जैसे-जैसे स्कूल खुले, वैसे-वैसे शुरू हुआ कमीशन का खेल — शिक्षा की जगह लूट का कारोबार!

आशीष सिंह तोमर की रिपोर्टिंग
अंबाह/स्कूल खुलते ही निजी स्कूल संचालकों और बुक स्टोर संचालकों की सांठगांठ से कमीशनबाज़ी का खेल फिर शुरू हो गया है। किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री की खरीद पर अभिभावकों को जबरन विशेष दुकानों से ही सामान लेने को मजबूर किया जा रहा है — वो भी बाजार से दोगुने दामों पर।
शिक्षा की पवित्र व्यवस्था को व्यवसाय बनाकर स्कूल संचालक अब एजेंट बन गए हैं, जो किताब और ड्रेस बेचने वाले दुकानदारों से मोटा कमीशन लेकर अभिभावकों की जेबें ढीली करवा रहे हैं।
स्कूल प्रबंधन द्वारा कहा जाता है:”आपको यूनिफॉर्म और किताबें हमारे बताए गए बुक स्टोर से ही खरीदनी होंग
कुछ अभिभावकों ने बताया ।”बाजार में जो किताब ₹300 की है, वही स्कूल द्वारा बताए गए स्टोर पर ₹500 में मिल रही है।”
क्या शिक्षा विभाग इस खुले कमीशन तंत्र से अनजान है?
कब होगी इन स्कूल संचालकों और बुक डीलरों पर कार्रवाई?आम जनता और अभिभावक कब राहत की सांस लेंगे?
कब शिक्षा विभाग इस पर सख्ती से जांच करेगा और दोषियों पर कार्रवाई कर पारदर्शिता बहाल करे!?
इनका कहना हैं
(आर.एस.सिकरवार बीआरसी अंबाह )
हमारी जानकारी में है हम कल कार्यवाई करवाएंगे

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