न मुआवजा, न रोजगार , फिर भी कर लिया भूमि का अधिग्रहण

शहडोल/अनूपपुर|निमहा, मझौली के ग्रामीण घर से बेघर होने पर कॉलरी प्रबंधन के खिलाफ खोला मोर्चा जमुना कोतमा क्षेत्र की सबसे बड़ी खदान के नाम से जाने जानी वाली आमाडांड भूमिगत खदान जहां वर्ष 2004 में ग्रामीणों की जमीनों को ओपन कास्ट संचालित होने पर अधिकृत की गई साथ ही ग्रामीणों को जमीन के अनुसार मुआवजा व नौकरी देने की बात भी कही गई थी लेकिन इन सब बातों को दरकिनार कर महाप्रबंधक द्वारा अब ग्रामीणों को घर से बेघर तो किया ही जा रहा साथ ही उन्हें अन्य कोई सुविधा भी मुहैया नहीं कराई जा रही जिसको देखते हुए ग्रामीणों द्वारा कालरी प्रबंधक के विरुद्ध धरना प्रदर्शन कर अपनी पीड़ा शासन प्रशासन के समझ रखी है।
आमाडांड कालरी के समक्ष ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन
ग्राम निमहा,मझोली के ग्रामीणों को मुवाबजा की राशि का भुगतान और रोजगार उपलब्ध न कराने पर 12/11/2020 को सुबह 5:00 बजे से समस्त परिवहन रोककर शांति पूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन जारी रखी जिनमे भूमि अधिग्रहण करने के बाद भी मुवाबजे और रोजगार न देकर ग्रामीणों को किया जा रहा गुमराह
ग्राम पंचायत निमहा अंतर्गत मझौली के 64.073 हे, भूमि वर्ष 2018 में अधिग्रहण करने के बाद भी आज दिनांक तक न ही भूमि के एवज में मुवाबजे का भुगतान किया गया न ही रोजगार उपलब्ध कराया गया कोल इंडिया के नए नियम डिसेंडिंग के तहत 75 रोजगार देना था परंतु कॉलरी के कुछ अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को गुमराह कर छलने का काम किया जा रहा है और कॉलरी के अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को भ्रमित कर दस्तावेजो पर हस्ताक्षर कराकर उन्हें नोकरी का प्रलोभन दे दिया जाता है। अनुपपुर जिला आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र है जहाँ लोग अत्यधिक मात्रा में अनपढ़ अशिक्षित है जिसका फायदा उठाकर कॉलरी कर्मचारियों के द्वारा बरगलाने का काम किया जाता है।
कोलइंडिया जमुना कोतमा एरिया द्वारा ग्रामीणों को घर से बेघर करने की जारी है तैयारी
एक ओर जँहा माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा हर गरीब को 2022 तक पूर्ण रूप से पक्के मकान बनाने का लक्ष्य रखे है वंही कोल इंडिया जमुना कोतमा एरिया के आला अधिकारी ग्रामीणों को घर से बेघर करने में जुटा है ग्रामीणों ने आमाडाँड़ कॉलरी के प्रबन्धन पर आरोप लगाया कि कॉलरी के द्वारा हमारी भूमी अधिग्रहण कर उसका उपयोग किया जा रहा है और अभी तक हमे उसका मुवाबज नही दिया गया और न ही रोजगार दिया गया और न ही हमे विस्थापन के लिए भूमि दी गई और कॉलरी प्रबन्धन के द्वारा कहा जा रहा है आप अपना घर(मकान) यदि धवस्त करेंगे तो आपको मुवाबजे की राशि दी जाएगी ।
अंग्रेजों की हिटलर साही आमाडांड में बरकरार
आमाडाँड़ कॉलरी के गलत नीतियों से ग्रामीण आत्महत्या तक करने को मजबूर
आजाद देश मे आज भी अंग्रेजों की हिटलर शाही बरकरार है। कोल इंडिया के आमाडाँड़ कॉलरी के गलत नीतियों से ग्रामीण आत्महत्या तक करने को मजबूर है आज लगभग 15 से 20 साल हो गए किंतु कॉलरी के अड़ियल रवैये से ग्रामीण परेशान होकर आज अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर है क्या इन गरीब ग्रामीण की मांगे पूरी होंगी या फिर से आश्वासन दे कर लॉलीपॉप थम दिया जाएगा।या मांगे मानकर संतुष्ट किया जाएगा क्योंकि कॉलरी अपनी गलत नीतियो के चलते ही हमेशा विवादों में घिरा रहता है।
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