दक्षिण वनमण्डल डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे की सक्रियता से सक्रिय हुआ दक्षिण वन मंडल

वन अधिकारीयों ने की बड़ी कार्यवाही, वन अपराधियों की अब खैर नहीं
अखिलेश कुमार शर्मा मोबाइल नंबर 7999140850
अगर देखा जाए तो काफी लंबे अरसे के बाद दक्षिण वन मंडल अपने निशक्रियता, लापरवाही, एवं भ्रष्टाचार से जागा।एक पुरानी कहावत है कि जैसा घर का मुखिया होगा वैसे उस घर के सदस्य होंगे।इसी प्रकार दक्षिण वन मंडल में कई डीएफओ आऐ और गये पर दक्षिण वन मंडल की निशक्रियता, लापरवाही, एवं भ्रष्टाचार नई नई सुर्खियां बटोरती रही पर जब से नई डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे ने दक्षिण वन मंडल की कमान संभाली और सक्रियता दिखाई तो दक्षिण वन मंडल में मानों हड़कंप सा मच गया है निशक्रियता, लापरवाही, एवं भ्रष्टाचार से जुड़े वन अधिकारी कर्मचारी पुरी तरह से सक्रिय हो गऐ ओर दक्षिण वन मंडल डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे के मार्गदर्शन में पुरी सक्रियता से कार्य करने लगे वन अपराधियों को पकड़ कर जेल भेजा जा रहा है।

शहडोल। दक्षिण वनमण्डल शहडोल की एक बड़ी कार्यवाही मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त शहडोल एल०एल० उइके एव हमेशा से अपने कार्य के प्रति ईमानदार और सक्रिय सुश्री श्रद्धा पन्द्रे वन मण्डलाधिकारी दक्षिण शहडोल के कुशल मार्ग दर्शन एवं नेतृत्व में वनमण्डल दक्षिण शहडोल अन्तर्गत वनपरिक्षेत्र जैतपुर में मृत बाघ का शव पाये जाने के उपरान्त वनमण्डलाधिकारी दक्षिण शहडोल सुश्री श्रद्धा पन्द्रे द्वारा तत्काल संज्ञान में लेते हुये तुरन्त मौका स्थल पर पहुंच कर टाइगर मृत्यु के समय एन०टी०सी०ए० द्वारा जारी एस०ओ०पी० के तहत डाग स्क्वायड दक्षिण वनमण्डल शहडोल द्वारा सर्चिंग करायी गई। उसके बाद जारो गाइडलाईन अनुसार राजस्व विभाग के अधिकारी तहसीलदार एवं प्रभारी तहसीलदार, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, एन0टी०सी०ए० के प्रतिनिधि, वनमण्डलाधिकारी दक्षिण शहडोल एवं उपवनमण्डलाधिकारी जैतपुर की उपस्थिति में पशुचिकित्सकों के दल द्वारा एस० ओ०पी० के तहत शव का शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) किया गया एवं शव परीक्षण उपरान्त शवदाह किया गया।
वन कर्मियों ने 11 संदिग्ध आरोपियों को पकड़ा
एस ० ओ०पी० के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर बाघ के मृत्यु के कारणों का पता लगाने डाग स्क्वायड की मदद लेकर आरोपियों की पता सजी (तलाश शुरू की गई जिसमें से 11 संदिग्ध आरोपियों को पकड़कर उनसे पूछताछ करने पर बाघ के मारने की घटना को कबूल किया गया। आरोपियों द्वारा बताया गया कि बाघ को हम लोगों ने मिलकर करन्ट से फसाकर मारकर जंगल में फेंक दिया था। उनकी निशानदेही पर शिकार में प्रयुक्त कटिया फसाने का बांस,जी०आई०तार, बांस की खूटी, कांच की शीशी, बाघ के मूछ के बाल मृत बाघ को हटाने में प्रयुक्त सांगा ( साल की बल्ली) तथा पुराने शिकार किये हुये जंगली सुअर के दांत बरामद किये गये आरोपियों की निशानदेही पर घटना स्थल वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रकरण को की शिनाख्त कराई गई विवेचना में लिया गया। कार्यवाही आगे जारी है।
आरोपियों के नाम
केमला पिता सावी आनंद कुमार सिंह पिता महगू, विनोद पिता कासी सिंह, लालसिंह पिता कासी, डीलन सिंह पिता बानी, राजू सिंह पिता माघो, सुशील सिंह पिता शंकर सिंह, सभी निवासी ग्राम लफदा एंव राचरण पिता रेरा, रामदास सिंह पिता रेरा, रामखेलावन पिता बीरवल सभी निवासी दुधरिया तथा जीतेन्द्र सिंह पिता जगदीश सिंह निवासी ग्राम घोरवे।
उक्त कार्यवाही में इनकी रही सराहनीय भूमिका
बादशाह रावत उपवनमण्डलाधिकारी जैतपुर, राहुल सिंह सिकरवार वनपरिक्षेत्र अधिकारी जैतपुर, हेमन्त प्रजापति वनपरिक्षेत्र अधिकारी गोहपारू, अंकुर तिवारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी केशवाही,कमला प्रसाद वर्मा परिक्षेत्र सहायक बुढार, पराग सिंह धुर्वे परिक्षेत्र सहायक नेमुहा, बैसाखू कोल उपवनक्षेत्रपाल,अन्नपूर्णा चौधरी परिक्षेत्र सहायक देवरी नारेन्द्र कुमार बाथम परिक्षेत्र सहायक चुहिरी कमल प्रसाद पयासी डाग हेण्डलर, राजकुमार त्रिपाठी सहायक डाग हेण्डलर एवं वनपरिक्षेत्र जैतपुर, गोहपारू एवं केशवाही के समस्त स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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