भाजपा की छूट से मची है लूट – आजाद

शहडोल । जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आजाद बहादुर सिंह ने कहा की यह महामारी का दौर अभी आगे भी चलेगा हम सभी का दायित्व है की पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपनी अपनी भूमिका का निर्वहन करें । उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि प्रशासन के और अधिकारी कहां नदारद हो गए क्यों नहीं अपने कर्तव्य का निर्वहन करते ताकि मौकापरस्त ओं द्वारा मुनाफाखोरी जमाखोरी और बढ़ती सट्टेबाजी पर नियंत्रण किया जा सके । श्री सिंह ने कहा कि ₹2 की चीज ₹4 में बिक रही है यहां तक कि जीवन रक्षक दवाओं पर भी मूल्य वृद्धि का बज्राघात पड़ा है लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हो रही है उन्होंने पुलिस प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि हाल ही में राजश्री गुटखा की खेप पकड़ी जाना आम आदमी को राहत भरी खबर देती है।। इसी तरह से चोरी छुपे बैठे अन्य मुनाफाखोरी को भी सबक सिखाया जाना चाहिए।
श्री आजाद ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर रेमडेसीविर इंजेक्शन सहित अन्य दवा व उपकरण बेतहाशा दामों में बिकने लगे उन्होंने यात्री बसों का उल्लेख करते हुए कहा कि डीजल पेट्रोल के बढ़ते दामों को देखकर शासन ने 25 परसेंट की जो वृद्धि की है उससे भी ज्यादा किराया यात्रियों से वसूल करना बेमानी है फिर भी आरटीओ और संबंधित विभाग लंबी चादर तान के सो रहे हैं ऐसी हालत में आम आदमी को मरते हुए देखना अमानवियता है ।। उन्होंने दुखी मन से कहा कि हे! प्रभु शीघ्र इस महामारी (बीमारी)का अंत करो , वरना मध्यमवर्गीय परिवारों का अंत हो जाएगा ।
गरीब तबके के लोगों का तो त्राहिमाम ही है, उनकी इस लॉक डाउन में अत्यंत दयनीय हालत हो चुकी है, जिन्हें रोज कमाना खाना है, बीमारी का हाल यह है, उन्हें बीमारी कुछ भी हो लेकिन कोरोना भय है, बता कर भी उनकी बीमारी का इलाज नहीं हो रहा है । उन्हे कीड़े मकोड़े और जानवरों की तरह मारा जा रहा है । गरीब व मध्यम वर्ग की हो या कोई भी किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो उन्हें किसी भी प्रकार की बीमारी हो लेकिन इलाज मुहैया कराने वाला स्वास्थ्य विभाग एवं जिम्मेदार लोग सिर्फ कोरोना का भय बताकर उन्हें इलाज नहीं दे पा रहे है और उनकी अकाल मृत्यु हो रही है। श्री आजाद ने कहा कि कोरोना का इलाज आए दिन ऑक्सीजन एवं दवा, इंजेक्शन के अभाव में अधूरा रह जाता है और संक्रामक व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो रही है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन सरकार नहीं तो और कौन यह प्रश्न है? उन्होंने कहा कि रहा सवाल इस महामारी को जिस तरह से व्यापारी वर्ग ने पैसा कमाने का अवसर बना लिया है वह अत्यंत चिंतनीय है , गांव के लोगों का यह हाल है कि ग्रामीण छोटे व्यवसाई आवश्यक वस्तु की पूर्ति करने में स्वयं असमर्थ है बड़े व्यापारी हर वस्तु के दाम बढ़ा कर देते हैं वही चीजें गांव में बिक रही हैं चाहे राहर दाल को वह 120-130 खाने का तेल 160 से170 में इसी तरह हर वस्तु के दाम बढ़े मिलेंगे यदि व्यापारियों से कहें कि सामान महंगे हैं तो व्यापारी कहता है कोरोना है। इस तरह से हर क्षेत्र में कोरोना का भय दिखाकर लूट मची हुई है। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसा क्यों है ?विक्रय सूची दुकानों में क्यों नहीं लगाते? आखिर समान कहां लाकर और कहां से लाकर बेचते हैं। यही नहीं कोरोना के आपदा को अवसर में बदलने वाले माहिर लोगों पर प्रशासन का अंकुश क्यों नहीं ?आखिर हर चीज लोहा सीमेंट फल-फूल आदि सब महंगी क्यों? जबकि कोरोना के जैसी महामारी आपदा का भय बताकर अवसर में बदलने वाले लोग सफल हैं, इस पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार लोग ठंडे क्यों है ।यह प्रश्न है ?ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार लोगों की मौन स्वीकृति है। चाहे वह सरकार हो या जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और आम जनों का चीरहरण हो रहा है दवाई से लेकर आवश्यक वस्तु तक जो आम जनों के जीवन जीने का आधार है उसकी कालाबाजारी से आमजन त्रस्त है।

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