पार्षदों ने लगाए घोटाले के आरोप, स्पीड ब्रेकर बने चर्चा का विषय

आशीष सिंह तोमर की रिपोर्टिंग
मुरैना।अंबाह नगर पालिका द्वारा शहर की सड़कों और वार्डों की गलियों में जगह-जगह लगाए गए स्पीड ब्रेकर अब सवालों के घेरे में हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर हाल ही में बनाए गए ब्रेकर उखड़ने और टूटने लगे हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
जब इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ शबीर कौंसार से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि “ब्रेकर उखड़े नहीं हैं, लोगों ने तोड़े हैं।” जब उनसे पूछा गया कि आखिर लोग ब्रेकर क्यों तोड़ेंगे, तो उनका जवाब था, “ये हमें कैसे पता होगा, हो सकता है कुछ लोग वहां ब्रेकर नहीं चाहते हों। पता करवाते हैं।”
सीएमओ के इस बयान ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वास्तव में आम जनता ही ब्रेकर तोड़ रही है तो क्या नगर पालिका ने ब्रेकर लगाने से पहले स्थानीय लोगों की राय ली थी? और यदि ब्रेकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं, तो फिर इन्हें लगाया ही क्यों गया?
मामले को और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि नगर पालिका के कुछ पार्षद भी स्पीड ब्रेकर निर्माण कार्य में अनियमितताओं और घोटाले के आरोप लगा चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतने कम समय में ब्रेकर क्षतिग्रस्त कैसे हो गए?
अब शहरवासियों की निगाहें नगर पालिका प्रशासन पर टिकी हैं। क्या नगर पालिका स्पीड ब्रेकर निर्माण से जुड़ी लागत, गुणवत्ता, ठेकेदार और स्वीकृति संबंधी जानकारी सार्वजनिक करेगी, या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
सवाल बरकरार है—ब्रेकर कमजोर थे या फिर पूरा मामला ही कुछ और है?

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