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हमसे तो ये बच्चे अच्छे हैं जिनकी संवेदनशीलता जिंदा है

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शहडोल|युवा नेता शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि
दोपहर लगभग 1.30 बजे मैं कहीं से लौटकर अपने घर पहुंचा, तभी मेरी नजर सामने तहसील ग्राउंड पर पड़ी। मैंने देखा कि मेरा बेटा आरुष, बेटी प्रिशा और उसके साथ कुछ और बच्चे जो मेरे ही मोहल्ले के हैं, एक दीवार के पास खड़े कुछ कर रहे हैं, पूरा मामला मैं समझ नहीं पाया और मैंने दूर से ही बेटे को आवाज लगाई कि बहन को लेकर घर चलो, अभी धूप तेज है साम को खेलना। मेरे बेटे ने कहा पापा जरा इधर आइए, जैसे ही मैं पास गया मेरी नजर तब तक वहां पड़ी हुई एक गाय पर पड़ चुकी थी। मोहल्ले की ही एक बच्ची जिसका नाम श्रेया है उसे पानी पिला रही थी। मैंने देखा गाय उठ पाने में असमर्थ थी, मैं समझ नहीं पाया कि उसे क्या हुआ है क्योंकि उसकी उम्र बहुत कम लग रही थी और वो रोड से भी काफ़ी दूर थी, इसलिए ऐसा भी नहीं था कि किसी गाड़ी ने उसे ठोकर मारी हो, गाय के शरीर पर कहीं चोट के भी कोई निशान नहीं थे।
बच्चों ने बताया कि ये गाय करीब आधे घंटे से यहीं पड़ी है और बीमार लग रही है, मेरे बेटे ने मुझसे कहा पापा आप कुछ कर सकते हैं इसके लिए, जिससे इसकी जान बच जाए। मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या किया जाए, तो मैंने अपने नगर के ही एक साथी, जो कि गौ रक्षा के लिए कार्यरत हैं उन्हें फोन लगाया, पर किसी कारणवश उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। फिर मैंने बेटे को ही कहा की आरिफ़ सर (डॉ. आरिफ़ जो कि एक वेटरनरी डॉक्टर हैं) के घर जाओ और उन्हें बता कर आओ, उनका घर हमारे ही मोहल्ले में है, पर इत्तेफाक से वे घर पर नहीं थे। गाय तड़प रही थी, और धीरे धीरे उसका पेट फूल रहा था। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए, तब मैंने नगरपालिका धनपुरी में कार्यरत श्री पुरषोत्तम गुप्ता जी को फोन करके मदद के लिए कहा, उन्होंने बताया कि वे भोपाल में है पर मदद की कोशिश करते हैं, उन्होंने मेरी मदद करते हुए तुरंत एक वेटरनरी चिकित्सालय के कंपाउंडर को फोन किया, थोड़ा देर में वह वेटरनरी कंपाउंडर वहां पहुंचा भी, लेकिन कुछ मिनट पहले ही उस गाय की सांसे थम चुकी थी। उस वेटरनरी कंपाउंडर ने बताया कि गाय के पेट में ज्यादा मात्रा में पॉलिथीन हो जाने के कारण, गैस बनने से इसकी मौत हुई है। मैंने समझने की कोशिश की, कि क्या इसने अभी कोई पॉलिथीन खाई है इसलिए ऐसा हुआ ? उसने बताया कि ऐसा नहीं है, ये बाहर घूमती रहती होगी और कई दिनों से पॉलिथीन खा रही होगी, आज पॉलिथीन कि मात्रा पेट में अधिक हो जाने के कारण इसकी मौत हो गई है। उसने ये भी बताया कि इस समय बड़ी संख्या में ऐसे केस आ रहें हैं।

👉 एक और बात जो मुझे हैरान कर रही थी कि गाय जिस दीवार के ठीक बगल में जाकर गिरी पड़ी थी, उस दीवार पर बड़े बड़े अक्षरों में नगर पालिका धनपुरी द्वारा लिखवाए गए स्वच्छता के नारे लिखे हुए थे। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहना चाहता क्योंकि उस गाय की मौत ने सब कुछ कह दिया।

मोहल्ले के सभी बच्चे आज बहुत दुखी थे, की उन्होंने बहुत कोशिश की पर वे गाय को बचा नहीं सके। वे पूछ रहे थे कि गाय की मौत क्यों हुई, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उन्हें क्या बताऊं की हमारे आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले पॉलिथीन को खाकर उसकी मौत हो गई या ये बताऊं की जिसकी गाय है उसने उसे खुला छोड़ दिया, इसलिए रोड में या जगह जगह पड़ी पॉलिथीन खा कर उसकी मौत हो गई। बहरहाल उसकी मौत लगातार पॉलिथीन खाने के कारण हुई, ये उन बच्चों को मैंने समझा दिया, और वे सभी बहुत आसानी से बहुत अच्छी तरह समझ गए। पर सायद हम कभी नहीं समझ पायेंगे ………..

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