे हैं जहाँ पात्र अपात्रों का भी ध्यान नही रखा जाता और आवास के बदले चन्द रुपये लेकर पात्रता पर्ची पकड़ाकर कही दुकान के बदले मकान तो कहीं अधूरे घरों को ही मकान दिखाकर शासन के राजस्व में पलीता लगाया जा रहा है मामला बुढ़ार जनपद अन्तर्गत बिरुहली पंचायत का है जहाँ सचिव और पीसीओ ने मिलीभगत कर आवास का खेल खेला है
बुढ़ार।।
शिकायत कर्ता ने उल्लेख किया है कि बुढ़ार जनपद अन्तर्गत बिरुहली पंचायत में पीसीओ और सचिव ने मिलकर नियमविरुद्ध आवास योजना आवंटित किए हैं इतना नही इन आवासों में जिन व्यक्तियों के पास चार पहिये से लेकर दो पहिए की गाड़ी ट्रैक्टर हैं उन्हें भी यह लाभ दिया गया है सचिव ने न सिर्फ यहां तक मनमानी की है बल्कि अपने निजी रिश्तदारों व भाई तक को पात्रता की पर्ची में शामिल कर शासन के राजस्व को छति पहुँचाया है पंचायत में ठेकेदारी प्रथा से बाउंड्रीवाल व मनरेगा कार्यो में लीपापोती कर दर्जनो करतूतों को अपने नाम शामिल करने वाले सचिव व पीसीओ पर अब तक कार्यवाही की दरकरार है
पूर्व में भी हुई है लीपापोती
पूर्व में बनाए या अधूरे मकान को पीसीओ व सचिव ने आवास योजना में शामिल कर दिया वही जो पहले दुकान बनवाए थे उन्हें भी आवास का मकान ठहरा दिया गया जिसमें से अजय,संतोष, विजय,जीवन केवट,नर्वदिया केवट,गणेश व जियालाल हैं जिन्हें अपात्र होते हुए भी पात्रता की श्रेणी में रख पीसीओ व सचिव ने अपनी मनमर्जी की है
यह कोई पहला मामला नही है विगत कुछ दिनों पूर्व देवरी और चननौडी, पंचायतों में आवास के नाम पर पात्र-अपात्रों का ध्यान न रखते हुए दर्जनो को आवास मुहैया कराया गया किन्तु मनरेगा समन्वयक अभी तक उस माँमले पर कार्यवाही नही किये और माँमले को लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिये

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