महाकाल बनी सोन नदी का काल अवैध उत्खनन को मिला खनिज विभागीय ढाल

उमरिया। जिले में जब से रेत ठेका कंपनी महाकाल मिनरल्स ने ठेका लिया है तब से वैध ठेके की आड़ में अवैध उत्खनन व परिवहन दिन दहाड़े किया जा रहा है स्थिति तो यह है कि अवैध उत्खनन की सारी सीमाएं लांघकर सोन नदी में हेवी हेवी मशीन उतरकर नदी के मूल स्वरूप में बदलाव करते हुए नदी के गर्भ से ही अपनी तय सीमाओं को छोड़कर अन्य स्थानों से अवैध उत्खनन किया जा रहा है और यह मामला उमरिया जिले के हर उसे स्थान का है जहां-जहां महाकाल मिनरल्स कंपनी ने रेत ठेका लिया है ताजा मामला सामने आया है की रेत खदानों का जियो टैगिंग का उल्लेख नहीं है एनजीटी के अनुसार जीपीएस लगे वाहनों से ही रेत की धुलाई होनी चाहिए मगर चोरी करने की इतनी छूट है कि बिना जीपीएस वाहनों के धुलाई की जा रही है बात यहीं समाप्त नहीं होती है अवैध उत्खनन में दिलेरी इतनी है कि सोन नदी के दूसरी तरफ उमरिया जिले के बलौढ़ पर शुरू हुई खदान में चंदिया तहसील के खेरवा की रॉयल्टी काटी जा रही है सूत्रों के अनुसार सोन नदी के बालोद पर मानपुर तहसील में शुरू हुई अमिलिया खदान के संचालक द्वारा रेट का उत्खनन तो सोन नदी के बलौढ़ खदान से किया जा रहा है लेकिन टीपी रॉयल्टी अन्य स्थानों की दी जा रही है महाकाल मिनरल्स द्वारा खेरवा खुर्द गांव की टीपी जारी कर अवैध उत्खनन अन्य जगहों से किया जा रहा है।
जानने एवं समझने वाली बात:- अचंभा इस बात का है कि इन सभी अवैध उत्खनन व परिवहन के विषय को लेकर स्थानीय व क्षेत्रीय समाचार पत्रों द्वारा लगातार प्रकाशन किया जा रहा है मगर स्थानीय प्रशासन व खनिज विभाग में जूं तक नहीं रेंग रही न ही विभाग द्वारा कोई कार्यवाही की जा रही है इससे यह बात तो स्पष्ट होती है कि खनिज विभाग में सफेद लिफाफे का वजन ज्यादा पहुंच रहा है और इन्हीं वजन से खनिज विभाग की अधिकारी आंख मूंद कर अवैध उत्खनन करने वालों के लिए विभाग को ढाल बनाए हुए हैं।

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