मामला शहडोल आदिवासी विभाग में भ्रष्टाचार का…कैसे भ्रष्टाचार को जस्टिफाई किया ….?

(विशेष संवाददाता)
शहडोल। तो जनवरी के पहले हफ्ते में संभागीय उपायुक्त आदिम जाति एवं अनु0जाति विकास शहडोल ने अपनी जानकारी में पत्र क्रमांक 1361 दिनांक 04.01.2021अनुसार अमित सिंह माध्यमिक शिक्षक/अध्यापक से मण्डल संयोजक वि0खं0 गोहपारू के संबंध में जारी आदेश आयुक्त महोदय शहडोल संभाग शहडोल के आदेश क्रमांक/संभा0उपा0/सा0स्था0/2020/723 शहडोल दिनांक 01.09.2020 द्वारा किया गया है । उक्त आदेश आयुक्त महोदय द्वारा आवश्यकता का आंकलन कर अपने कार्य के साथ-साथ कार्य लिया जा रहा है । साथ ही आदेश मे उल्लेख किया गया है कि शासन स्तर से पदपूर्ति होने के साथ ही जारी आदेश समाप्त होगा । और इसे सही मानते हुए शिकायती प्रकरण को बंद करने की बात कही है । किंतु यदि देखा जाए तो पूर्व में ठीक इसी प्रकार से अन्य कुछ लोगों की पदस्थापना की गई और बाद में जब सबकुछ उनके हिसाब से नहीं हुआ याने जो पद बिक गए और उसकी कीमत नहीं आई तो उन्हें इसी उच्चाधिकारियों के आदेशों के संदर्भ में वापस मूल स्थान पर भेज दिया गया याने पद बिकता है बोलो खरीदोगे की दुकान कुछ इस अंदाज पर चलाई जा रही है जैसे अंधा बांटे रेवड़ी चीन्ह चीन्ह कर देय। आखिर बेटी कौन से कारण रहे कि कुछ मामलों में पदस्थापना करने के बाद भी उन्हें उपरोक्त पत्रों के हवाले से वापस भेज दिया गया और गोहपारू के मामले में उसे जस्टिफाई करने का काम हो रहा है फिर चाहे उच्चाधिकारियों के जो भी आदेश होते हैं उन्हें शिरोधार्य कर लिया जाता है जैसे सुहागपुर खंड शिक्षा अधिकारी चंदेल के मामले में हाईकोर्ट ने उन पर आरोपित प्रकरण को समाप्त करने का काम भी नहीं किया है बावजूद इसके उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी सुहागपुर का प्रभार गैरकानूनी तरीके से दिलवा दिया गया या फिर उन्होंने अपनी हैसियत के हिसाब से ले लिया और आरोप तत्कालीन कमिश्नर प्रजापति के द्वारा पदस्थ किए गए खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती शुक्ला के ऊपर डाल दिया गया कौन नहीं जानता है कि खंड शिक्षा अधिकारी सुहागपुर में गैरकानूनी तरीके से शिक्षक महत्वपूर्ण पदों में लिपिक की भूमिका अदा कर रहे हैं किंतु क्योंकि संबंधित शिक्षक द्वारा पद को खरीद लिया गया है और उसकी कीमत व कायदे खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर उत्तर अधिकारी तक पहुंचाई जाती है इसलिए मुंह पदस्थापना वाले स्कूल में शैक्षणिक कार्य निश्चित तौर पर या तो भूत करता होगा या फिर भगवान क्योंकि कोई भी शिक्षक किसी गांव मेंं किसी शहर में लिपिक की भूमिका पर कााम नहीं और यह बात वर्षों से अपनी जागीरदारी की तरह है रह खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को चलाने वाले चंदेल को भलीभांति ज्ञान है

क्योंकि उनका अनुभव है कि पद बिकताा है बस खरीदने वाला चाहिए इसलिए भ्रष्टाचाार की परंपरा को सफलता केेेेेे साथ निर्वहन किया जा रहाा है ठीक उसी तरीके से जस्टिफाई करके जैसे कि अमित सिंह के मामले में जस्टिफाई किया जा रहा है तो स्पष्ट है कि आदिवासी विभाग मे आदिवासी संभाग में दो दो कैबिनेट आदिवासी होने के बाद भी भ्रष्टाचार क्यों हो रहा है क्यों गलत को सही ठहराया जाने का पारदर्शी खेल होता है शायद इसलिए क्योंकि जब महत्वपूर्ण पदों की बिक्री क्षमता के साथ क्रेता द्वारा पदोंं को मुंह मांगी कीमत पर खरीद लिया जाता है तोो अपनेे अधीनस्थ भी किस प्रकार के पदों को बेचा जाए यह उसकीी स्वतंत्रता और शायद खंड शिक्षा अधिकारी सुहागपुर अपने उच्चाधिकारियों के कार्यों का अनुगमन मात्र कर रहे होतेे हैं इसीलिए ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्ट मेव जयते पूरे गौरव के साथ जस्टिफाई करके सफलताा के झंडे घटता है अन्यथा जब शिकायतें आम हो रही हूं तो अधिकारियोंं को अपना आईना सामने रखकर चेहरा अवश्य देखना चाहिए कि आखिर कालिकचेहरे के किस हिस्से में लगी है जिसे दिखाने के लिए ही सही साफ कर देना चाहिए याने शिक्षकोंं को शासन की मंशा अनुसार उन्हें मूल पदस्थापना में भेजा जाना चाहिए किंतु आदिवासी क्या ऐसा हो सकता है…?
तो देखिए आगे आगे होता है क्या…?

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