शहडोल नगरपालिका चुनाव में हुआ चमत्कार, जीती भाजपा ने हारती कांग्रेस को जिताया ?
शहडोल। विराट नगरी में शहडोल में नगरीय निकाय चुनाव संपन्न हुआ। चुनाव भी ऐसा कि, भाजपा के नगरपालिका उपाध्यक्ष प्रत्याशी ने 22 वोट से जीत दर्ज की। वहीं भाजपा नगरपालिका अध्यक्ष के दावेदार ने 18 वोट पाकर अध्यक्ष पद गंवा दिया। जानने और समझने की बात यह है कि, भाजपा पार्षदों के 18 वोट थे। भाजपा को उपाध्यक्ष पद हेतु 22 वोट पड़े। अर्थात, भाजपा के 18 वोट के अलावा 4 वोट अलग से प्राप्त हुए और नगरपालिका उपाध्यक्ष पद पर प्रवीण शर्मा डोली ने जीते। मगर यही चार वोट भाजपा के अध्यक्ष पद के दावेदार प्रकाश सोनी को क्यों नहीं मिले? अगर आधे यानी कि 2 वोट भी प्रकाश सोनी को पड़ जाते तो भाजपा की नगरपालिका अध्यक्ष की तस्वीर जीत में बदल जाती। लेकिन ऐसा हो न सका! अब जन चर्चाओं में एक बड़ा प्रश्न बनकर यह उभर रहा है कि, भाजपा अध्यक्ष को 18 और उपाध्यक्ष को 22 वोट यह कैसे संभव हुआ?
एक बिहारी सब पर भारी:- भाजपा की अंदरूनी विरोध झेलते हुए भाजपा के नगरपालिका उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी प्रवीण शर्मा डोली ने न केवल भाजपा से पार्षद पद हेतु टिकट प्राप्त किया। बल्कि, वार्ड नं. 24 से 590 के भारी मतों से जीत दर्ज भी की। उन्होंने नगरपालिका उपाध्यक्ष के लिए एक बार फिर अपना झंडा गाड़ दिया है। प्रवीण शर्मा को भाजपा पार्षदों के अलावा 4 वोट मिलना व भाजपा नगरपालिका अध्यक्ष के दावेदार प्रकाश सोनी को मात्र 18 वोट पाकर हार जाना! इस बात का प्रमाण है कि, डोली की व्यक्तिगत छबी भाजपा से भी बड़ी है। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि, एक बिहारी सब पर भारी!महिला शक्ति को नजरंदाज करना पड़ा भारी:- शहडोल के 39 वार्डों में से 23 महिला पार्षदों ने जीत कराई, मगर महिला सशक्तिकरण का दम भरने वाली भाजपा ने शहडोल में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद दोनों से ही मात्र शक्ति को वंचित रखा। वहीं कांग्रेस ने उपाध्यक्ष पद हेतु मात्र शक्ति से कुन्दन पाण्डेय को सम्मान दिया। भले ही उन्हें हार का सामना ही क्यों न करना पडा़। मगर नगरपालिका में घनश्याम जायसवाल अध्यक्ष पद हेतु सफल रहे। कहां बिगड़ा भाजपा का समीकरण:- आप को बता दें कि, भारतीय जनता पार्टी ने निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्व देर रात प्रेम प्रकाश सोनी को अपना अध्यक्ष प्रत्याशी घोषित किया। घोषणा के बाद से ही भाजपा में अंतर्द्वंद एवं विरोधाभास की स्थिति निर्मित हो गई। जैसे ही इस नाम की घोषणा हुई। भाजपा में ही अंदर-अंदर विरोध की चिंगारी सुलग गई। जिसने भाजपा का लगातार 20 वर्षों का रिकार्ड जलाकर ध्वस्त कर दिया। यह विरोध की चिंगारी ऐसे ही नहीं सुलगी। बल्कि, बल्कि भाजपा नेतृत्व की खामियों की वजह से यह आग और भी धड़क पड़ी और भाजपा को अध्यक्ष पद गंवाना पड़ा। कैसे बना कांग्रेस का समीकरण:- जैसे ही कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए घनश्याम जायसवाल का नाम घोषित किया। वैसे ही घनश्याम सभी पार्षदों से अपना आपसी सामंजस्य स्थापित करने लगे और सामंजस्य में वह पूर्णतया सफल भी रहे। इसी का परिणाम सामने भी है कि, वह अध्यक्ष बनकर विजयी हुए। इतना ही नहीं भाजपा पार्षदों के विपरीत कांग्रेस पार्षदों ने अपनी एकजुटता का परिचय भी दिया। शायद यही वजह है कि, कांग्रेस ने अध्यक्ष पद को प्राप्त किया और भाजपा के 20 सालों का गणित का महल ध्वस्त कर दिया।








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