भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

स्व सहायता समूह की महिलाएं तैयार किए गए उत्पादों को बाजार में उतारकर आय अर्जित करें-कलेक्टर

211
Above News

विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट

ग्रामीण आजीविका परियोजना द्वारा गठित स्व सहायता समूहों के सीएलएफ की बैठक संपन्न

– स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं समूह की महिलाओं के सामाजिक आर्थिक उन्नयन के साथ जरूरत मंद गांव की अन्य महिलाओं की भी मदद करें। जिससे उनके जीवन में परिवर्तन आ सके। समूह की महिलाओं द्वारा वर्तमान में विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन छोटी-छोटी गतिविधियों को वृहद रूप देने की आवश्यकता है, जिससे उन्हें अधिक लाभ मिल सकेगा। यह निर्देश कलेक्टर डॉ केदार सिंह ने कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में आयोजित ग्रामीण आजीविका परियोजना द्वारा गठित स्व सहायता समूहों के सीएलएफ की बैठक में दिए। बैठक में आजीविका परियोजना के जिला समन्वयक अजय सिंह, अग्रणी बैक प्रबंधक, जिला प्रबंधक तथा ब्लाक समन्वयक एवं सीएलएफ की दीदियां उपस्थित रहीं।
कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कहा कि समूह के सदस्यों को लाडली बहना योजना का लाभ भी मिल रहा है। सभी लाडली बहनें 250 रूपए प्रतिमाह की दर से बचत करेंगी तो हर महीने जिले में 3 करोड़ रूपए की बचत हो जाएगी। इस राशि का उपयोग समूह की महिलाएं व्यक्तिगत कार्याें तथा अपनी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में कर सकती हैं। वर्तमान में समूह की महिलाओं द्वारा अगबत्ती निर्माण, सिलाई कार्य, खेती एवं उद्यानिकी, बकरी पालन, डेयरी, वनोपज संग्रहण, दीदी कैफे आदि जैसी अनेकों गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों का स्वरूप छोटा होने के कारण परिणाम उत्साह जनक नहीं मिल पाते हैं। जिले में संचालित सीएलएफ क्लस्टर वार गतिविधियों का चयन कर कई समूहों को जोड़कर वृहद स्तर पर उत्पादन प्रारंभ करने से आय में वृद्धि की जा सकती है। कलेक्टर ने कहा कि जिले में विकास खंड स्तर पर आजीविका भवन बनाए गए हैं। इन भवनों का उपयोग समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के विक्रय के लिए भी किया जाए। जिले भर में चैन बनाकर समूहों द्वारा उत्पादित सामग्री इन विक्रय केन्द्रों से बेची जा सकती है। इससे समूह की गतिविधियां बढ़ेगी तथा आर्थिक आय में भी वृद्धि होगी।
आपने कहा कि जिले में 12428 स्व सहायता समूह गठित किए गए हैं। जिनसे 146000 परिवारों को जोड़ा गया है। समूह की महिलाएं समूह द्वारा उत्पाद का उपयोग प्रारंभ करें तो कई समूहों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही समूह की महिलाएं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। आपने कहा कि कुपोषण अभियान, क्षय उन्मूलन, स्कूली बच्चों को स्कूल में नियमित भेजने आदि कार्याें में भी समूह की महिलाएं अग्रणी भूमिका निभाएं। ग्रामीण आजीविका परियोजना के जिला समन्वयक जय सिंह द्वारा जिले में संचालित समूहों की गतिविधियों की जानकारी दी गई।

खबरों के अपडेट पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
E-Paper