ठेकेदार कॉलरी प्रबंधक के अधिकारियों से साट-गांठ कर मजदुरो के हक पर डाल रहे डांका
सोहागपुर एसईसीएल मे ठेकेदार कर रहे मजदूरों का शोषण , वेतन स्लिप लापता और पीएफ राशि हुई गायब….?
एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के साथ अनुबंधित करीब आधा दर्जन से अधिक ठेकेदार अपने मजदूरों और कर्मचारियों का जमकर शोषण कर रहे हैं । सोहागपुर एसईसीएल कोयला कंपनियों के साथ जुडे लगभग सभी ठेकेदार और उनके स्थानीय अधिकारियों की संलिप्तता में मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। इस तरह का शोषण आज कई वर्षों से चल रहा है।
एसईसीएल कंपनी द्वारा ठेका मजदूरों को 1046 रुपये प्रतिदिन दर के हिसाब से मजदूरी भुगतान रेट तय किया गया था लेकिन कुछ ठेकेदार एंव कॉलरी प्रबंधक के अधिकारियों की मिली भगत कर ठेकेदार कर रहे मजदुरो का शोषण कर भर रहे अपनी जेब 300-400-450रु की दर से कराते है काम , वही एसईसीएल कंपनी के हाजिरी रूम व बत्ती रूम में दर्ज मजदूरों की उपस्थिति एलपीसी में दर्ज मजदूर का दूर दूर तक नहीं कोई अता पता फिर कैसे हो रहा है फर्जीवाड़े का खेल, धडल्ले से चल रहा ठेका मजदूरों के साथ फर्जीवाड़े का खेल ,जांच उपरांत खुल जाएगी पूरी शड्यंत्र की परत, बड़े-बड़े मठाधीश ठेकेदार व कालरी के अधिकारी घोटाले में हो सकते है क्या संलिप्त …..?
अखिलेश कुमार शर्मा मो.नं.(7999140850)
शहडोल। सोहागपुर एरिया अंतरगत संचालित खदान ठेकेदारो के सहारे पर चल रही है ।एस ई सी एल कम्पनी ठेकेदारों को कार्य का ऑनलाइन टेंडर व वर्क ऑर्डर मिलता है और उपरोक्त कार्यों पर ठेकेदार अपने अपने हिसाब से मजदूरों से तीनों शिफ्ट पर मजदूरी कराई जा रही है।लेकिन कंपनी के मापदंडों के हिसाब से ठेकेदार मजदूरों को प्रतिदिन के रेट के हिसाब से उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया जाता,एरिया में संचालित कोयला खदाने में कुछ ठेकेदार इन दिनों एसईसीएल कंपनी के सर्कुलर को दर किनार कर ठेकेदार मजदूरों का शोषण कर रहे है।नए दर में पीडीए कुशल मजदूर को 152 रुपए,अर्धकुशल मजदूर को 158 रुपए,कुशल मजदूर की श्रेणी में आने वाले मजदूर को 163 रुपए एवम उच्च कुशल हाई स्किल ठेका कामगारों का वीडीए बढ़ाकर 169 रुपए कर दिया गया है।इस तरह बेसिक वेतन जोड़कर अब कुशल मजदूरो को 939 रुपए और अर्धकुशाल को 1046 रुपए की दर से वेतन देने का प्रावधान है।किंतु एरिया में संचालित भूमिगत कोयला खदानों में ठेकेदार कामगार मजदूरों को मजदूरी भुगतान के नाम पर जमकर शोषण कर कुछ ठेकेदार व कंपनी के अधिकारी भ्रष्टाचार परोस कर अपनी अपनी जेबें भर रहे हैं।मजदूरी भुगतान के नाम पर मजदूरों को 350 रुपए से 400-450 रुपए तक प्रतिदिन के हिसाब से आज भी दिया जा रहा है।
तो क्या ठेकेदार ने बनाया बंधुआ मजदूर
जिनका वेतन, कार्य और पद के अनुसार 14 से 15 हजार होती है उन्हें सिर्फ 5 से 6 हजार ही वेतन मिलता है। वहीं जिनका वेतन 28 से तीस 30 हजार रुपए होता है उन्हें सिर्फ 9 से 10 हजार रुपए ही दिए जाते हैं। वह भी बगैर किसी पीएफ आदि की कटौती के। बताया गया कि सोहागपुर क्षेत्र के अमलाई ओसीएम में कार्यरत सिर्फ ढोलू कॉन्ट्रक्शन लिमिटेड ही अपने अस्थाई कर्मचारियों को कार्य और प्रतिदिन के कार्यसमय के आधार पर ठीक-ठाक वेतन देती है। बाकी धनपुरी ओसीएम, बंगवार भूमिगत खदान, राजेंद्रा, दामिनी, खैरहा इत्यादि खदानों में कार्यरत ठेका कंपनी व ठेकेदार अपने मजदूरों का वेतन हर महीने दबा रहे हैं।और न पीएफ का पता न किसी अन्य सुविधाओं का ऐसे में ये ठेकेदार खुद बताएं कि ये मजदुर रख रहे हैं या बंधुआ मजदूर।
ठेकेदार व एसईसीएल के कुछ भ्रष्ट अधिकारी
मजदूरों के हक पर डाल रहे डांका
एसईसीएल कंपनी में ठेकेदार मजदूरों का चौतरफा शोषण किया जा रहा ।सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कुछ चुनिंदा ठेकेदार मजदूरों से 26 दिन कार्य करवा कर 10 से 12 दिन के कार्य का भुगतान कंपनी के रेट के हिसाब से किया जाता है जबकि मजदूरों से 25 से 26 दिन कार्य कराया जाता है और उनका मासिक वेतन पीएफ कटौती के बाद लगभग 20 से 22 हजार ही हर महीने होना चाहिए।किंतु ठेका मजदूरों से पूरे महीने कम करवा कर,ठेकेदार एसईसीएल कंपनी को मजदूरों की एलपीसी में कम हाजिरी दर्शाई जाती है, कम्पनी खदानों में हाजिरी रूम एवम बत्ती रूम में ठेकेदार मजदूरों की उपस्थिति और ठेकेदारों द्वारा कम्पनी को जमा एलपीसी का मिलाप यदि हो जाए तो पूरे घोटाले व भ्रष्टाचार की परतें खुल जायेगी।मजदूरों की खून पसीने की कमाई को आज मेहनताना के हिसाब भुगतान न कर,कुछ ठेकेदार व एसईसीएल कंपनी के कुछ भ्रष्ट अधिकारी उनके हक पर डाका डाल रहे हैं।
ठेका मजदूरों का वेतन स्लिप न पता और पीएफ राशि हुई गायब –
एसईसीएल कंपनी के कुछ चुनिंदा ठेकेदार कंपनी के अधिकारियों से मेल मिलाप कर कुछ चढोत्री चढ़ाकर घोटाले की नींव कई वर्षों पहले रख दी गई है । मजदूरों का पीएफ कटौती तो हर माह ठेकेदारों द्वारा की जाती है और जितनी कटौती कंपनी मजदूरों के वेतन से पीएफ की करती है उनती ही रकम जोड़कर उक्त ठेकेदार को मजदूरों के पीएफ अकाउंट पर जमा करना होता है।लेकिन ठेकेदार अपने काम का पैसा प्रबंधन से ले सके बिल निकलने तक मजदूरों का पीएफ जमा किया जाता है ओरिजनल ड्राफ्ट को ठेकेदार सुरक्षित रखता है।तथा बिल भुगतान हो जाने के पश्चात ठेकेदार ओरिजनल ड्राफ्ट को बैंक में जमा कर मजदूरों के पीएफ के पैसे वापस ले लिए जाते हैं,जिससे मजदूरों के पीएफ खाते पर पीएफ के पैसे नहीं पहुंचते। यहां तक कि ठेकेदार द्वारा मजदूरों को प्रतिमाह की वेतन पर्ची तक नहीं दी जाती है।कार्मिक विभाग एवम ठेकेदार की सह पर पीएफ घोटाला चल रहा है,वैसे तो मजदूरों की वेतन एवम अन्य सुविधाओ को लेकर बकायदा कंपनी द्वारा कंपनी के अधिकारी एवम यूनियन के नेता कमेटी के सदस्य रहते हैं किंतु आज कल कंपनी के कुछ कार्य कागजों पर कुछ और हो रहे हैं पर जमीनी स्तर पर कुछ और।सूत्रों की माने तो भूले भटके एसईसीएल कम्पनी में लेबर कमिश्नर भी जांच करने आते हैं और अधिकारियों के साथ ऑफिस में बैठकर ही जांच कागजों में 100% सही बना दी जाती है।






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