श्रीराम कथा को सुनने श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

शहडोल। नगर के शुभम पैलेस में मनोज टीवीएस परिवार के द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीराम श्रीराम कथा में व्यास पीठ बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज द्वारा अष्टम् दिवस गुरुवार 27 मार्च को सीता खोज, रामेश्वरम् स्थापना के प्रसंग का रसपान रोचक पूर्ण कराया गया।व्यास बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज द्वारा सुंदर और सुमधुर सचित्र झांकी के साथ कथा का रसपान कराने से श्रोता मंत्र मुग्ध होकर नृत्य भी किए।
कथा व्यास जी ने प्रभु श्रीराम के महिमा को बड़े विस्तार से संगीतमय सुनाया। श्रीराम कथा जैसे जैसे प्रभु श्रीराम के राजतिलक की ओर अग्रसर हो रहा है श्रीराम चरित मानस प्रेमियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। श्रीराम चरित्र मानस प्रेमियों का गुरुवार को भी बड़ी संख्या में शुभम पैलेस में कथा सुनने को जमावड़ा रहा।आज की कथा सुनने पूर्व विधायक प्रमिला सिंह, बाल कल्याण आयोग की मेघा पवार, वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल गुप्ता सहित कई विशिष्ट जन पहुंचकर व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर श्रीराम कथा का आनंद उठाया। श्रीराम कथा के व्यास आचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज ने अष्टम् दिवस की श्रीराम कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि श्रीराम जी जब सीता माता की खोज में लंका के किनारे पहुँचे तो वहाँ रास्ते में विशाल समुद्र उनका मार्ग रोक लेता है,रामजी समुद्र देव से रास्ता माँगने के लिए उनका पूजन करते हैं और जब समुद्र देव रास्ता नहीं देते तो श्री राम क्रोधित होकर अपना धनुष तक उठा लेते हैं। कथा वाचक आचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य ने बताया कि रामेश्वरम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है,
यह मंदिर देश के चार धामों में से एक है। उन्होंने कहा कि रामेश्वरम में दर्शन करने से शिवजी और श्रीराम की दोनो की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि सीता माता के खोज के दौरान भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम में यह प्रसिद्ध शिवलिंग स्थापित किया था। व्यास पीठ आचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज द्वारा सीता खोज, रामेश्वरम् स्थापना आदि की महिमा का सुंदर वर्णन बहुत ही रोचक और सरल स्वरूप में किया गया। कथा व्यास ने आज के प्रसंग में बताया कि रावण द्वारा जानकी का हरण करने के पश्चात विभीषण राम की शरण में चला जाता है। सीता की खोज करते हुए बाली-पुत्र अंगद रावण के दरबार में पहुंचकर अपनी शक्ति का परिचय देते हुए दरबार में अपना पैर जमा लेता है। जब कोई भी शूरवीर अंगद के पैर को नहीं हिला सका तो रावण स्वयं अंगद का पैर हिलाने के लिए उठते हैं।इस पर अंगद रावण को श्रीराम के पैरों में पड़कर माफी मांगने की सलाह देते हैं। मेघनाथ से युद्ध होने पर लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं आदि के प्रसंग को विस्तार पूर्वक सुनाया गया।श्रीराम कथा में महाराज जी के साथ संगीत मंडली ने सु-मधुर कर्ण प्रिय भजनों की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे परिसर को भक्ति से सराबोर कर दिया।अष्टम दिवस की श्रीराम कथा के प्रारंभ में मुख्यश्रोता बब्बीबाई गुप्ता एवं आयोजक मनोज टीवीएस परिवार के हनुमान प्रसाद, राजेश गुप्ता,मनोज गुप्ता, योगेश गुप्ता,हिमांशु गुप्ता,शिवांश गुप्ता एवं अक्षत गुप्ता ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यासपीठ का पूजा अर्चना किया। कथाव्यास आचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य ने स्वागत पश्चात श्रीराम कथा में सीता खोज, रामेश्वरम् स्थापना की महिमा के प्रसंग का रसपान श्रोताओं को कराया गया। कथा में भजनों की मनमोहक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
आचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य द्वारा मनोज गुप्ता परिवार के गुरुजी स्वामी रामकृष्ण आचार्य के सानिध्य में कथा के मुख्य यजमान बब्बीबाई गुप्ता सहित श्रोताओ को यह श्रीराम कथा का पुण्य लाभ 29 मार्च तक मिल सकेगा।

Subscribe to my channel
Comments are closed.