अंततः भ्रष्टाचार के चंद्रलोक का पहला अध्याय समाप्त हो गया

शहडोल |कलेक्टर न्यायालय ने आदेश पारित करके निहालचंद बड़ेरिया को शहडोल मुख्य गांधी चौक क्षेत्र खसरा नंबर 119/120 के रखवा 6224 वर्ग फीट की स्थाई पट्टा के आवेदन को निरस्त कर दिया। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश दिनांक 2 मार्च 2021 में कहा गया है की 23.6.2009 को नामांतरण स्वीकृत करते हुए निहालचंद बड़ेरिया का नाम स्वीकृत किया गया था तत्पश्चात नीरज बड़ेरिया आत्मज निहालचंद द्वारा प्रश्नआधीन भूमि पर नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किया गया| जिसे राजस्व प्रकरण दर्ज कर नजूल अधिकारी द्वारा विचारण में लिया गया| प्रकरण में उद्घोषणा जारी कर आपत्तियां आमंत्रित की गई| प्रकरण में रामअवतार गुप्ता, वीरेंद्र जैन, सजल जैन और नेमचंद्र जैन द्वारा आपत्ति प्रस्तुत की गई थी| आपत्तिकर्तागण द्वारा आपत्ति की गई कि निहालचंद बड़ेरिया द्वारा उनके पक्ष में दिनांक 20.4. 2011 को रजिस्टर्ड पट्टा विलेख निष्पादित किया गया है और भूमि पर आपत्ति करता काबिज है अतः आवेदक का नामांतरण निरस्त किया जाए| राजस्व निरीक्षक द्वारा भी प्रतिवेदित किया गया है कि प्रश्नाधीन भूमि के संपूर्ण भाग को किराया पर दे दिया गया है एवं संपूर्ण भाग का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है| निहालचंद बड़ेरिया द्वारा प्रश्नाधीन भूमि के हितों का अंतरण बिना सक्षम अनुमति किए किए जाने एवं भूमिका व्यवसायिक प्रयोजन के लिए उपयोग किए जाने के कारण लीज शर्तो का उल्लंघन होने के कारण नजूल अधिकारी द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 18.2.18 को जारी किया गया है। जिसका जवाब आवेदक एवं आपत्तिकर्ता द्वारा प्रस्तुत नहीं किया|
नजूल अधिकारी द्वारा बिना सक्षम अनुमति के प्रश्नाधीन भूमि में हितों का अंतरण एवं लीज शर्तो का उल्लंघन एवं जारी किए गए कारण बताओ सूचना पत्र का कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की दशा में प्रकरण में आदेश दिनांक 28 .5.18 द्वारा आवेदक का नामांतरण आवेदन पत्र अस्वीकार किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में नजूल अधिकारी शहडोल द्वारा लीजधारी द्वारा मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7-ख) तथा158 (3) का उल्लंघन लीजधारी का प्रश्नाधीन भूमि पर कब्जा नहीं होने से मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 182 (2) क इस तरह कलेक्टर द्वारा आदेश पारित करते हुए प्रावधानों के तहत प्रश्न आधीन भूमि पर स्वीकृत रिलीज को निरस्त करते हुए पुनः प्रवेश की कार्यवाही किया जाना प्रतिवेदित किया गया है जो उचित प्रतीत होता है |पारित आदेश में कहा गया है कि प्रकरण एवं संलग्न अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट है कि लीजधारी द्वारा लीज शर्तों का उल्लंघन किया गया है तथा वर्तमान में लीजधारी का कब्जा भी नहीं है अतः विचारों प्रांत नजूल अधिकारी के प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रश्नगत भूमि पर स्वीकृत रिलीज को निरस्त करते हुए उन्हें पुनःप्रवेश की कार्यवाही किए जाने का आदेश दिया जाता है।
ज्ञातव्य है कि पिछले एक दशक से भू माफिया नेमीचंद जैन तमाम उठापटक करते हुए गैर कानूनी तरीके अपनाकर निहालचंद बड़ेरिया की मृत्यु के पहले स्टांप पेपर में गैर कानूनी पट्टा विलेख बना दिया था और इसी से श्री बड़ेरिया की मृत्यु हो गई थी हाल में जब लीज अवधि 2017 में समाप्त हो गई थी इसके बाद शासकीय जमीन पर तमाम अवरोधों के बावजूद तथा स्थगन आदेश की अवमानना करते हुए नेम चंद्र जैन ने रेमंड शोरूम का कंपलेक्स बनाया जिसमें अंततः विद्वान तहसीलदार सोहागपुर बीके मिश्रा द्वारा ₹90000 का जुर्माना करते हुए अतिक्रमण हटाए जाने की कार्यवाही पारित की थी किंतु तत्कालीन कलेक्टर ललित दायमा एंड मौके पर रेमंड शोरूम और चंद्रलोक वस्त्रालय से काफी खरीदी किए जिस कारण बने मधुर संबंधों से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका और जाते-जाते नजूल अधिकारी मिलिंद नागदेव ने प्रभावित होकर स्थगन भी दे दिया था जिसकी अवधि भी समाप्त हो चुकी है देखना होगा की भूमाफिया अतिक्रमण हटाओ अभियान में क्या इस भूमाफिया का अतिक्रमण हटाया जा सकता है अथवा भाजपा के निकट संबंधों का लाभ अतिक्रमण कारी को मिलेगा बैहरर हाल गैर कानूनी तरीके से और बड़े रिया फैमिली के साथ धोखाधड़ी के किए गए पट्टा विलेख रद्दी के कागज साबित हुए साथ ही अपराधों का प्रमाण भी जो नियम विरुद्ध था

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