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सरपंच, सचिव व रोजगार सहायकों को खिलाकर पपीता,, इंजीनियर लगा रहा शासन की मंशा पर पलीता?

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शहडोल। जी हाँ, यह कोई किस्सा या कहावत नहीं बल्कि एक सच है, जो वास्तविक रुप में ऐसा ही कुछ नजर भी आया। उमरिया जिले के पाली जनपद अंतर्गत आने वाली कुछ ग्राम पंचायतों में इंजीनियर गजेंद्र सिंह राठौर द्वारा सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक को मीठे पपीता रूपी कमीशन का मोह दिखाकर हितग्राही मूलक, जनहितकारी योजनाओं एवं ग्राम विकास की सरकारी योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। संभागीय मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूरी पर बना हुआ एक तालाब अपने साथ की गई अनदेखी तो बयां कर ही रहा है, साथ ही साथ जिम्मेदार इंजीनियर व एसडीओ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के कर्तव्यनिष्ठा पर भी वह एक बड़े प्रश्न चिन्ह के रूप में उपस्थित है।

लाखों खर्च, पर उपयोगिता पर सवाल
उमरिया जिले के शाहपुर ग्राम पंचायत में निर्मित तालाब निर्माण को लेकर केवल और केवल शासकीय राशि को हड़पने का प्रयास किया गया है। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि निर्मित तालाब स्वयं ही इस बात की प्रमाणिकता है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत यह तालाब निर्माण हुआ है। देव मड़इया के पास उक्त तालाब का कार्य प्रारंभ 12 मार्च 2020 को किया गया था, जिसकी लागत 14.21 लाख रुपए है। लाखों खर्च के बाद भी यह तालाब अपनी उपयोगिता के लिए साबित सिद्ध होता नहीं दिख रहा।

तकनीकी मापदंडों का नहीं रखा ख्याल

आरोप है, कि उक्त तालाब तकनीकी मापदंडों के बिल्कुल विपरीत बनाया गया है। इसके साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि तालाब निर्माण किए जाने के मूल उद्देश्य के पूर्ति भी यहां दिखलाई नहीं पढ़ती है। आलम यह है कि वर्तमान में बरसात में ही इस तालाब में पानी का भराव नाम मात्र है। अगर यह स्थिति इस बरसात के मौसम में है, तो आगे आने वाले समय में तलाब में पानी के भराव को लेकर क्या स्थिति बन सकती है? यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है!

और काली मिट्टी के नाम पर लगा है फर्जी बिल

ग्रामीणों का कहना है कि, तालाब की पटल खुदाई नाम मात्र की हुई है और तो और काली मिट्टी न डलवाकर वहीं की मिट्टी खोदकर डाली गई है। तालाब में काली मिट्टी डालने का प्रावधान इसलिए है ताकि तालाब का पानी बाहर न जाकर यहीं पर अवशोषित हो जाए। हांलाकि नांद के आसपास काली मिट्टी तो नहीं डाली गई लेकिन काली मिट्टी डालने के नाम पर फर्जी बिल पर राशि का आहरण, जरूर सभी ग्राम पंचायतों में देखने मिल सकता है। तालाब निर्माण के लिए साइड भी गलत चुना गया है। निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों की अगर मानें तो उक्त कार्य की रिकवरी होनी चाहिए।

आधे दर्जन से ज्यादा पंचायतों में कमीशनखोरी का खेल
मालाचुआ, खोलखमरा, औढ़ेरा, शाहपुर, कुशमहा खुर्द, रौगढ़, अमिलिहा, नरवार जैसे लगभग आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे गांव हैं, जहां निर्माण की स्थिति कुछ इसी प्रकार है। पाली अंतर्गत आने वाले इन ग्राम पंचायतों में तालाब निर्माण की कहानी कुछ ऐसी ही है। बताया जाता है कि जनपद पाली में पदस्थ इंजीनियर गजेंद्र सिंह राठौर द्वारा कार्यक्षेत्र में आने वाले ग्राम पंचायतों में कमीशन खोरी का खेल खेलते हुए शासन की राशि को स्वहित में लिए जाने का खेल बखूबी खेला गया है। उनके कार्यक्षेत्र कराए गए अन्य निर्माण कार्य भी मानो किए गए भ्रष्टाचार को प्रमाणित करते हैं। जिनकी अगर जांच कराई गई, तो सारा सच स्वयं ही सामने आ जाएगा।

दबाव बनाकर करवाते हैं मनमानी कार्य
इनके कार्य क्षेत्र में आने वाले ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिवों में इनकी कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश है।लेकिन दबाववश सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायक कुछ नहीं कह पाते। कुछ रोजगार सहायकों, सचिवों एवं सरपंचों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, इंजीनियर राठौर द्वारा दबाव बनाते हुए मनमानी पूर्ण कार्य को अंजाम दिया जाता है। उनकी मनमानी को लेकर सवाल जवाब किया, तो वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यवाही का भय दिखाकर अपने मंशानुरूप कार्य को अंजाम दिया जाता है। कुल मिलाकर यह कहें कि, इंजीनियर राठौर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में इन्हीं का राज चलता है,, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी?

इनका कहना है…

आपने जो फोटोग्राफ्स मुझे भेजे हैं, मैंने देख लिया है। प्रथम दृष्टया तो आपके कथनानुसार सच प्रतीत होता है। जल्द ही मैं टीम सहित मौके पर उपस्थित होकर जांच करवाता हूँ। अगर गलत कार्य किया गया है, तो चार-पांच दिन में आपको कार्यवाही देखने मिल जायेगी।

कन्हाई कुंवर
सीईओ, जनपद पंचायत पाली

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