अधीनस्थ न्यायालय ब्योहारी की बंटवारा प्रक्रिया अवैध
न्यायालय अपर कलेक्टर ने किया बड़े षडयंत्र का खुलासा

शहडोल/ब्योहारी :- न्यायालय अपर कलेक्टर शहडोल ने राहुल नामदेव पिता हजारीलाल नामदेव मामले की गहन जांच पड़ताल के बाद अधीनस्थ न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी ब्योहारी के बंटवारे की प्रक्रिया में प्रयुक्त कूटरचित गतिविधियों का पता लगाते हुए, बंटवारे को अवैध और निष्प्रभावी कर इस गंभीर अपराध की जांच के निर्देश दिए हैं जिसमें जांच के दौरान पकड़े गए अपराधियों के बचने की कोई उम्मीद भी नहीं रह जायेगी। यह है मामला – राहुल नामदेव पिता हजारीलाल नामदेव को ब्योहारी तहसील की गलती की वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है , प्रमुख बात यह हुई कि राहुल नामदेव की बिना जानकारी के बिना उपस्थिति के अंदर ही अंदर कूटरचना कर मनमानी तरीके से नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए उसकी संपत्ति का बंटवारा कर दिया गया , राहुल नामदेव को उसी की संपत्ति से वंचित कर दिया गया और बेचारे को भारी भरकम परेशानी में डाल दिया गया एवं उसके पक्ष को सुना तक नहीं गया,ऊपर से उसके आवेदन को भी खारिज कर दिया गया जो पूर्णरूपेण विधिविरुद्ध है ।
राहुल नामदेव ने अपने साथ हुए इस छल प्रपंच और धोखाधड़ी की शिकायत न्यायालय अपर कलेक्टर शहडोल से जब की तब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया , बंटवारे के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा हुआ इस बात का पता लगाते हुए न्यायालय अपर कलेक्टर ने इस प्रकरण के जांच संबंधी निर्देश तहसील ब्योहारी को दिए हैं।। कैसे हुआ षड्यंत्र? हजारीलाल नामदेव की संदिग्ध मौत इस घटना को अंजाम देने में ऊषा नामदेव ,पूजा नामदेव एवं रियाज सिद्दिकी की प्रमुख भूमिका पाई जा रही है रियाज सिद्दिकी के बारे में राहुल नामदेव और विकास नामदेव ने पुलिस प्रशासन को बतलाया कि उक्त व्यक्ति राजा ठाकुर बनकर राहुल नामदेव के घर पर किराये से रहने आया था एवं धीरे धीरे उसने घर की महिलाओं को प्रभावित करना प्रारंभ किया जिसका विरोध राहुल के पिता स्वर्गीय हजारीलाल नामदेव ने किया था परंतु खराब स्वास्थ्य एवं विपरीत परिस्थितियों के कारण वो सफल भी नहीं हो सके एवं इसी बीच संदेहास्पद परिस्थितियों में उनकी मृत्यु भी हो गई जिस पर अभी तक जांच चल रही है।
हजारीलाल नामदेव की मौत हुई या साजिश के तहत उनकी हत्या की गई यह गुत्थी अभी तक सुलझी नहीं है राहुल नामदेव और विकास नामदेव शव पोस्टमार्टम भी करवाया था जिसमें मौत का कारण स्पष्ट ना होने के कारण इसे फारेंसिक जांच हेतु भेजा गया है।
रियाज सिद्दिकी ने राजा ठाकुर बनकर पूजा नामदेव से शादी कर ली और यहीं से प्रापर्टी के बंटवारे और फर्जीवाड़े की कहानी भी शुरू हो गई ।। प्रश्न यहां पर इस बात का उठता है कि आखिर राहुल नामदेव की गैरहाजिरी ,बिना सहमति के तहसील न्यायालय ने इतनी भारी गलती कैसे कर डाली , यदि इस फर्जी बंटवारे की शिकायत न्यायालय अपर कलेक्टर से ना की जाती तो शायद सत्यता एवं इतने बड़े अपराध का पता भी नहीं चल पाता ,न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि राहुल नामदेव के नैसर्गिक हक और हित को समाप्त किया गया है । फर्जी बंटवारा करने करवाने की खुली पोल- न्यायालय अपर कलेक्टर ने इस प्रकरण पर काफी बारीकी से विचार करते हुए राहुल नामदेव की संपत्ति के छलपूर्वक किए गए बंटवारे पर जांच के निर्देश दिए हैं ,इस पत्र में कहा गया है कि ऊषा बेवा हजारीलाल नामदेव ने न्यायालय तहसीलदार ब्योहारी के समक्ष एक टाइपशुदा फार्मेट आवेदन दिनांक 1/02/2018 प्रस्तुत किया था जिसमें 16/02/2018 को प्रकरण नियत किया गया जो पहले से ही टाइपशुदा आदेश पत्रिका की और बिना सक्षम सुनवाई किए बगैर एक पक्षीय आबादी भूमि का बंटवारा जरिए प्रकरण क्रमांक 0026/अ/27(2) 2017-18 दिनांक 16/02/2018 को ही आदेश पारित कर दिया गया जबकि बंटवारा प्रकरण में इश्तहार प्रकाशन अवधि 30 दिवस निर्धारित है जिसका पालन अधीनस्थ न्यायालय के द्वारा नहीं किया गया अर्थात् एक प्रकार से अपराध किया गया है ।
ब्योहारी न्यायालय का आदेश निष्प्रभावी और अवैध:-
और इसी कारण से अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को अपर कलेक्टर न्यायालय ने अवैध एवं निष्प्रभावी कर दिया है , परंतु यदि अवैध किया गया है तो ऐसी कूटरचना करने और करवाने वालों को जेल की सलाखों के पीछे डालना ही एकमात्र दण्ड है।
इतना बड़ा अपराध घटित होने के उपरांत जब पीड़ित राहुल नामदेव ने तहसील में अपील प्रस्तुत की तो उसे भी बिना सोचे समझे खारिज कर दिया गया ताकि इस फर्जीवाड़े को दबाया जा सके परंतु उन्हें क्या पता था कि सच कहीं ना कहीं से सामने आ ही जायेगा और इस षड्यंत्र और अपराध का पर्दाफाश हो ही जायेगा ।
बंटवारे के पत्रक में प्रियंका नामदेव ,प्रिया नामदेव एवं राहुल नामदेव के शपथपत्र संलग्न किए गए थे परंतु अपर कलेक्टर न्यायालय ने पाया कि ये शपथपत्र किसी भी नोटरी से निष्पादित नहीं कराये गए थे और ना ही अधीनस्थ न्यायालय में निष्पादन और सत्यापन की जांच ही की गई इससे साफ साफ स्पष्ट होता है कि इस फर्जीवाड़े में कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल थे अन्यथा इतने बड़े अपराध को अंजाम देना बहुत ही मुश्किल था ,जबकि साक्ष्य प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों को प्रदर्शित।करवाया जाता है परंतु वह भी नहीं किया गया एवं इस भारी अपराध को आड़े हाथ लेते हुए न्यायालय अपर कलेक्टर ने लिखा है कि बंटवारे की यह प्रक्रिया पूर्णतः संदेहास्पद है एवं संदिग्ध है जिसकी बारीकी से जांच की जाय ब्योहारी के तहसील न्यायालय के लिए यह बड़े शर्म की बात है ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब लोगों का भरोसा तहसील न्यायालय से ही उठ जायेगा ।
अधीनस्थ न्यायालय ब्योहारी की बंटवारे की प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण पाया गया है एवं अब अधीनस्थ न्यायालय को चाहिए कि अपर कलेक्टर के आदेश का पालन करते हुए मामले का परीक्षण करे एवं अपराधियों पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज करवाये ताकि लोगो का विश्वास न्यायालय तहसील पर बना रहे ।
राहुल नामदेव के आवेदन को अधिनस्थ न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने को न्यायालय अपर कलेक्टर ने कानून त्रुटि का दर्जा दिया है जिसके बाद राहुल नामदेव को इस त्रुटि के कारण जितनी भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है उसके लिए तहसील ब्योहारी ही जिम्मेदार है एवं जिसकी क्षतिपूर्ति भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार तहसील को करनी ही चाहिए ।
इस फर्जीवाड़े की जांच और निराकरण हेतु अधीनस्थ न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी ब्योहारी को निर्देशित किया गया है अब अधीनस्थ न्यायालय उन अपराधियों पर दण्डात्मक कार्यवाही करे जिन्होंने ऐसा फर्जीवाड़ा कर न्यायालय की आंखों में धूल झोकी एवं न्यायालय के साथ धोखाधड़ी की ।

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