दिव्य भव्य चातुर्मास महा-महोत्सव – मुंबई (11-07-2025 से जारी) परम धर्म संसद 1008 गौ संसद की होगी बैठक

जम्मू-कश्मीर। गौ संसद परम धर्म संसद 1008 जम्मू-कश्मीर के प्रभारी दीपू रैना ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया की परमपूज्य ज्योतिषपीठाधीश्वर भगवान शंकराचार्य स्वामि श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 महाराज जी के दिव्य नेतृत्व में दिव्य भव्य चातुर्मास महा-महोत्सव का आयोजन मुंबई में बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ हो रहा है ! यह महा-महोत्सव संपूर्ण भारत से आए संतों, धर्माचार्यों, प्रदेश प्रभारियों एवं भक्तजनों को एक साथ जोड़ते हुए सनातन धर्म की मूल धारा को सशक्त करने का संकल्प ले रहा है !इस पावन अवसर पर परम धर्म संसद 1008/गौ-संसद की एक महत्वपूर्ण बैठक सभी प्रदेश प्रभारियों की उपस्थिति में भगवान शंकराचार्य जी के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई ! इस बैठक में अनेक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए गए !
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय:-
1. प्रतिनिधियों की नियुक्ति की प्रक्रिया
पूरे भारत में 543 गौ-सांसद एवं 4123 गौ-विधायक नियुक्त किए जाएंगे ! इनकी नियुक्ति की जिम्मेदारी संबंधित प्रदेश प्रभारियों को सौंपी गई है ! अंतिम स्वीकृति भगवान शंकराचार्य जी द्वारा प्रदान की जाएगी !
इसके बाद आधिकारिक पहचान पत्र एवं नियुक्ति पत्र केवल परम धर्म संसद 1008 द्वारा जारी किए जाएंगे !
2.33 करोड़ गौ-मतदाता संकल्प:-
भारत भर में 33 करोड़ गौ-मतदाताओं को जोड़ने का संकल्प लिया गया है, जो 33 कोटि देवी-देवताओं के प्रतीक स्वरूप होंगे ! इस पहल का उद्देश्य केवल गौमाता की रक्षा ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म के मूल्यों की रक्षा व संवर्धन भी है !
यह अभियान भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मज़बूत करने और समाज को एकजुट करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है !
3.विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारी:-
प्रत्येक गौ-विधायक और गौ-सांसद को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रारंभिक चरण में कम से कम 1008 गौ-मतदाताओं को जोड़ने का दायित्व दिया गया है !
इस क्रमबद्ध प्रयास से राष्ट्रव्यापी स्तर पर 33 करोड़ गौ-मतदाता अभियान को सफलता पूर्वक पूरा किया जाएगा !
4.गौ-रामधाम की स्थापना:-
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक गौ-राम धाम की स्थापना की जाएगी ! इन गौधामों में आवश्यक कर्मचारी एवं संरचना उपलब्ध कराई जाएगी !
इनका उद्देश्य केवल गौमाता की सेवा और संरक्षण ही नहीं, बल्कि यह गौधाम आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक जागृति के केंद्र भी होंगे !
विस्तृत दृष्टिकोण एवं उद्देश्य:-
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि गौमाता की रक्षा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि यह सनातन धर्म, संस्कृति, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा हुआ विषय है।
गौ-सांसद एवं गौ-विधायक आंदोलन के माध्यम से पूरे भारत में एक धार्मिक-सांस्कृतिक नेटवर्क तैयार होगा, जो सनातन धर्म की रक्षा करेगा और भावी पीढ़ियों को धर्म के प्रति जागरूक करेगा !
भगवान शंकराचार्य जी ने इस अवसर पर कहा कि भारत इस समय इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है ! अब समय आ गया है कि धार्मिक शक्तियाँ एकजुट होकर सनातन मूल्यों, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक संप्रभुता की रक्षा करें !गौ-मतदाता, गौ-सांसद और गौधाम की स्थापना इसी दिशा में एक दिव्य और ऐतिहासिक पहल है !
अन्य कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं, जिनकी जानकारी शीघ्र साझा की जाएगी !

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