किसान, पशु-पक्षी,जलीय जीव जंतु का जीवकोपार्जन करना हुआ मुश्किल

किसानों पर अल्ट्राटेक कोल माइंस का बरस रहा कहर
सवालों के घेरे में प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली
अखिलेश कुमार शर्मा मोबाइल नंबर 7999140850
शहडोल।जल ही जीवन है पर जब जल ही विषैला हो तो जीवन कैसे बचाएं सबसे बड़ा सवाल है वहीं आदिवासी बाहुल्य जिला शहडोल में अधिकारी से लेकर नेता तक जिले में “आल इज बेल का डंका बजाते हैं ” पर अगर मैदानी हकीकत देखा जाएं तो अधिकारियों से लेकर नेताओं की कार्यप्रणाली की पोल खुल जाएगी नदी और तालाबो के संरक्षण की बात कही जाती है पर जिले में देखा जाए तो आधे से ज्यादा तालाब अतिक्रमण की मार झेल रहे हैं तो कुछ प्रदुषण की मार झेल रहे हैं वहीं नदी का पानी तो बदबूदार काला देखने को मिल रहा है पर जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साध रखा है।
भूमि हो रही बंजर,भुंखो मरने की कगार मे किसान
शहडोल नगर के कई बार्डो से गुजरने वाली मुड़ना नदी का पानी काला बदबूदार हो गया जिससे किसान, पशु-पक्षी,जलीय जीव जंतु का जीवकोपार्जन करना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है पर संबंधित विभाग के अधिकारी जान कर भी अंजान बने हैं आखिर क्यों क्या शहडोल मुख्यालय के बार्डो से होकर बहने वाली मुड़ना नदी का क्या काला बदबूदार पानी नहीं दिखता वहीं किसानों का परिवार जन भी नदी के प्रदुषित पानी को देख कर परेशान हैं कि कैसे करें खेती किसानी कैसे उगाए विटामिन युक्त सब्जियां, वहीं पशु पक्षी एवं जलीय जीव जंतु भी इस काले बदबूदार पानी से परेशान हो रहे हैं और मौत के मुंह में जा रहे वही किसानों एवं वार्ड के पार्षदों ने कई बार कोल माइंस के प्रबंधक को समस्या बताई बावजूद आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई और निरंतर कोल माइंस का काला पानी नदी में प्रवाहित हो रहा है जिससे नदी का पूरा पानी बदबूदार एवं काला दिखाई दे रहा है वही किसान एवं किसानों के परिवारजन इस काले बदबूदार पानी से परेशान है।
सीईओ जिला पंचायत को पार्षदो ने हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा
शहडोल शहर के अंदर बह रही नदी मुड़ना कई वार्डो से होकर गुजरती है और वहां के जनजीवन के लिए I अहम उपयोगी मानी जाती है जहां किसान खेती में उपयोग करता है मवेशी पीने के लिए उपयोग करते हैं और आमजन कपड़ा धोने नहाने के साथ अग्नि संस्कार के बाद कई कृत के लिए इस नदी के पानी का उपयोग कई वर्ष से करते चले आ रहे हैं लेकिन वर्तमान में इस नदी के पानी को अगर देखा जाए तो पूर्ण रूप से प्रदूषण होकर काले रंग का दिखने लगा है एवं बदबूदार हो गया है यह नदी के प्रदूषण का कारण अल्ट्राटेक कोल माइंस विचारपुर से छोड़ा जा रहा गंदा पानी है जिस कारण अब यह पानी किसी भी योग्य नहीं रह गया है इस मामले को लेकर वार्ड क्रमांक 36 के पार्षद पूर्णेन्द्र मिश्रा एवं वार्ड क्रमांक 37 के पार्षद आशुतोष यादव राजा समाज सेवी मनोज पाठक के साथ कई वार्ड वासियों ने हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन जिला कलेक्टर के नाम सी ईओ जिला पंचायत को सोपा गया एवं मांग की गई कि जल्द ही उक्त नदी के प्रवाहित जल को प्रदूषण मुक्त किया जाए जिससे उसके पानी का उपयोग किया जा सके।
अल्ट्राटेक कोल माइंस विचारपुर के प्रवंधक को किसका संरक्षण
शहडोल जिला मुख्यालय होने के बावजूद शहडोल नगर में संबंधित कई विभागों के जिलों से लेकर संभागीय अधिकारी का मुख्यालय है अधिकारी स्वयं यहां निवासरत हैं लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं ऐसा क्यों वही देखा जाए तो प्रदूषण विभाग का संभागीय कार्यालय भी शहडोल नगर में स्थित है और प्रदूषण विभाग के जिले से लेकर संभागीय अधिकारी भी कार्यलय में ऐसी की ठंडी हवा खा रहे हैं और जानकर भी प्रदूषण विभाग के अधिकारी अनजान बने हैं आखिर क्यों ऐसे कई सवाल अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे हैं और यदि प्रदूषण विभाग के अधिकारी अपने कार्य के प्रति ईमानदार हैं तो कार्यवाही तो बनती है साहब और कब करेंगे कार्यवाही या फिर अल्ट्राटेक कोल माइंस विचारपुर के प्रवंधक सय्यद कादीर की दबंगई के आगे बेबस लाचार हो जाते है जिले में बैठे संबंधित विभाग के अधिकारी आखिर नदी के पानी को प्रदुषित करने वाले अल्ट्राटेक कोल माइंस विचारपुर के प्रवंधक सय्यद कादीर पर आखिर क्यों संबंधित विभाग के अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं सबसे बड़ा सवाल है।
पुर्व कमिश्नर के आदेश भुल गए कोयला खदान के अधिकारी
पुर्व कमिश्नर आर बी प्रजापति ने एससीएल, एवं अन्य कंपनियों के प्रवंधक के साथ बैठक कर प्रदुषित पानी का सदउपयोग करने के उद्देश्य से चर्चा करते हुए कहा था कि संभाग मे संचालित कोयला खदान के अधिकारियों को निर्देश जारी किया जाता है कि जिंदा नाला एवं नदियों में कोयला खदानों से निकलने वाले गन्दे पानी को सीधे जिंदा नाला एवं नदियों में ना डालें बल्कि गन्दे पानी को साफ स्वच्छ कर के ही कोयला खदानों का पानी नदियों में छोड़े ताकि जिंदा नाला एवं नदियों का पानी प्रदुषित न हो बल्कि साफ एवं स्वस्छ रहे और अगर ऐसा नहीं होता है तो कोयला खदानों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। वही बता दें कि वर्तमान में नए कलेक्टर एवं नए कमिश्नर जिले व संभाग की बागडोर संभाले हुए हैं अब देखना यह है कि जिले व संभाग के मुखिया के द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है क्या जनता को न्याय मिलता है या फिर मुडना नदी में काला बदबूदार पानी बहता रहेगा।

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