रिलायंस के CSR मद से प्रदत्त करोड़ रुपए की ब्लड से परेशन मशीन से ब्लड बैंक/ज़िला चिकित्सालय, क्यूँ नही कर रहा प्लाज़्मा थेरपी के माध्यम से covid का इलाज*

शहडोल:-मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने राज्यों को प्लाज्मा थेरेपी के क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की अनुमति दी है.
COVID 19 संक्रमण का इलाज करने के लिए कॉनवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी एक प्रयोगात्मक प्रक्रिया है. इस उपचार पद्धति में COVID19 से पूरी तरह ठीक हो चुके रोगी के खून से प्लाज्मा को निकाल कर कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति में स्थानांतरित किया जाता है. कैसे काम करती है प्लाज्मा थेरेपी:- प्लाज्मा थेरेपी एक स्वस्थ व्यक्ति से बीमार व्यक्ति में इम्यूनिटी को स्थानांतरित करके रोगियों का इलाज किया जाता है. इस थेरेपी में कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज से गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के इलाज के लिए एंटीबॉडी तत्वों का उपयोग किया जाता है. यह संक्रमित व्यक्ति को COVID 19 वायरस के खिलाफ आवश्यक एंटीबॉडी विकसित करने में मदद करता है. जब कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति में एंटीबॉडी स्थानांतरित होता है तब उसका इम्यून पावर बढ़ने लगता है. इससे कोरोना संक्रमण ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है.
कैसे डोनेट किया जाता है प्लाज्मा:- प्लाज्मा डोनेट करना ब्लड डोनेट करने के समान है प्लाज्मा स्थानांतरित के समय ही डोनेट किया जाता है. प्लाज्मा डोनर को एक छोटे से उपकरण से जोड़ा जाता है, जो प्लाज्मा को निकाल कर रेड ब्लड सेल को उनके शरीर में वापस भेजता है. ब्लड की तुलना में प्लाज्मा को अधिक बार डोनेट किया जा सकता है. इसे सप्ताह में दो-तीन बार डोनेट किया जा सकता है. देखना ये है की ज़िले के मुखिया से इस दिशा में भी मेडिकल टीम से राय लेकर उचित कदम उठाते हैं,साथ ही साथ जो लोग पॉज़िटिव होकर ठीक हो चुके हैं उन्हें प्लाज़्मा डोनेट करने के लिए आगे आने को प्रेरित करतें है।

Subscribe to my channel
Comments are closed.