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धान की फसल को कीट एवं बीमारी से बचाव के लिए सलाह

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शहडोल- उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विभाग शहडोल श्री आर.पी. झारिया ने धान की फसल को कीट एवं बीमारी से बचाव के सलाह देते हुए बताया कि फील्ड विजिट के दौरान धान फसल में विभिन्न प्रकार के कीट एवं बीमारी देखी गई है। जिसका प्रकोप बढ़ने की संभावना है, वर्तमान समय में धान की फसल में कीट एवं बीमारी के लक्षण एवं उपचार के संबंध में निम्न सलाह दी जाती है। किसान वर्तमान में धान का झुलसा रोग यदि धान फसल की पत्तियां ऊपर से सूख रही है और पति के दोनों किनारे सूखने जैसे लक्षण प्रदर्शित करते हुए पूरी पत्ती बाद में सफेद हो जाए तो वह सुलझा रोग के लक्षण होते हैं। उन्होंने बताया कि इसके नियंत्रण हेतु ट्राईसाइक्लोजोन अथवा हेक्साकोनाजोल 1-1.50 मिली लीटर प्रति लीटर दर से छिड़काव करें। साथ ही धान की फसलों में गाल मेज तथा तना छेदक कीट का प्रकोप भी देखने को मिल रहा है, जिसके नियंत्रण हेतु फिपोलिन 0.3 दावेदार 6-6 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। जिले के सभी किसानों से अपील है कि किसान अपने खेतों का सतत निरीक्षण करते हुए उपरोक्तानुसार लक्षणों के आधार पर अनुशंसित दवाओं का निर्धारित मात्रा का उपयोग करते हुए फसल का उपचार करें, जिससे फसल को संभावित नुकसान से बचाते हुए अधिक उत्पादन लिया जा सके।

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