हे राम…प्रशासन के रोक के बाद भी हो रहा काम… मामला मोहन राम मंदिर का

शहडोल:-7 फरवरी को कलेक्टर डॉक्टर सत्येंद्र सिंह के निर्देश पर विभागीय दंडाधिकारी द्वारा मोहन राम मंदिर ट्रस्ट की आराजी में किराएदार द्वारा किए जा रहे अवैध और बिना अनुमति के हो रहे निर्माण पर तत्काल कार्यवाही करते हुए कार्य रोक दिया गया था जैन मंदिर के मुख्य मार्ग पर दुर्गा स्टेज के ठीक सामने स्थित मकान का स्वरूप बदल कर नसीर पर पक्का किया गया बल्कि डबल स्टोरी मकान निर्माण का कार्य जोर-शोर से चलता रहा निश्चित तौर पर मंदिर के अंदर कब्जा करके रह रहे लव कुश शास्त्री जो स्वयं को कभी प्रबंधक तो कभी ट्रस्टी और कभी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर प्रस्तुत करते रहे उन्होंने भी इस अवैध निर्माण को देखा होगा किंतु अपनी मौन सहमति देते हुए अवैध निर्माण को होने दिया गया सूत्रों के अनुसार मोहन राम मंदिर ट्रस्ट वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधीन निर्मित स्वतंत्र एजेंसी के अंतर्गत प्रबंधन में काम कर रही है जिसके सदस्य तहसीलदार सोहागपुर राजस्व निरीक्षक सुहागपुर उपसंचालक जिला संग्रहालय एडवोकेट रमेश त्रिपाठी और समाजसेवी राजेश्वर उदैनिया हैं स्वतंत्र कमेटी के सदस्य रमेश त्रिपाठी के अनुसार स्वतंत्र कमेटी ने किसी भी किराएदार या अन्य व्यक्ति को मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन के अंतर्गत मकानों को पुनर्निर्माण करने की अनुमति संबंधी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया है क्योंकि लव कुश प्रसाद शास्त्री व अन्य पक्षकार ट्रस्टी गण द्वारा कई साल से मंदिर प्रबंधन का कोई प्रभाव नहीं दिया गया है इसलिए किसी भी प्रकार की अनुमति देने का कोई सवाल नहीं उठता कलेक्टर शहडोल के निर्देश पर गैर कानूनी अवैध निर्माण पर जांच और पंचनामा के बाद नायब तहसीलदार के द्वारा कार्य रोक दिया गया था किंतु 9 फरवरी को पुणे किसी बड़े भ्रष्टाचार का संरक्षण पाकर संबंधित अतिक्रमण कारी द्वारा पुणे देर शाम मशीन इत्यादि लाकर निर्माण कार्य छत ढलाई का काम प्रारंभ किया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि मंदिर के अंदर गैर कानूनी तरीके से कब्जा कर के रहने वाले लव कुश शास्त्री व अन्य लोग इस कार्य को चोरी-छिपे अंजाम देना चाहते हैं अन्यथा इस कार्य की शिकायत पूरी जिम्मेदारी के साथ उसी प्रकार से करते जिस प्रकार से मंदिर में खुलेआम रहते हैं बहरहाल इस संबंध में तहसीलदार सोहागपुर ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि संबंधित आर आई को अवैध निर्माण रोकने हेतु कहा गया है देखना होगा कि क्या अवैध निर्माण सुबह तक पूरा हो जाता है अथवा कलेक्टर के निर्देश पर रोका गया अवैध निर्माण को नियंत्रित किया जा सकता है

वास्तव में भीतरी सूत्र तो यहां तक कहते हैं लव कुश शास्त्री के निकटवर्ती एक नामदेव किराएदार द्वारा मंदिर के किराए के मकान जो शासकीय रिकॉर्ड में अभी पूर्ण रुप से मंदिर ट्रस्ट में के रूप में दर्ज नहीं हैं उनका लीज पाने के लिए आवेदन भी लगवा दिया गया है ताकि अपनी मौन सहमति के जरिए ठीक इसी प्रकार से मोहन राम मंदिर ट्रस्ट की आराजी अघोषित तौर पर लूटी जा सके जैसे कि स्वतंत्र कमेटी के सदस्य रमेश त्रिपाठी के आवेदन के बाद भी खसरा नंबर 138 कि 33 डिसमिल जमीन किसी फर्जी राम जानकी धार्मिक संस्था के नाम पर कब्जा कर ली गई है तो देखना यह भी होगा कि आखिर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधीन लंबित प्रकरण में मोहन राम मंदिर ट्रस्ट को कानून बचा भी पता है या अतिक्रमण कारी अथवा लूटने वालों के लिए यह मुकदमा वरदान बना हुआ है फिलहाल नामदेव किरायादार और एक अन्य अतिक्रमण कारी खुलेआम डंके की चोट में प्रशासन की अवहेलना करते हुए मंदिर ट्रस्ट पर डाका डालने का काम कर रहे हैं।
आखिर क्या कारण है कि प्रशासन और पुलिस की कुशल समन्वय मैं माफिया दमन कार्यवाही पर जो भय स्थापित होना चाहिए गैरकानूनी कार्य करने वालों का मनोबल टूटना चाहिए वह मोहन राम मंदिर ट्रस्ट की प्रॉपर्टी को लूटने वाले को प्रभावित नहीं कर पाया..?

Subscribe to my channel
Comments are closed.