मेहनत और हौसले से शैल कुमारी बनीं ‘लखपति दीदी’

Vikas Sachdev division reporter ✒️
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मुर्गी एवं बतख पालन से हर महीने कमा रहीं ₹25 हजार, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
शहडोल, 16 अक्टूबर 2026। आत्मनिर्भर बनने का संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है। इसकी मिसाल ग्राम बरमनिया की शैल कुमारी हैं, जो मुर्गी एवं बतख पालन के व्यवसाय से हर महीने लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
स्व-सहायता समूह से मिला सहयोग, बदली जिंदगी
शैल कुमारी दीपिका स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने मुर्गी एवं बतख पालन का व्यवसाय शुरू किया। इसके लिए स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर शेड का निर्माण कराया और पशुपालन विभाग के माध्यम से 400 ब्रायलर एवं देशी चूजे खरीदकर व्यवसाय की शुरुआत की।
छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह काम धीरे-धीरे उनकी आजीविका का मजबूत साधन बन गया। वे अपने यहां तैयार होने वाली मुर्गियों और अंडों को आसपास के बाजारों में बेचकर नियमित आमदनी प्राप्त कर रही हैं।
प्रशिक्षण से बेहतर हुआ व्यवसाय
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से मिले प्रशिक्षण ने शैल कुमारी को व्यवसाय व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद की। वे मुर्गियों की देखभाल, भोजन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देती हैं।
लागत कम रखने और बेहतर पोषण के लिए वे मुर्गियों को दाने के साथ बची हुई सब्जियां भी खिलाती हैं। वहीं, छोटे चूजों को ठंड से बचाने के लिए बिजली के बल्ब और ब्रूडर का उपयोग करती हैं।
उनकी मेहनत का परिणाम है कि आज मुर्गी एवं बतख पालन से उन्हें हर महीने लगभग 25 हजार रुपये की आय हो रही है।
कलेक्टर ने की सराहना, व्यवसाय बढ़ाने के लिए किया प्रोत्साहित
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल, पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय सिंह तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष शैल कुमारी ने अपने व्यवसाय और उससे होने वाली आय की जानकारी साझा की।
कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए व्यवसाय को और अधिक बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
शैल कुमारी की सफलता बताती है कि स्व-सहायता समूहों का सहयोग, विभागीय प्रशिक्षण और सरकारी आजीविका योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने अपने परिश्रम और लगन से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ दूसरी महिलाओं के सामने भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग करके सफलता हासिल की जा सकती है।
बेबाक शक्ति NEWS – शहडोल

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