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कल्चुरी कालीन विराट शिव मंदिर में भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम

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विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट

श्रावण माह के प्रथम सोमवार को विराट शिव मंदिर में अपनी आस्था अर्पित करने पहुंचे श्रद्वालु

– सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है, और भगवान शिव की भक्ति में डूबी विराट नगरी शिवमय हो उठी है। सावन का पहला सोमवार, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, विराट शिव मंदिर में आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला। बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। विराट नगर की गलियों में ‘बोल बम’ के जयकारों की गूंज और भक्ति की लहर ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सावन का पहला सोमवार जिला मुख्यालय शहडोल के कल्चुरी कालीन विराट शिव मंदिर में भक्ति और उत्साह का संगम लेकर आया। श्रद्धालु भोले नाथ बाबा के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करने पहुंचे।

विराट शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर की स्थापना 11 वीं शताब्दी में कल्चुरीकाल के राजा युवराज देव प्रथम ने कराई थी। यह मंदिर चंदेल शासकों के खजुराहो मंदिरों से मिलता- जुलता है। मंदिर की लंबाई 46 फीट और ऊंचाई 72 फीट है। मंदिर के बाहर नंदी विराजमान हैं। मंदिर की दीवारों पर बाहर की ओर जो प्रतिमाएं पत्थरों पर नक्काशी कर बनाई गई हैं, वे खजुराहो की तरह हैं।

जिला मुख्यालय के दुर्गा मंदिर, रेल्वे स्टेशन मार्ग में स्थापित भोलनाथ के मंदिरों सहित अन्य शिव मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी, हर गली, हर मंदिर ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से गूंजा।

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