वाहन क्षमता भी क्यूबिक मीटर में दिखेगी, ईटीपी डाउनलोड करते ही आपको पता चल जाएगा रेत डंपर ओवरलोड है या नहीं

होशंगाबाद:- सरकार ने ई-पोर्टल की लिंक बदली
स्टॉक या खदान की रेत की पहचान अलग
पिछले साल स्टॉक टू स्टॉक रेत के कागजों में परिवहन के खुलासे के बाद अब खदान और स्टॉक की रेत की पहचान आसान कर दी है। खनिज अफसरों ने बताया स्टॉक से उठाई गई रेत की ईटीपी के नंबर के पहले एस (s) लिखा रहेगा जबकि खदान की रेत के पहले (m) लिखा रहेगा।
आम लोग भी ऐसे रोक सकते हैं रेत चोरी
- यदि आपको लगता है कि रेत या अन्य खनिज का अवैध परिवहन या ओवरलोडिंग हो रहा है तो आप मिनटों में इसका पर्दाफाश कर सकते हैं।
- सबसे पहले खनिज कार्पाेरेशन द्वारा ईटीपी सत्यापन के लिए संचालित वेबसाइट https://mining.mp.gov.in/VerifyEtp पर जाइए।
- यदि आपके सामने कोई वाहन रेत से भरा खड़ा है तो उसका पंजीयन नंबर वेबसाइट के ईटीपी वेरिफाइ के सामने डालिए और सर्च कीजिए।
- यदि ईटीपी हुई तो वह तुरंत उस पर खुल जाएगी। उसमें आप देख सकेंगे कि रेत कहां से लाई गई है, कहां ले जाई जा रही है, कितनी भरी है, वाहन की क्षमता क्या है। ड्राइवर का नाम और नंबर भी दर्ज मिल जाएगा।
- यदि उक्त नंबर की ईटीपी उक्त म्याद में नहीं मिलती है तो इसका मतलब है कि या तो उसकी ईटीपी एक्सपायर हो गई है या फिर रेत अवैध से रूप से लाई गई है।
रेत के ईटीपी घोटाले के उदाहरण ऐसे समझिए
14 अगस्त को सिवनी जिले के कैलारी तहसील के एक स्टॉक से ईटीपी नंबर S1656819261 जारी हुई। इस ईटीपी को होशंगाबाद, भोपाल, रतलाम होते हुए 818 किलोमीटर नीमच जाना बताया गया है। सवाल है कि डंपर मालिक 15 क्यूबिक मीटर रेत लेकर 818 किमी का सफर क्याें करेगा। जब नीमच के आसपास ही कई जिलों में रेत उपलब्ध है।
ईटीपी में यह कमियां जो अब भी दूर नहीं हुई
ईटीपी में परिवहन दूरी को गूगल से मैपिंग नहीं की गई है। इससे एक ईटीपी पर अधिकतम ट्रिप लगाने की राह खुली है। ईटीपी सबसे लंबे रूट की कटाई जाती है ताकि उसमें मिले अतिरिक्त समय के दौरान उसी ईटीपी पर एक या दो ट्रिप बगैर नई ईटीपी के लगाई जा सकती है।
1 नई ईटीपी नंबर में नंबरों के आगे एक शब्द भी पहचान के लिए लिखा जा रहा है, इससे खदान, स्टॉक या टैंपरेरी परिवहन स्पष्ट रूप से पता चलता है। 2 पहले रेत विक्रेता और खरीदार का नाम ही रहता था, अब वाहन ड्राइवर का नाम और नंबर भी दर्ज किया जा रहा है। 3 पहले वाहन की क्षमता टन में बताते थे, जबकि खनिज मात्रा क्यूबिक मीटर में दर्ज होती थी। अब दोनों का मानक एक ही क्यूबिक मीटर कर दिया गया है। इससे ओवरलोडिंग पकड़ने में आसानी होती है।

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