भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

गोहपारू बिजली विभाग में लालटेन युग का आरंभ ,8-8 घण्टे बिजली गुल 

238
Above News

 शहडोल।गोहपारु अंतरगत ग्रामीण क्षेत्रो में बिजली की आंख मिचौली एक बार फिर शुरू हो गयी है। सुबह से रात तक बिजली के आने और जाने का सिलसिला जारी रहता वगीं 8-8घंटे बिजली गुल रहती है। बिजली की आंख मिलौली के बीच लो वोल्टेज की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है जिससे लोगों की समस्या बढ़ जाती है। विदित हो कि ग्रामीण क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बिजली की आंख मिचौली जारी है। इससे भीषण गर्मी में लोगों का घर में रहना मुश्किल हो जाता है। पिछले एक सप्ताह से लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। जिसके कारण पंखा भी ठीक नहीं चल पाता है। लो वोल्टेज से क्वार्टरों में लगा एसी शोभा की वस्तु बन गयी है।

8-8 घण्टे बिजली गुल 

इधर, 8-8 घण्टे बिजली गुलरहती है तथा बिजली की आंख मिलौली व लो वोल्टेज के कारण समय काटना मुश्किल हो रहा है। इधर, लॉकडाउन के कारण अधिकांश लोग घरों में रहते हैं। कार्यालय बंद होने के कारण वर्क फ्राम होम के तहत कार्य किया जा रहा है। लेकिन बिजली की आंख मिचौली एवं लो वोल्टेज के कारण वर्क फ्राम होम करने वाले की परेशानी कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है। 

बिल वसुली मे बिजली विभाग मसत ,8-8 घण्टे बिजली गुल,बिजली  से ग्रामीण तस्त्र

 एक बंदर कूद जाए पेड़ में तो गोहपारू क्षेत्र का बिजली विभाग कटौती कर देता है, हो सकता है कुछ घरों में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर लगे हो, होसकता है कईओ को सांस की दिक्कत हो, 21वी शताब्दी में लालटेन युग ले आया है गोहपारू बिजली विभाग, तानाशाही ऐसी की कमिश्नर के संज्ञान के बावजूद घंटो बिजली गुल रख रहे है ।आदिवासी क्षेत्रों में बिजली विभाग का यह रवैया बहुत दुखदाई है, इस पीड़ा दायक समय मे जहाँ एलपीजी बीमारी से परेशान है, ग्रामीण क्षेत्रों में न जाने कितने परिवार में लोग बीमार है इस काल मे, लेकिन बिजली विभाग के कर्मचारियो का सौताला व्यवहार इस क्षेत्र की जनता के लिए को मजबूर कर रही है एक बड़े जन आंदोलन करने के लिए गोहपारू क्षेत्र के गरीब ग्रामीणो ने जिले के संवेदनशील कलेक्टर डाँ.सतेन्द्र सिंह  से मांग की है की गोहपारू क्षेत्र मे होरही बिजली की समस्या पर ध्यान देते हए गरीब ग्रामीणो की समस्या का समाधान किया जाऐ।

खबरों के अपडेट पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
E-Paper