‘ऐसा राज चाहूं मैं, जहां मिले सबन को अन्न’

संन्त शिरोमणी गुरू रविदास की 644 वी जयंती समारोह स्वसहायता भवन पुष्पराजगढ़ में मनाया गया
अनूपपुर-शनिवार को संत सिरोमणी रविदास जयंती का भव्य आयोजन पुष्पराजगढ़,के स्वसहायता भवन में किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भागीदारी की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहर से आए लोगों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन वृत्त, उनके दर्शन और समाज सुधार पर बहुत विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता टी आर चौरसिया ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में अंग्रेजी विभाग ,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में प्राध्यापक डॉ संतोष कुमार सोनकर जी ने संत शिरोमणि रविदास जी की सामाजिक चेतना को बाबा साहब डॉ भीम राव अंबेडकर के विचारों से जोड़ते हुए, आज के संदर्भ उसे देखने का प्रयास किया। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ वीरेन्द्र प्रताप, असिस्टेंट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक ने संत शिरोमणि रविदास जी की वाणी”ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोटा बडो सब सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न।’
संत रविदास जी की इस वाणी को उद्धृत करते हुए डॉ वीरेन्द्र प्रताप ने आज के संदर्भ से उन्हें जोड़कर देखा।
इस कार्यक्रम में डी एस राव, श्री डी आर बांधव, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष, अमरकंटक, श्री नर्मदा सिंह, पूर्व जनपद अध्यक्ष पुष्पराजगढ़ श्रीमती इंद्राणी सिंह, एडवोकेट श्रीमती यशोदा सिंह पाटले, नगर पंचायत उपाध्यक्ष, अमरकंटक श्री संतोष पाण्डेय सहित तमाम लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए और संत शिरोमणि रविदास जयंती के अवसर पर उनके जीवन, दर्शन पर प्रकाश डाला।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए।

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