तो क्या कोलमफिया पर मेहबान राजनगर पुलिस,20 दिन बाद भी कोलमाफिया को नही पकड पाई पुलिस….?
अनूपपुर। 28 नवंबर की दरमियानी रात एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आमाडाड खुली खदान से रामनगर पुलिस ने सूचना पर परिसर के अंदर से ट्रेलर वाहन को कोयला लोड पकड़ कर कार्यवाही की थी, पुलिस को जांच पर पता चला था कि माफियाओं ने ट्रेलर वाहन पर स्टीकर के माध्यम से तीन नंबर प्लेट लगाकर कोयला की चोरी को अंजाम दे रहे थे, जिस पर पुलिस ने 7 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही जारी की थी लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि 20 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने टैरेक्स ऑपरेटर के सिवा किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई ना ही अज्ञात लोगों के विरुद्ध किए गए f.i.r. के नाम के खुलासे कर पाई जिससे अब कई सवाल उठने लगे हैं !
तत्कालीन प्रभारी की रही लापरवाही- बताया जाता है कि पिछले कई महीनों से ट्रेलर वाहन के माध्यम से कोयले की चोरी परिसर से होती रही जैसे ही ट्रेलर वाहन पकड़ में आया वैसे ही पुलिस को मुखबिर के द्वारा कोयला चोरी में लगे माफियाओं के संबंध में लगातार सूचना मिलती रही बताया जाता है कि कोयला चोरी के मास्टरमाइंड कैलाश मिश्रा जो ट्रेलर वाहन जप्त होने के दौरान दूसरे दिन परिसर के अंदर ही अपना बयान प्रबंधन को दर्ज कराते देखा गया था, मुखबिर की सूचना के बावजूद भी पुलिस ने मास्टरमाइंड कैलाश मिश्रा को गिरफ्तार करना उचित नहीं समझा, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज भी कैलाश मिश्रा अपने परिजनों से लगातार फोन के माध्यम से बात कर ही रहा है, साथ ही इस क्षेत्र में भी देखा जा सकता है लेकिन पुलिस क्यों गिरफ्तार नहीं कर रही समझ से परे है बताया तो यहां तक जाता है कि लगातार तत्कालीन प्रभारी अजय बैगा को मुखबिरों के द्वारा सूचना दी जा रही थी कि जिस रात ट्रेलर वाहन को जप्त किया गया था उस ट्रेलर वाहन को बबलू नामक ड्राइवर के द्वारा चलाया जा रहा था लेकिन पुलिस इसे भी गिरफ्तार नहीं की अब माजरा क्या है पुलिस ही जाने !
प्रबंधन ने किया नामजद 4 को ब्लैक लिस्टेड, पुलिस ने तीन पर नामजद किया मुकदमा- पुलिस की जांच पर सवाल खड़े क्यों ना हो जब कोयला चोरी में दोषी पाए जाने पर प्रबंधन ने चार लोगों को अपने परिसर के अंदर ब्लैक लिस्ट की कार्यवाही की है जिसमें कैलाश मिश्रा मैनेजर, राजन सिंह मुंशी, शुभम मुंशी, हीरा ऑपरेटर के नाम है लेकिन पुलिस ने 3 लोगों के विरुद्ध ही f.i.r. में नाम उल्लेखित किया है अब पुलिस और प्रबंधन की क्या कड़ी नहीं मिल रही यह तो वही जाने लेकिन लोगों को इंतजार रहा है कि रामनगर पुलिस जल्द ही कोल माफियाओं के गिरोह का पर्दाफाश करेगी लेकिन यहां तो पुलिस की जांच कछुए की चाल चल रही है !
तीन नंबर गेट से ही आया था वाहन- एफ आई आर के 1 हफ्ते होने के बाद भी पुलिस को यह पता नहीं चल पाया था कि वाहन परिसर के अंदर आया कैसे था सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रबंधन ने अपने सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से यह पता लगा लिया है कि ट्रेलर वाहन 3 नंबर गेट से ही कोयला लोड करने परिसर के अंदर आया था, आपको बता दें कि उस रात देवेंद्र नामक सुरक्षाकर्मी की तैनाती 3 नंबर गेट पर थी तो वही कांटा में आशीष नामक बाबू की तैनाती थी हालांकि बूम बैरियर कांटा बाबू का भी नाम f.i.r. में उल्लेखित किया है पर क्या वजह है कि पुलिस की जांच धीमी होती जा रही है, अगर ऐसी ही जांच धीमी रही तो माफियाओं तक पहुंच पाना असंभव रहेगा और माफिया अपना निशाना कॉलरी को बनाकर मुनाफा कमाते रहेंगे सरकार को भी राजस्व का चूना लगता रहेगा , अब नवागत थाना प्रभारी आरके वैश्य को राजनगर की जिम्मेदारी मिली है, इन्हीं के मार्गदर्शन में आगे की जांच की जाएगी।


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