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शंकराचार्य जी ने कहा हम गौरक्षक हैं इसीलिए हमारी पहचान गोत्र से होती है

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बक्सर,बिहार। गौमतदाता संकल्प बिहार यात्रा बिहार  गाय गौमाता राष्ट्रमाता  गौमाता के प्राणों के रक्षार्थ क्रांतिकारी भूमि बिहार के बक्सर के नया भोजपुर गांव में आज गौमतदाता संकल्प सभा में उपस्थित गौभक्तों के भीड़ को संबोधित करते हुए परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामिश्री:अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हर दूध पिलाने वाली माता नही होती हम गाय के साथ भैंस,बकरी, ऊंटनी आदि पशुओं के दूध भी पीते हैं,लेकिन उन्हें माता नहीं कहते हैं।जिस धर्म को हमने अपने जीवन में अपनाया है,उस धर्म की माता गाय है इसलिए वो हमारी भी माता है।हम गौरक्षक परिवार के लोग हैं,इसलिए गोत्र से हमारी पहचान होती है।जब सबकी काॅमन माता हो तब ही सबलोग आपस में भाई-बहन हो सकते हैं।गौमाता ही भारत माता है गौमाता का ही दूसरा नाम है भारत माता है।भूमि पर अत्यधिक पाप बढ़ने पर भूमि ही गाय का रूप धारण करके ही भगवान के सामने जाती है जिसका अनेकों उद्धरण हमारे सामने है।
परमधर्माधीश श्रीशंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि देश की जीडीपी अगर गौमांस बेचकर बढ़ती है तो हमें ऐसा जीडीपी हमें नहीं चाहिए।विश्वकल्याण के लिए हम सदा से यज्ञ करते रहे हैं विश्वामित्र के यज्ञ को विध्वंस करने वाली ताडका और सुबाहु को भगवान राम ने इसी धरती पर समाप्त किया था।यज्ञ में बाधा आई तो इस धरती पर राम आए जब सामने समस्या उपस्थित होती है तभी उसका समाधान होता है।यज्ञ से दैवीयराज की स्थापना होती है आसुरी शक्तियां सदैव से दैवीयराज के विरुद्ध होती हैं।दान से सुख प्राप्त करना दैवीय स्वभाव एवं छीनकर सुख प्राप्त करना आसुरी स्वभाव है।दैवीय विचार यज्ञ समर्थक व आसुरी विचार यज्ञ विध्वंसक होते हैं।यज्ञ चलता रहे इसलिए भगवान राम को असुरों का वध करना पड़ा तो उन्होंने नि:संकोच किया।सृष्टि के निर्माण के समय ब्रह्मा जी ने मनुष्यों के साथ यज्ञ प्रकट करते हुए कहा कि यह यज्ञ तुम्हारा रक्षा करेंगे।यज्ञ भूमि बक्सर में यज्ञ के प्रमुख साधन ब्राम्हण व गाय के रक्षा भगवान राम ने संकल्प लिया था।हमारे द्वारा किए यज्ञ से देवता प्रसन्न होते हैं।यज्ञ की रक्षा भगवान स्वयं करते हैं। *राम देत नहीं बनत गोसांई* विश्वामित्र के मांगने पर दशरथ ने कहा महाराज राम को देने की हमारी हिम्मत नहीं है,उनके बदले देह या प्राण ले लो आप हमारी।संसाधनों से नहीं युध्दें विजय के संकल्पों से सिद्ध होते है।राम रावण युद्ध में संसाधन रावण के पास था और संकल्प राम के साथ।और अंततः संसाधन हार गया और संकल्प जीत गया। श्रीशंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि गौ हत्या एक साजिश है,गाय से वेद और ब्राह्मण जुडे हैं।यही सनातन धर्म के मूल हैं इसलिए गाय को काटा जा रहा है ताकि सनातन धर्म समाप्त किया जा सके।धर्म के विरुद्ध जाने वाले सबका परित्याग करना ही सनातन धर्म है।बलि ने गुरु, विभीषण ने भाई, प्रह्लाद ने पिता और भरत ने माता का परित्याग कर दिया था।आप अपनी हर मनोकामना की पूर्ति चाहते हो तो गौमाता की रक्षा के लिए आगे आओ।80 वर्ष बीतने के बाद भी आजतक गौहत्या होती ही जा रही है,आजादी के समय दिए गए नेताओं का वचन कब पूरा होगा?नेता के साथ-साथ हम भी उतने ही दोषी हैं आज तक कभी भी हमने गाय के नाम पर वोट नहीं किया।हर पार्टी का लक्ष्य केवल सत्ता और जितने के बाद उस सत्ता को बचाकर रखना मात्र ही नेताओं का लक्ष्य है।भागवत में परीक्षित जी ने कहा कि हम धर्मशील यदु का चरित्र सुनना चाहते हैं।प्रश्न उठता है क्या यदु के अलावा किसी और का चरित्र धर्मशील नही था?यदु के पिता ययाति ने अपने बच्चों से विषय भोग के लिए अपनी युवावस्था मांगी,बडे लडके यदु ने पिता ययाति से कहा कि आप जवानी का उपयोग आप हमारी मां के साथ करोगे इनता सूक्ष्म विचार था महाराज यदु का ऐसे शुद्ध परिवार में भगवान कृष्ण का अवतार हुआ था।हमारा वोट लेकर हमारी माता गाय को आप काटो ये सम्भव नही है।अब से आप सब गौहत्यारी पार्टियों को वोट देने का विचार त्याग दीजिए और मात्र गौभक्त प्रत्याशी को वोट देकर अपना लोक परलोक सुधारिए। भगवान रामेश्वर की पूजा किया पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने । उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय के माध्यम से प्राप्त हुई है। गौमतदाता संकल्प सभा में प्रमुख रूप से सर्व श्री स्वामी प्रत्यकचैतन्यमुकुंदानंद गिरी,स्वामी निधिररव्यानंद सागर,देवेंद्र पाण्डेय आदि सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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