अंबाह में अवैध प्लॉटिंग का धंधा बेखौफ़ – नियमों को दिखाया जा रहा ठेंगा, प्रशासन बना दर्शक

अंबाह। शहर और आसपास के इलाकों में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है। कृषि भूमियों पर बिना अनुमति कॉलोनाइज़र खुलेआम प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। कहीं नोटों की चमक है तो कहीं नियमों की धज्जियाँ उड़ रही हैं।
हालत यह है कि प्रशासन की चुप्पी ने भूमाफियाओं के हौसले और बढ़ा दिए हैं। शिकायतों के बावजूद न जांच हो रही है, न कार्रवाई। ऐसा लग रहा है मानो शहर में ‘जो चाहे, जैसे चाहे, वैसे बेच दे जमीन’ का माहौल बन गया है।
सवाल उठता है — क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए हैं, कॉलोनाइज़र के लिए नहीं?
जानकारों का कहना है कि मध्य प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 1973 के तहत ऐसी प्लॉटिंग कानूनी अपराध है। न तो यह जमीन वैध होती है और न ही ऐसी कॉलोनियों में पानी, बिजली, सड़क या सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएँ मिलती हैं। निवेशकों का पैसा फँसता है और बाद में कार्रवाई के डर से वे परेशान रहते हैं।
अवैध प्लॉटिंग में मूलभूत सुविधाओं का लाभ रहता है अभाव
ऐसी कॉलोनियों में बिजली, पानी, सड़क, सीवर, स्कूल, अस्पताल जैसी सुविधाएँ नहीं होतीं।
बाद में रहने वालों को ये सुविधाएँ खुद के खर्चे पर बनवानी पड़ती हैं, जो बहुत महँगा पड़ता है।
फिलहाल, अंबाह में अवैध कॉलोनियों का फैलता जाल प्रशासन की निष्क्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जनता पूछ रही है
आखिर कब जागेगा प्रशासन और कब लगेगी इस अवैध खेल पर लगाम?

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