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तो क्या फरार कबाड़ी जुबैर अंसारी के अवैध कबाड़ के कारोबार पर पुलिस लगा पाऐगी अंकुश….?

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तो क्या फरार कबाड़ी जुबैर अंसारी गुदाम बन्द करके,चोरी के कबाड़ कारोबार को जगह जगह पिकप से दे रहा अंजाम…?

पुलिस प्रशासन के साथ खेल रहा लुका छुपी का खेल….?

अखिलेश कुमार शर्मा मोबाइल नंबर 7999140850

शहडोल। आपको बता दे कि कुछ महीनों पहले शहडोल की पुलिस प्रशासन ने कई बड़े कबाड़ियों के ऊपर ताबड़तोड़ कार्यवाही की थी। लेकिन कुछ ही कबाड़ी के ऊपर हुई थी कार्यवाही और कुछ को भनक लग जाने से अपने गुदामो व ढियो को बंद करके फरार हो गए थे अब सवाल तो यह भी बनता है कि जब पुलिस अधीक्षक की टीम जोकि स्पेसल टीम कहलाती है और ऐसे में अगर फिर भी कुछ कबाड़ियों को भनक लग जाती है तो आप समझ सकते है साहब की माजरा आखिर क्या है कहा से भनक लग जाती होगी लेकिन फिर साहब की स्पेसल टीम ने कई ऐसे बड़े बड़े कबाड़ी ठियो में छापा मार कर कार्यवाही की और जेल भी भेजा लेकिन अगर बात करते है जुबैर अंसारी की तो कई सालों से हर महीने ठिये बदल बदल के काम करने वाला व्यक्ति कभी पुलिस प्रसाशन के हाथ नही लगता है मानना पड़ेगा कि एक से एक पुलिस के पास दिमाक होते है आरोपियों के पकड़ ने के लिए लेकिन यह शातिर कबाड़ी जुबैर अंसारी कभी पुलिस के हाथ नही लगता है और अपने ठिये बदल बदल के काम करता है कभी पिकप से माल लाता है तो कभी मिनी ऑटो से तो कभी ट्रक से जबलपुर आसानी से भेज देता है और पुलिस को खबर भी नही लगती है और पुलिस कहती है फरार है उसके ठिये बन्द है और वो बढ़िया कबाड़ के काम को अंजाम देता है चाहे वो गाड़ी कटी हो कबाड़ में चाहे वो चोरी का सरकारी माल हो या रेलवे कालरी का माल हो लेकिन ठिये बन्द करके चार चका गाड़ी में घूम घूम के काम को अंजाम भी देता है और पुलिस को पता भी नही चलता है हमारे सूत्रों को सब पता होता है पर पुलिस से पूछो तो उसको कुछ नही पता होता है वाह साहब जी क्या खेल चल रहा है लुका छीपी का सूत्रों द्वारा तो यह भी जानकारी है ।

कि जो कबाड़ियों का सेंडिकेट बना है चार लोगों का तो अब जुबैर को जोड़ के पांच का बनेगा और पूरे सँभाग में राज करेंगे सब सेट करके सूत्रों से जानकारी तो यह भी है कि जुबैर तो गाना भी गाता है डॉन फ़िल्म का की जुबैर को पकड़ना मुश्किल ही नही नामुनकिन है न पुलिस कुछ कर सकती है न कोई क्योंकि मैं दिमाक से काम करता हु चार ठिये बनाया कभी घरौला तो कभी पुरानी बस्ती तो कभी सुहागपुर तो कभी कल्याणपुर और जब देखता हूं कि यहां छापा पड़ने वाला है तो बन्द करदेता हु उन ठियो को और दूसरे से काम को अंजाम देता हूं इस लिए आज 10 साल से पुलिस की पकड़ से दूर हु और कुछ नही होता है अब तो पुलिस प्रशासन ही बता सकती है कि क्या जो जुबैर बोल रहा है वो सही है कि पुलिस सही है क्या वाकई में पुलिस जुबैर के खेल में मगन है जो उसके दिमाक के आगे पुलिस कमजोर है जबकि कहते तो है कि पुलिस गड़े मुर्दे निकाल के सभी सबूत गवाह ले आती है साइबर से लेकिन इस कबाड़ी को नही पकड़ पा रही है यह जनता को बात कही पच नही रही है साहब अब तो साहब ही बता सकते है कि क्या सही है क्या गलत है साइबर के माध्यम से तो उसने फोन नम्बर को भी ट्रेस करके पकड़ सकती है उसके कागजात भी चेक कर सकती है और सभी राज उससे निकलवा भी सकती है पुलिस क्या नही कर सकती है लेकिन कुछ जनता को पच नही रहा है साहब सूत्रों का कहना तो ये भी है कि आज से पांच साल पहले जुबैर ने जब कबाड़ का काम चालू किया था तो एक लाख रुपये कर्ज लेके किया था पर अब की यह पूजिसन है कि महीने में 30 से 50 लाख का माल टार्न ओवर करता है पर ठिये बन्द होने के बाद भी इतना लंबा लिंक और माल खपाता है वोह भी यह कह कर की एक नम्बर का काम करता हु और हर महीने इतना टर्न ओवर वाह अंसारी जी क्या बात है और यह भी कहता है कि सब सेटिंग का कमाल है मेरे नाम कुछ भी नही है कोई कागज भी नही मेरा दोस्त उसके नाम सब है पुलिस पकड़ेगी भी तो क्या कर लेगी मेरा मेरा दोस्त बीजेपी में बड़े पद में उसका या मेरा कुछ नही हो सकता है इसी लिए इतना लंबा काम करता हु और कोई दिक्कत नही होती है बस दिमाक होना चाइये अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रसासन के संज्ञान में सभी बातें लाने के बाद क्या पुलिस ऐसे कबाड़ माफिया को ढूंढ पति है कि नही के वाकई में जैसे खेल रहा है जुबेर लुका छिपी का वही चलता है या फिर लुका छिपी के अंदर और कोई बात हो जो पुलिस अधीक्षक तक न खबर हो अब यह तो पुलिस अधीक्षक खुद पता कर सकते है और बड़ी कार्यवाही भी करा सकते है और जांच भी बैठा सकते है जुबैर के रिकार्ड क्या है क्या है संपत्ति कहा से कितना क्या हो सकता है इनके भी कुछ चोर फैले हो सभी जगह जो इनका नाम न ले रहे हो क्योंकि न बाप बड़ा न भइया सबसे बड़ा रुपैया।

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