कलाकारों ने अकाल, राजा पेमलशाह की कर्मठता से आई खुशहाली और दिल्ली के बादशाह द्वारा उनकी योग्यता को पहचाने जाने को किया जीवंत।

सचिन सिंह राजपूत/ दमोह:गोंड जनजातीय संस्कृति, उनके गौरवशाली इतिहास और सामुदायिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय जननायक महोत्सव का शुभारंभ रविवार की शाम 7 बजे तहसील ग्राउंड में हुआ। जिसमें गोंड सभ्यता के महानायकों पर आधारित प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। मुख्य अतिथि ने पारंपरिक ढंग से कलाकारों का पुष्पमालाओं से स्वागत कर महोत्सव का शुभारंभ किया। कार्यक्रम स्थल पर जनजातीय परंपराओं से सजे मंच, पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-नृत्य की ताल पर उमंग से भरा वातावरण देखने को मिला।पहले दिन की प्रमुख प्रस्तुति के रूप में राजा पेमलशाह पर आधारित नृत्य-नाटिका का मंचन किया। जिसने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। नाटक में ब्रह्मा द्वारा संसार के भरण-पोषण का दायित्व गोंड समुदाय को सौंपे जाने की पौराणिक कथा, सात कोरी देवताओं के मंथन से उत्पन्न प्रिय जननायक पेमलशाह का प्रादुर्भाव तथा उनके चार भाई शंकर शाह, दलपत शाह, बुढ़न शाह और दूधन शाह की औपन्यासिक उपस्थिति को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। राज्य में आए भीषण अकाल, पेमलशाह की कर्मठता से आई खुशहाली, दिल्ली के बादशाह द्वारा उनकी योग्यता को पहचाने जाने और गढ़ मंडला व चौरा दादर को पुनः आबाद करने की कथा को कलाकारों ने नृत्य, संगीत और संवादों के माध्यम से जीवंत कर दिया। प्रस्तुति में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और जनजातीय नृत्य भंगिमाओं ने माहौल को पूर्णतः लोकमय बना दिया। इसका निर्देशन रामचंद्र सिंह ने किया और संगीत मिलिंद त्रिवेदी ने दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय से राजा पेमलशाह के जीवन को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी रही है।आज राजा हीराखान सिंह पर नृत्य-नाट्य मंचन मप्र शासन के संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव गोंड समुदाय के 52 ऐतिहासिक गढ़ों में से प्रथम चरण के 30 गढ़ों पर आधारित कथानकों को नाटकीय रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में गोंड जनजातीय समाज की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शौर्यपरक निरंतरता को केंद्र में रखा है। इसके तहत आज 1 दिसंबर को राजा हीरा खान सिंह पर केंद्रित नृत्य-नाटिका का मंचन होगा। जिसका निर्देशन नवीन सिंह ने किया और संगीत कुलदीप सार्वा ने दीl वहीं कल 2 दिसंबर को वीरांगना रानी दुर्गावती पर केंद्रित नृत्य-नाटिका मंचन होगा। जिसका निर्देशन रामचंद्र सिंह करेंगे और संगीत किशन राय देंगे।

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