रामलला मंदिर की माफी औकाफ भूमि पर अवैध खनन का आरोप, ईंट भट्टा चलाने की शिकायत

अंबाह | तहसील अंबाह के ग्राम पुरावश खुर्द (रूपहाटी के समीप) स्थित प्राचीन रामलला मंदिर की माफी औकाफ भूमि पर अवैध खनन कर ईंट भट्टा संचालन का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्राम रूपहाटी निवासी ने प्रशासन को लिखित आवेदन देकर श्यामवीर तोमर उर्फ गपोचे और अंजू शर्मा पत्नी बालकिशन शर्मा सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि मौजा पुरावश खुर्द के सर्वे क्रमांक 83, 85, 86, 87, 89, 90, 92, 93, 78, 79, 130/3, 102, 131, 105/2 सहित कई सर्वे नंबरों की भूमि प्राचीन काल से रामलला मंदिर की माफी औकाफ भूमि रही है, जिसका उपयोग मंदिर के रखरखाव और धार्मिक कार्यों के लिए होता आया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मंदिर के पुजारी की मृत्यु के बाद गलत तरीके से नामांतरण कराकर पुजारी के वारिसों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री कराई गई और बाद में भू-माफिया के साथ मिलीभगत कर अवैध अनुबंध पत्र के जरिए मंदिर की भूमि पर मिट्टी का अवैध उत्खनन कर ईंट भट्टा संचालित किया जा रहा है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि बिना किसी अनुमति के ईंट भट्टा चलने से जहां मंदिर के रखरखाव में बाधा आ रही है, वहीं अवैध चिमनी के धुएं से पर्यावरण प्रदूषण फैल रहा है। साथ ही स्थानीय अधिकारियों और पटवारी से सांठ-गांठ कर शासन को राजस्व हानि पहुंचाई जा रही है।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि मंदिर की माफी औकाफ भूमि का प्रबंधक कानूनन जिला कलेक्टर होता है, बावजूद इसके मंदिर की पवित्र भूमि पर खुलेआम खनिज नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
मौजा पटवारी का कहना है
इस पूरे मामले में जब पटवारी दीपा तोमर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि
“पुराने खसरों के आधार पर वर्तमान में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उन्हें ही खातेदार माना गया है। हालांकि 1940 के आसपास के खसरों में भूमि के देवस्थान को दिए जाने का उल्लेख है। हमने संबंधित पक्षों से वह आदेश मांगा है, जिसके आधार पर नामांतरण हुआ है।”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कब तक कार्रवाई करता है या फिर मंदिर की माफी औकाफ भूमि पर अवैध खनन यूं ही चलता रहेगा।

Subscribe to my channel
Comments are closed.