क्या राजा क्या रंक सभी का हश्र वही है कीमती मौत दो कौड़ी की बस जान हो गयी वीरान शहर सारी गलियां सुनसान हो गईं ….
अखिलेश कुमार शर्मा मो.नं.-(7999140850)
प्रकृति ने कुछ इस कदर क़हर बरपा रखा है
जमाने में वीरान शहर सारी गलियां सुनसान हो गईं
जिनके साथ चलते थे कारवां कई सारे कब रुख़सत हुए दुनिया से मौत भी गुमनाम हो गयी रिश्ते हज़ार दिखते हैं इस जहां में जब भी देखो इस आपदा में रिश्तों की पहचान हो गयी किसी के घर का चिराग किसी का आसरा चला गया किसी के लिए लाशें भी दुकान हो गईं चल रहा है मौत का तांडव मची हुई है अफरा तफरी वही बचा जिस पर जिंदगी मेहरबान हो गयी क्या राजा क्या रंक सभी का हश्र वही है कीमती मौत दो कौड़ी की बस जान हो गयी वीरान शहर सारी गलियां सुनसान हो गईं वीरान शहर सारी गलियां सुनसान हो गईं।
पाली पुलिस सहायक उपनिरीक्षक
शशि द्विवेदी “शिवम”की कविता प्रस्तुति



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