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जिला पंचायत सदस्यों ने बेचा जनता जनार्दन का विश्वास – आजाद बहादुर

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जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष आजाद बहादुर सिंह ने कहा कि पूर्व में हुए जिला पंचायत के चुनाव में 14 सदस्य जनता द्वारा चुने गए। उन 14 सदस्य मे एक सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष का दावेदार बना। जो अपने पृष्ठभूमि के कारण सत्तासीन भाजपा सरकार के पक्ष का उम्मीदवार बना और यहीं से कहानी शुरू हुई। भाजपा के विपरीत विचारधारा के अधिकतम सदस्य चुनाव में विजई हुए। जनता जनार्दन के विश्वास से जिनका वर्तमान भाजपा और उसकी सरकार से विश्वास उठ गया था। अधिकतम सदस्य ऐसे थे जो भाजपा व वर्तमान सरकार के विचारधारा के विरुद्ध जीते परंतु चंद टुकड़ों में उन्होंने अपने सिद्धांत विचारधारा जनता जनार्दन का विश्वास बेच दिया। मुझे यह कहने में जरा भी गुरेज नहीं कि मैं जिस दल से संबंध रखता हूं, उस दल के सदस्य लोगों ने कार्यालय में एकत्र होकर बात करी और तय किया कि हमें जिला पंचायत में चुनाव लड़ना है, परंतु बाद में दल के साथ विश्वासघात किया। दल के बीच के लोग प्रत्याशी बनने से मना इनकार किया क्योंकि उन्होंने कहा कि सत्ता बल, धन बल से हम सब चुनाव नहीं लड़ सकते। तब जाकर एक निर्दलीय प्रत्याशी जो वार्ड नंबर 6 से जीती थी, अंजू गौतम रैदास तैयार हुई, संघर्ष के लिए, चुनाव लड़ने के लिए और अंत तक प्रयास भी किया।
मुझे यह बताने में जरा भी गुरेज नहीं है, कि जीत, हार की चिंता किए बिना निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जो संघर्ष कर आनारक्षित सीट से दलित उम्मीदवार के रूप में जीता था। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए, बिना जीत हार की चिंता किए अपनी जनता के प्रति जवाबदेही को दिखाते हुए सांप्रदायिक तत्वों से धनबल से सत्ता बल और मशीनरी से लड़ने का निर्णय लिया लेकिन विपरीत विचारधारा के लोगों ने विश्वासघात किया चंद टुकड़ों के लिए अपने सिद्धांत विचारधारा और जनता के उस विश्वास को बेच दिया जिसके दम पर वह सदस्य के रूप में चुनाव जीत के आए थे। चुनाव फार्म भरने के दिन तक अंतिम स्थिति यह बनी कि वार्ड नंबर 6 से जीती दलित उम्मीदवार अंजू गौतम रैदास अंत तक संघर्ष करती रही, लेकिन प्रस्तावक समर्थक के रूप में उनके चुनाव फॉर्म में हस्ताक्षर करने वाला कोई नहीं मिला, क्योंकि 13 सदस्यों में से सभी ने भाजपा एवं सरकार समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में अपना ईमान, जन प्रतिनिधित्व धर्म, जनता का विश्वास, सिद्धांत, विचारधारा को चंद टुकड़ों में बेच दिया था। मुझे कहने में जरा भी गुरेज नहीं कि जिला पंचायत सदस्य अंजू गौतम रैदास ने अपने ईमान और जन प्रतिनिधित्व धर्म को बरकरार रखा जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाहन कर, जिला पंचायत सदस्य होने के नाते होने वाले जिला पंचायत शपथ का बहिष्कार कर अलग से शपथ लिया। यह है जनता के विश्वास, विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति जबाब देह़ी। ऐसे जनप्रतिनिधि पर उनके क्षेत्र वार्ड नंबर 6 के जनता जनार्दन को तो गर्व करना ही चाहिए साथ में जिले के उन सभी जनों को भी गर्व करना चाहिए जो सरकार व भाजपा के शोषण के खिलाफ महंगाई रोजमर्रा की समस्याओं से पीड़ित हर व्यक्ति जो लड़ रहा है। उन्हें उन पर गर्व करना चाहिए। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि कि इस संघर्ष में वह 14 सदस्यों में अंजू गौतम रैदास भले ही अकेले जरूर है, पर जनता जनार्दन उनके साथ होगी, आपका समर्थन करेगी। आप जैसा संजीदा, सजग, जागरूक जनप्रतिनिधि ही चाहिए। आज मैंने ऐसा बयान दिया इससे मुझे भी संज्ञान है कि मेरे विरुद्ध भी कहने सोचने वालों की एक फेहरिस्त लंबी लिस्ट होगी, क्योंकि बिकने वालों की तादाद अधिकतम है, सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले लोगों की संख्या कम है, पर इन से मजबूत कोई नहीं है ऐसे मजबूत इरादे वाले लोगों के साथ संघर्ष करना जनप्रतिनिधियों का धर्म है। आज जागरूक जन संघर्ष करने वाले जनप्रतिनिधि की आवश्यकता है, हमें ना कि सिद्धांतों को बेचकर सुविधा भोगी जनप्रतिनिधियों की जो जनता का विश्वास अर्जित कर उस विश्वास के प्रति विश्वासघात करते हैं। जन जन के लिए जो संघर्ष करेगा वही जनता का प्रतिनिधित्व करेगा। ऐसा मेरा मानना है।

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