पूर्व कलेक्टर का फेवरेट वस्त्रालय चंद्रालोक क्या अवैध निर्माण पर होगी कार्यवाही

मुख्य चौराहे पर भ्रष्टाचारी भू माफिया प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहा लाचार-बेबस प्रशासन
माफियाओं के अवैध निर्माणों पर कारवाही की प्रशंसा के बीच में खड़े कई प्रश्न

शहडोल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश तिवारी ने कलेक्टर डॉक्टर सत्येंद्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री गोस्वामी के निर्देशन में माफियाओं के खिलाफ की जा रही कार्यवाही का स्वागत करते हुए उन्हें कार्रवाई के लिए बधाई देते हुए कहा है कि आम जनता में माफियाओं की अवैध जमीनों पर एवं निर्माणों पर की जा रही कार्यवाही से आम जनता मैं अच्छी प्रतिक्रिया है। इनके आतंक एवं प्रभाव के कारण प्रशासन भी कोई कार्यवाही नहीं कर पाता था। ऐसे में यह निरंकुश होकर अवैध कार्यों में लिप्त होकर संपत्ति अर्जित कर समाज में एक दबदबा बनाए हुए थे ।ऐसे में यह कार्यवाही इन पर प्रभावी अंकुश का काम करेगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इस प्रकार की कार्यवाही सतत चलना चाहिए ताकि इस प्रकार के तत्व पनप ही ना पाए। अभी भी अनेक तरह के माफिया जिनमें भू माफिया भी शामिल हैं नजूल की बेस कीमती जमीनों में कब्जा किए हुए हैं भले ही वह अपराधियों की श्रेणी में ना आते हो लेकिन सफेदपोश अपराधियों की श्रेणी में हैं ।उन पर भी प्रशासन ध्यान दें अन्यथा इस प्रकार की कार्यवाही अधूरी रह जाएगी ।शहडोल नगर में ही ऐसे अनेक प्रकरण हैं ।जहां पर नजूल की हजारों फीट जमीन पर कब्जा किया गया है। पोंडा नाले का स्वरूप ही बदल दिया गया है लेकिन राजस्व विभाग ने सामान्य बेदखली का नोटिस नहीं भेजा है हटाने की कार्यवाही तो दूर है।
ज्ञातव्य है की नित्य प्रतिदिन चल रहे माफिया दमन अभियान में तमाम प्रकार के अवैध निर्माणों को ढहाया जा रहा है जिसकी प्रशंसा के पक्ष में आम जनमानस मैं इस सहमति भी बन रही है। इससे एक और जहां प्रशासन की प्रबंधन की ताकत का प्रदर्शन होता है वही दूसरी ओर अवैध कार्य करने वाले माफिया समूह का मनोबल भी गिरता है, की अवैध काम का परिणाम अंततः बुरा होता है। अपवाद को छोड़ दें तो प्रशासन की सक्रियता से कई अवैध अतिक्रमण कारियों से शासकीय भूमि को मुक्त कराया गया है। तो दूसरी ओर कानून और शांति व्यवस्था के प्रति आम जनमानस का विश्वास भी बड़ा है। बावजूद इसके जिन अतिक्रमणकारियों के या गैरकानूनी कार्यो को चिन्हित करके तहसीलदार सोहागपुर ने दंडित किया है उन्हें कतिपय उच्च अधिकारियों ने ले देकर संरक्षण देने का काम भी किया है। उदाहरणार्थ जबकि तत्कालीन अधिकारी वर्ग यह भली-भांति जानता था कि यह पूरी तरह से वैधानिक फैसला के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें आदि आदिवासी मुख्यालय के मुख्य गांधी चौक स्थित सरकारी अराशि खसरा नंबर 119- 120 में तहसीलदार सोहागपुर द्वारा पारित आदेश के अधीन भ्रष्टाचार का चंद्रलोक बनाने वाले भू-माफिया नुमा व्यापारी को वर्ष 2019 में अंतत: गैरकानूनी निर्माण के लिए 90,000 रुपए जुर्माना लगाते हुए दंडित किया गया था। यह दीगर बात है की जिस वक्त अवैध निर्माण को हटाने की तैयारी हो चुकी थी पुलिस और प्रशासन नगर पालिका दुरुस्त हो रही थी उसके 1 दिन पहले रात को तत्कालीन कलेक्टर दाहिमा पहली बार खरीदारी करने पहुंच जाते हैं। और अतिक्रमणकारी की जमकर मेहमानी भी करते हैं। करीब आधे घंटे कपड़ा खरीदने के बाद आधे घंटे ही अंदर अतिक्रमणकारी नेमीचंद जैन का स्वागत स्वीकार करते हैं। इतना पर्याप्त है तहसीलदार की आदेश को जूतों से ठोकर मारने के लिए और नतीजा भी सामने आता है कि तत्कालीन तहसीलदार बीके मिश्रा अपने आदेश पालन में अपना सिर पकड़ कर तैयार अतिक्रमण हटाओ पुलिस व प्रशासन के दस्ते को वापस लौटा देता। और अवैध निर्माण का भ्रष्टाचार का चंद्रलोक चमकता रहता है।
उसकी चमक और दमक दिनोंदिन बढ़ती रहती है क्योंकि भ्रष्टाचार की ताकत सिर्फ कमजोर वर्ग के लिए निहित थी। आज बदली हुई परिस्थिति में भी मुख्य चौराहे पर भ्रष्टाचारी भू माफिया प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहा है क्या यह बात चुनौती के रूप में देखी जा रही है… कि क्या भूमाफिया भी किसी अज्ञात इशारे पर निर्देशित वा चिन्हित है..? क्योंकि यदि न्यायालय के समुचित जांच के बाद पारित आदेश में भी कार्यवाही ठंडे बस्ते में डाली रखी गई है तो प्रश्न तो खड़े ही होंगे..। देखना होगा क्या वास्तव में प्रशासन अपनी निष्पक्ष कार्यवाही का प्रदर्शन कर पाता है। इन तत्वों पर भी न्याय प्रिय प्रशासन ध्यान देगा।

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