बीपीएल के नाम पर राज्य सरकारें कर रही हैं शासकीय राशि का दुरुपयोग:- एड.रमेश त्रिपाठी प्रांत मंत्री एएचपी

मध्यप्रदेश शासन के द्वारा बीपीएल योजना का संचालन किया जा रहा है जिसमें उन परिवारों को बीपीएल सूची में रखा जाता है जिनकी सालाना आमदनी ₹10000 से कम है यहां यह विचार करने की बात है की मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी ₹193 प्रतिदिन निर्धारित है यदि कोई मजदूर महीने में 25 दिन भी कार्य करता है तो वह 1 वर्ष में ₹50000 से अधिक मजदूरी प्राप्त करता है फिर भी जिस परिवार में दो से 4 लोग मजदूरी करने वाले हैं उन परिवारों का नाम भी बीपीएल सूची में दर्ज हैकैसे ?
विचार करने वाली बात यह है कि क्या बीपीएल सूची में नाम जोड़ने तथा उन्हें बीपीएल का लाभ देने के लिए राज्य सरकार आंख मूंदकर मात्र वोट बैंक की राजनीति करने के लिए लोगों को बीपीएल का लाभ देकर शासकीय राशि का दुरुपयोग कर रही है ?
निश्चित तौर पर या तो सरकार को बीपीएल की आय सीमा में बढ़ोतरी करना चाहिए अथवा ऐसे परिवार जिनकी सालाना आमदनी ₹10000 से अधिक है उनका नाम बीपीएल से काट देना चाहिए यदि किसी शासकीय कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति के द्वारा इस तरह की अनियमितता किया जाना पाया जाता है तो वह शासकीय राशि का गबन के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की अन्य कई धाराओं में अभियुक्त बना लिया जाता है किंतु राज्य सरकार जिस प्रकार से जनता के पैसे का खुलेआम बीपीएल के नाम पर दुरुपयोग कर रही है तो राज्य सरकार के विरुद्ध कौन संज्ञान लेगा यह विचारणीय है क्या सरकार वोट बैंक के लिए इसी प्रकार से शासकीय राशियों का जनता की राशियों का दुरुपयोग करते हुए इस देश और प्रदेश को और कर्ज तले दबाते जाएंगे और सामान्य वर्ग मध्यम वर्गीय परिवार को इसी तरह से महंगाई का सामना करना पड़ेगा यह अब इस देश की जनता को विचार करना होगा खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों को इस ओर विचार करके सरकार की आंख खोलना पड़ेगा रमेश त्रिपाठी एडवोकेट
प्रांत महामंत्री अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद महाकौशल प्रांत

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