तो क्या है खाकी ,कौन है ये खाकी वाले ,जो बचा रहे लोगो की जान
अखिलेश कुमार शर्मा मो.नं.7999140850
*✍️ नवोदित कवियित्री वेदिका रचित भावात्मक कविता*
*✍️हमारे बडे भाई जैसे हंसमुख मिलनसार आजादनगर टीआई बडे भईया जी श्री इंद्रेश त्रिपाठी की सुपुत्री वेदिका द्वारा कविता के माध्यम से कोरोना काल में पुलिस के सम्मान में लिखी गई कविता*…
*खाकी*
*जब सुनी राम ने पुकार और सुनी अल्लाह ने गुहार*।
*तब जा कर लिया इन्होंने, खाकी के रूप में अवतार*।।
*जिन लोगो का तुम करते थे बखान, आज छोड़ चुके हैं वो मैदान*।
*जान की बाज़ी लगाकर, खड़ी है खाकी सीना तान*।।
*जिसे कहते थे तुम निष्ठुर,आज उसने भूखे को खाना खिलया*।
*ताज़्जुब खा गई जनता सारी कोरोना ने भी क्या समय दिखाया*।।
*भ्रष्ट ,कामचोर ,निकम्मा इन्हें कहने वाले ,आज कर रहे ,फूलों से इनका सम्मान*।
*चूर होगा गुरूर भीम का भी जब देखेगा ऐसे बलवान*।।
*बेबाक है हौसला इनका, जो लोगों की जान बचा रहा है*।
*ऊपर वाले ने तो दुनिया बना दी अब वही तो इसे संभाल रहा है*।।
*कंधों पर सितारों की चमक और सर पर चार सिंह हैं इनकी आराइश*।
*अपने देश के लोगों की हिफाज़त ही है इनकी सच्ची ख्वाहिश*।।
*जात -पात रंग मजहब का भेद ना इन्हे है आता*।
*चहुं ओर मौत का खौफ है फिर भी ना इनका हौसला डगमगाता*।।


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