(संडे विशेष)शिवराज सरकार की एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर,मध्यप्रदेश का कौन होगा मुख्यमंत्री.?
भोपाल:- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब से 2023 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा सरकार पांचवी बार ‘मिशन’ में निकले हैं, तब से लेकर आज तक उनके सूचनाओं के तंत्र ने यह बताने की कोशिश की है कि एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर तथा लगातार 20 वर्षों से बार-बार एक ही चेहरे को देखकर जनता में असमंजस का माहौल है और तो और शिवराज सरकार की एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर को लेकर समझा जाता है कि इन्टेलिजेंस ब्यूरो ने भी यही रिपोर्ट तैयार करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं अमित शाह तक पहुंचाते हुए आगाह किया है कि मध्यप्रदेश की जनता भाजपा की सरकार को बनाना चाहती है लेकिन चेहरा और चेहरों दोनों में परिवर्तन चाहती है। जहां तक सवाल है मुख्यमंत्री के पद के लिए नये चेहरे का भाजपा के पास संघ के मार्फत से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर ही सहमति बनवाई है। लेकिन बार-बार एंटी इनकम्बेंसी की बात करने वाला कोई और नहीं, सूत्र बताते है कि शिवराज मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्यों के खिलाफ तथा 50 से 55 विधायकों के खिलाफ एन्टी इनकम्बेंसी फैक्टर हावी है जबकि जिम्मेदार शिवराज सिंह चौहान को ही बताया जा रहा है। ऐसी स्थिति में विकास यात्रा को बीच में रोककर सभी मंत्रियों को सामुहिक पौधारोपण के बहाने भोपाल सैर सपाटे के लिए नहीं बुलाया गया है, आज जो बैठक होगी वो औपचारिक और अनौपचारिक दोनों हो सकती है। राजपद के सूत्रों के अनुसार संघ प्रमुख मोहन भागवत के भोपाल आने की खबर की पुष्टि भले ना हो लेकिन इस बात में दम है कि मुख्यमंत्री आज अपने मंत्री मंडल के सभी सदस्यों का रिपोर्ट कार्ड ‘रेडी रिफ्रेंस’ के लिए तैयार जरूर रखे और जरूरत पड़ी तो मंत्रियों को अपने हद में रहने की हिदायत भी देने में शिवराज पीछे नहीं रहने वाले है। इस संडे डायरी का लब्बोलुआब यह है कि विकास यात्रा को बीच में रोकने के अलग-अलग कारण हो सकते है। जिसमें पहला कारण मंत्रियों की एन्टी इनकम्बेंसी फैक्टर को शिवराज सरकार का एन्टी इनकम्बेंसी फैक्टर नहीं बनाया जाये यह बात मंत्रियों को समझ में आ जानी चाहिए। दूसरा बड़ा कारण यह हो सकता है कि मध्यप्रदेश में 20 वर्षों के विकास को 15 महीने की कमलनाथ सरकार बार-बार खारिज कर रही है। उससे निपटने के लिए तथा विकास के कीर्तिमानों को घर-घर पहुंचाने के लिए प्रत्येक मंत्री को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम को आगे रखकर ही काम करना होगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि कैबिनेट की अनऔपचारिक चर्चाओं में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेन्द्र तोमर के बीच में यदि किसी मुद्दे पर टकराओं की स्थिति तो उसे हर कीमत में टालने के निर्देश मुख्यमंत्री जारी कर सकते है….!


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