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पूर्व आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार के भ्रष्टाचार की पत्रकार ने खोली पोल

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बौखलाहट में अधिकारी ने रचा षणयंत्र, पत्रकार आरोप में हुआ निर्दोष साबित 

पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी के साथ पत्रकार विकास परिषद संगठन ने सौंपा था ज्ञापन

पेटी कांट्रेक्टर बिनोद सिंह पर कार्यवाही की कर रहा मांग , संरक्षण दे रहे रेलवे अधिकारी ….?

 तो आखिर ये कैसे अधिकारी साहब फ्री का पेमेंट,अवैध रुपयों से जेब भरना है कांन खोल कर सुन लो ऐ चौथे स्तम्भ वाले हम अधिकारी हैं कुछ भी कर सकते हैं ।तुमने हमारी की बहुत शिकायत,अब झेलो हमारे झुंठे शंडयंत्र की मार तुम्हे ऐसा करेंगे बदनाम की तुम्हारी नहीं सुनेगा रेल प्रशासन।रेलवे के नियम कानून हमारे है हम रेलवे के है हम चाहे माने या हम चाहे न माने हमारी मर्जी।सुन लो ऐ चौथे स्तम्भ वाले तुमने बहुत बनाई हमारे खिलाफ विडियो और बहुत की हमारी शिकायत पर अब झेलो हमारे झुंठे शंडयंत्र की मार तुम्हे ऐसा करेंगे बदनाम की तुम्हारी नहीं सुनेगा रेल प्रशासन।ये कैसे अधिकारी साहब आईजी एसपी से  प्रमाणिकता के साथ चौथे स्तम्भ वाले ने कि उच्च अधिकारियों से शिकायत की अधिकारीयों ने  धमाकेदार की कार्यवाही फिर साहब बौखलाऐ और रचा षणयंत्र अपने ही छररे से करादी झुठी शिकायत आखिर कार हुआ क्या सांच को आंच नहीं वाली कहावत को चरितार्थ कर ते हुए चौथे स्तम्भ वाला आरोपों में निर्दोष साबित हुआ अब मामला गरमाया निर्दोष चौथे स्तम्भ वाले के साथ खड़ा हुआ पत्रकार विकास परिषद संगठन सौंपा ज्ञापन कि आरोपी पर 7दिवस के अंदर हो कार्यवाही पर आज तक नहीं हुई कोई कार्यवाही आखिर जिम्मेदार कौन……?

अखिलेश कुमार शर्मा मो.नं.- 7999140850

शहडोल। वैसे तो शहडोल जिले एक आदिवासी जिला माना जाता है पर अगर देखा जाए तो इस जिले में भारत के विभिन्न हिस्सों के लोग यहां मिल जायेगें वहीं कोयला और सुनहरी रेत ने तो मानो शहडोल जिले में चार चांद लगा दिए हैं वहीं तथाकथित अधिकारी इस शहडोल जिले में ग्रहण लगा रहे हैं आपने एक कहावत तो सुनी होगी सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का ऐसा ही कुछ शहडोल जिले में अधिकारियों में देखने को मिल रहा है नीचे से लेकर ऊपर तक बैठे अधिकारी कर्मचारी कमीशन के भ्रष्टाचारी गंगा में गोता लगा रहे हैं वहीं चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकार पूरी ईमानदारी के साथ उन भ्रष्टाचारियों का खुलासा करते आ रहे हैं पर अब ऐसा लगने लगा है कि ईमानदार  निष्पक्ष पत्रकार को अपनी कलम रोकनी पड़ेगी जी हां आपने ठीक पढ़ा आज की खबर इसी पर आधारित पूरी खबर को ध्यान से जरूर पढ़ें। आखिर मामला क्या है और एक भ्रष्ट अधिकारी ने किस तरह से ईमानदार निष्पक्ष पत्रकार को झूठे आरोपों के षड्यंत्र में फंसाने का प्रयास किया पर सांच को आंच नहीं ऐसा माना जाता है कि जो सत्य की राह पर चलता है उसके रास्ते में कांटे होते हैं लेकिन उसे मंजिल जरूर मिलती है जो असत्य के रास्ते पर होता है कुछ दिन तो खूब दूध मलाई खाता है पर फिर क्या दुर्गति होती है इसका अंदाजा आप सभी पाठक स्वयं लगा सकते हैं।

पहले नायक फिर पत्रकार बना खलनायक

हम आपको बता दिया पूरा मामला शहडोल रेलवे स्टेशन से संबंधित है और इस पूरे मामले में जब निष्पक्ष निर्भीक पत्रकार से हमारी टीम ने चर्चा की तो सारी सच्चाई खुलकर सामने आए चौथे स्तंभ वाले पत्रकार ने बताया कि मैंने जीआरपी और आरपीएफ के कार्यप्रणाली की जब अच्छी खबरें प्रकाशित करना शुरू किया तो मैं अधिकारी कर्मचारियों के लिए नायक बन गया और जब मैंने उनकी कमियों को उन्हें दिखाया तो सबसे बड़ा खलनायक बन गया हम आपको बता दें कि शहडोल रेलवे स्टेशन अव्यवस्थाओं में गिरा रहता था नियम कानून का पालन केवल आम जनता करती थी अधिकारी कर्मचारी नहीं कई सारी मीडिया की रिपोर्ट की जब हमने पड़ताल की तो एक बड़ा खुलासा हुआ जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि आरपीएफ प्रभारी शहडोल मनीष के द्वारा जम के भ्रष्टाचार किया गया देखने वाली बात यह है कि संबंधित अधिकारी केवल आश्वासन देकर कर्मचारियों को छोड़ देते हैं जो समझ के परे आखिर ऐसा क्यों।

पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी के द्वारा किये गये कुछ ग्राउंड रिपोर्टिंग के मुख्य बिंदु

निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी के द्वारा लगातार जीआरपी आरपीएफ रेल प्रशासन के खिलाफ खबर प्रकाशित की गई जिनमें भ्रष्टाचार की पोल खोली गई उच्च अधिकारियों तक मामले को पहुंचाया गया जिसके बाद उच्च अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद कार्यवाही भी हुयी पर किसी अधिकारी कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई जो सबसे बडे सवाल को जन्म देता है ।

निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार ने जानकारी देते हुए बताया कि ऑटो चालकों ने आरपीएफ शहडोल पर गंभीर आरोप लगाए थे कई मुद्दों को लेकर उस पर मैंने ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी।आम जनमानस व रेल यात्रियों को जागरूक कर रेल पटरी पार करने पर कायमी करते हुए जुर्माना की राशि वसूली जाती है पर जीआरपी में पदस्थ एक महिला कर्मचारी को देखिए कैसे खुद नियम का उल्लंघन कर रही है इस पर मैंने समाचार बनाया था।शहडोल रेल बाल उद्यान नाम का ही है लाखों करोड़ों रुपए हर जगह खर्च किए जा रहे हैं रेल प्रशासन के द्वारा लेकिन छोटे बच्चों के उद्यान से और किसी की नजर ना थी और ना ही वर्तमान में है इस पर एक छोटी सी ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हुए मुख्य जिम्मेदार संबंधित विभाग वरिष्ठ अनुभाग अभियंता नंदकिशोर वर्मा क्योंकि परिसर में बैठकर असामाजिक तत्व द्वारा गांजा शराब जैसे मादक पदार्थों का सेवन किया जाता था वर्तमान का नहीं पता जिसकी जिम्मेदारी कोतवाली पुलिस के अलावा प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ की विशेष है दोनों अधिकारियों की तस्वीर लगाकर मैंने समाचार बनाया था शायद यह भी एक बौखलाहट हो सकती है ।जनसेवा का बड़ा प्रमाण देते हुए शासकीय रेल पुलिस जीआरपी शहडोल अपने कर्तव्य से विमुख होकर अर्धरात्रि ऑन ड्यूटी वह भी वर्दी में टेबल कुर्सियों में सोए पड़े हुए थे स्टिंग ऑपरेशन करते हुए मैंने समाचार बनाया स्पा इस प्रकार कई गांव रिपोर्टिंग में द्वारा किया गया जिसके बाद अधिकारियों ने बौखलाहट में मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचते हुए मेरे ऊपर आरोप लगाया और आज तक आरोप साबित नहीं हुआ मैं निर्दोष साबित हुआ मेरी मांग है कि जिसने मेरे ऊपर आरोप लगाया उस पर कार्यवाही को पर भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी मुझे बहला रहे हैं और उस पेटी कांटेक्टर विनोद सिंह और पूर्व आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार पर आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई मैं मांग करता हूं कि इन दोनों पर कार्यवाही हो।

निष्पक्ष पत्रकार ने भ्रष्टाचार की खोली पोल अधिकारी बौखलाया 

इस पूरे मामले की अगर गहराई से पड़ताल की जाए तो यह स्पष्ट रूप से देखन में आ रहा है कि आरपीएफ कार्यालय शहडोल के सामने से एक शराबी प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री को गाली देते हुए निकल रहा था वहीं खड़े आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार शराबी के हां में हां मिलाते हुए खुद भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को गाली देते रहे जिसकी वीडियो पत्रकार ने बनाई और उच्च अधिकारियों को भेजा 

निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी के द्वारा लगातार जीआरपी आरपीएफ रेल प्रशासन के खिलाफ खबर प्रकाशित की गई जिनमें भ्रष्टाचार की पोल खोली गई उच्च अधिकारियों तक मामले को पहुंचाया गया जिसके बाद उच्च अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद कार्यवाही भी हुयी पर किसी अधिकारी कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई जो सबसे बडे सवाल को जन्म देता है 

पुर्व आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार इतने बौखलाऐ की निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी पर झुठे आरोप लगवा कर जिले के पत्रकारो को वडशाप पर समाचार बनाने का निवेदन कर डाला अगर देखा जाए तो पुर्व  आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार के मोबाइल फोन की अगर कडाई से जांच कराई जाए तो भ्रष्टाचार के और भी खुलासे हो सकते हैं पर सबसे बड़ा सवाल कि जांच करेगा कौन।

 अधिकारी ने अपने छररे पेटी कांट्रेक्टर से करा दी शिकायत

निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी ने जब जीआरपी, आरपीएफ, रेल प्रशासन के भ्रष्टाचार की जब पोल खोल दी और मामले को उच्च अधिकारियों ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कार्यवाही की तो साहब ऐसे बौखलाये की कार्यवाही के बाद अपने छररे पेटी कांट्रेक्टर बिनोद सिंह से एक झूंटी शिकायत पत्र लेते हुए तुरंत कार्यवाही करते हुए जांच शुरू कर दी और जांच पुरी हुई पर एक कहावत है कि सांच को आंच नहीं बस कुछ इसी प्रकार निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी पर लगे सभी आरोप निराधर निकले।

जांच के दायरे में आरपीएफ प्रभारी और आरोपी पेटी कांट्रेक्टर

इस पुरे मामले को गंभीरता से समझा जाऐ तो हर कड़ी शीशे की तरह साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह एक निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी पर झुठे आरोप लगाया गया और जब आरोप की जांच होती है तो निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी पुरी तरह से निर्दोष साबित होते हैं वहीं उच्च अधिकारियों के द्वारा आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार को हटाया गया और

 वर्तमान में अभी आरपीएफ प्रभार में दो लोग हैं पहला अनूपपुर आरपीएफ थाना प्रभारी एम.एल, यादव यहां भी प्रभार में है और दूसरा यही का आरपीएफ प्रभार में है डीके यादव। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्भीक निष्पक्ष ईमानदार पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी पर जिस पेटी कांट्रेक्टर बिनोद सिंह ने आरोप लगाया उससे पत्रकार श्याम दास मानिकपुरी ने तो कभी मिला न कभी फोन पर बात किया कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि पत्रकार और पेटी कांट्रेक्टर दोनों एक दूसरे को न जानते न पहचानते अब ऐसे में सवाल यह है कि फिर आखिर क्यों पेटी कांट्रेक्टर ने पत्रकार के खिलाफ शिकायत पत्र दिया वहीं सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार ने पेटी कांट्रेक्टर से पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई यह तो जांच का विषय है और अगर आरपीएफ एवं रेलवे प्रशासन के उच्च अधिकारी अगर पुर्व आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार एवं पेटी कांट्रेक्टर बिनोद सिंह के मोबाइल की जांच करें तो बडा खुलासा हो सकता है अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इन सभी गंभीर विषयों की जांच करते हैं या फिर भ्रष्टाचार की यह गंगा निरंतर इसी तरह बहती रहेगी।

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