बढ़ती हुई ठण्ड को देखते हुए अतिरिक्त सर्तकता एवं साॅवधानी की आवष्यता-कलेक्टर

अखिलेश कुमार शर्मा…..
शहडोल – कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डाॅ0 सतेन्द्र सिंह ने जिले के सभी सभी नागरिकों को कहा है कि बढ़ती हुई ठण्ड को देखते हुए अतिरिक्त सर्तकता एवं साॅवधानी की आवष्यता है। उन्होंने नागरिको से अपील की है कि शीत ऋतु की बीमारियों एवं कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतु सभी साॅवधानियां आत्मसात करें और खुद को बचाते हुए परिवार एवं सामाज की रक्षा करें। उन्होंने कहा है कि सर्दी के मौसम में छोटे बच्चो एवं 65 वर्ष के वृद्धजनो को अत्याधिक साॅवधानी की जरूरत है, वे अनावष्यक बाहर न निकले और यदि बाहर निकलना है तो सोषल डिस्टेंसिंग एवं मास्क का उपयोग आवष्यक करंे।
कलेक्टर ने कहा है कि शीत ऋतु मंे रोग प्रतिरोधात्मक शक्तियों का विकास होता है, इस मौसम में खानपान और वर्जिश पर ध्यान दिए जाने का कारण केवल यही है कि सर्द मौसम में जितनी कैलोरी खाई जाती है उतनी ही पचाई भी जा सकती है। आयुर्वेद में सर्दियों से बचाव के लिए रहन-सहन और खान-पान में बदलाव करने के लिए कई सूत्र कहे गए हैं। सभी का जोर केवल इस पर रहता है कि मौसम के अनुकूल खानपान रखें। देर रात तक भोजन न करें और सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ दें। स्वस्थ रहने के लिए इतना तो किया ही जा सकता है।
उन्होंने कहा है कि भारतीय जलवायु उष्ण प्रधान होने से यहाँ शीतकाल का समय अल्पकालीन रहता है। प्राकृतिक रूप से भी शीतकाल का समय स्वास्थ्य रक्षा की दृष्टि से शरीर को बल-पुष्टि प्रदान करता है। कलेक्टर ने कहा कि शीत ऋतु मंे विहार, आचार-विचार में गलती का खामियाजा स्वस्थ व्यक्ति को रोगग्रस्त होकर भुगतना पड़ता है तथा वातावरण में वायु की शीतलता की वजह से शारीरिक ऊष्मा अंदर रुककर, बढ़कर बलवान हो जाती है, जिससे जठाराग्नि (पाचक रस) प्रबल होकर पाचन शक्ति बढ़ाकर व्यक्ति के गरिष्ठ (भारी) भोजन को पचाने के योग्य बनाता है। साथ ही रात बड़ी व दिन छोटेहोने से निद्रा पर्याप्त होती है, पाचन ठीक होता है तथा कब्ज नहीं रहती। कलेक्टर ने कहा कि शीत ऋतु के बीमारियों में श्वांस, कास, प्रतिश्याय (जुकाम), अंगमर्द, शरीर में जकड़ाहट, त्वचा का शुष्क होना, शीतकालीन ज्वर (न्यूमोनिया) आदि है। इसके साथ-साथ यह शीत ऋतु कोविड-19 महामारी का संक्रमण काल भी है। इसलिए अतिरिक्त सर्तकता की आवष्यता है। उन्होंने कहा कि सरसों का तेल ़ सेंधा नमक से छाती पर लेप, वाष्प स्नान, धूप स्नान, प्राणायाम करना। रात्रि में सौंठ, ़कालमिर्च, ़ पिपली का समभाग चूर्ण 1 चम्मच उष्ण जल में पीना, नित्य नासा छिद्रों में शुद्ध सरसों का तेल डाले। उन्होंने कहा कि शीत ऋतु में पौष्टिक, भारी बलवर्धक पदार्थ जैसे दूध, घी, मक्खन, उड़द की दाल, रबड़ी, मलाई, दूध-चावल या दूध-केला, मखाने की खीर, हरी सब्जी, सौंठ, अंजीर पिंडखजूर, लहसुन, काला तिल, गाजर, आँवला, शहद, पुराना गुड़, मौसमी फल, लहसुन, क्षीरपाक आदि का सेवन करें। कलेक्टर ने जिले के सभी नगर पालिका अधिकारियों को सार्वजानिक स्थलो में ठण्ड से बचाव हेतु अलाव आदि की व्यवस्था करने के निर्देष दिए है।

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