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शहडोल पुर्व कमिश्नर आर.बी. प्रजापति करैरा से चुनाव मैदान में उतरेंगे, कहा-जीता तो वेतन नहीं लूंगा

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शहडोल| शहडोल में कमिश्नर रहे और शहडोल से ही रिटायर्ड होने वाले आईएएस अधिकारी आर बी प्रजापति शिवपुरी जिले के करैरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने जा रहे हैं। लगभग 10 साल तक चंबल संभाग में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके श्री प्रजापति चार जिलों में एसडीएम, पांच जिलों में एडिशनल कलेक्टर और तीन जिलों में जिला पंचायत सीईओ रह चुके हैं। वे शिवपुरी में ढाई साल तक अतिरिक्त कलेक्टर के रूप में पदस्थ रहे हैं। अशोकनगर कलेक्टर और उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य और वन विभाग एडिशनल डायेक्टर के रूप में भी वह काम कर चुके हैं।

श्री प्रजापति शहडोल में कमिश्नर के रूप में पदस्थ हुए और मार्च में यहीं से सेवानिवृत्त भी हुए। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले श्री प्रजापति छतरपुर के महाराजा कॉलेज में सहायक प्राध्यापक भी रह चुके है। शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा को चुनने के संबंध में श्री प्रजापति ने बताया कि इस क्षेत्र में उनका प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पदस्थ रहने के कारण अच्छा सम्पर्क है। प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उन्हें अच्छा अनुभव रहा है कि किस तरह से काम कराए जाते हैं और इस अनुभव का लाभ उठाकर वह जनसेवा करेंगे। श्री प्रजापति का कहना है कि वह चुनाव जीतने के बाद वेतन नहीं लेंगे।श्री प्रजापति ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश में छतरपुर सहित 12 जिलों में प्रजापति समाज अनुसूचित जाति वर्ग में आता है और इन जिलों के प्रजापति देश और प्रदेश की किसी भी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। चूकि मैं छतरपुर का रहने वाला हूं इसलिए मुझे करैरा आरक्षित क्षेत्र से चुनाव लडऩे में किसी तरह की वैद्यानिक और कानूनी दिक्कत नहीं है।

इस्तीफा देने वाले खर्च वहन करें निर्दलीय चुनाव लड़ने के संबंध में श्री प्रजापति ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के दरवाजे पर टिकट के लिए याचना करना उनके आत्म सम्मान के खिलाफ है। 25 विधायकों के इस्तीफा देने पर सवाल खड़ा करते हुए श्री प्रजापति ने कहा कि यदि उन्होंने जनता के हितों को ध्यान में रखकर इस्तीफा दिया है और उन्हें क्षेत्र और जनता के विकास की इतनी ही चिंता है तो इन विधायकों को चुनाव में खर्च होने वाली राशि को वहन करना चाहिए। साथ ही उन्हें यह घोषणा भी करनी चाहिए कि वह जीतने के बाद वेतन नहीं लेंगे और सुख सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं करेंगे। वह यदि त्यागी और तपस्वी हैं तो उन्हें इसका भी त्याग करना चाहिए।

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