शहडोल क्या मुनाफाखोरी का गढ़ मात्र है ?
यह वक्त नैतिक जिम्मेदारी के निर्वाहन का है, सामने आएं बड़ी कंपनियां
शहडोल ।एक ऐसा शहर जहाँ 2 राष्ट्रीय स्तर की कंपनियां कार्यरत हैं, अल्ट्राटेक और रिलायंस , भले हो मन्द हो चुका किंतु OPM का संचालन अभी भी है ,शहर में जब बड़ी कंपनी आती है तो लोग इसलिए खुश होते हैं ,की उनके समानांतर तथा कथित विकास(स्वास्थ, शिक्षा, ….इत्यादि आएगी) किंतु फिर भी शहडोल शहर में यह हैडलाइन पढ़ने को मिलती है कि शहडोल में ऑक्सीजन की किल्लत और अन्य अव्यवस्था है, क्या शहडोल केवल मुनाफाखोरी का गढ़ है ऐसी कंपनियो के लिए ? इस विपदा काल में इन कंपनियो द्वारा क्यों COVID केअर सेन्टर नही शुरू किया गया ? रिलायंस द्वारा यह राष्ट्रीय स्तर पे कहा गया है की ऑक्सीजन उप्लब्ध कराई जाएगी, तो हमारे शहर को कितनी असांवित है ? आदरणीय गुलाब कोठारी जी के वक्तव्य में शायद उन्होंने ठीक ही कहा, की यह शहर को लूटा जाता है और हम सब मौन रहते है ,
हमारा यह अधिकार है कि यह अरबो की कंपनियां यहाँ अपनी सार्थकता सिद्ध करे, और इस विपदा काल में सामने आकर इमरजेंसी situation में अपनी ज़िम्मेदारी निर्वाह करे, क्योंकि जिस रेट से शहडोल में केसेस बढ़ रहे है , और आगे भी बढ़ने की संभावना है , हमको बड़ी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, फिर जब यह आएंगे भी आगे तो काफी देर हो चुकी होगी ।



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