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झूठी जानकारी भेज कर तृतीय वर्ग कर्मचारी अंसारी बना सहायक आयुक्त

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करोड़ों रुपए का अवैध आहरण पर कोषा अधिकारी ने क्यों चुप्पी साधी…?आदिवासी विभाग में माफिया-गिरी …

(विशेष संवाददाता) मो.नं.(7999140850)
शहडोल।नकाब खोलकर अरमान जगाने वाले राजनीतिज्ञ और अफसर शाह किस तरह है आदिवासी विकास विभाग में अवैध वित्तीय हरणों को संरक्षण दे रहे हैं इसका खुला प्रयोगशाला बन गया है शहडोल का आदिवासी कार्यालय जहां अब आयुक्त आदिवासी विभाग ने कड़ी टिप्पणी की है वह आपत्ति प्रकट की है कि आखिर क्यों एक तृतीय वर्ग कर्मचारी को सहायक आयुक्त बनाया गया है तो दूसरी तरफ   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल से हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर के जरिए चलकर शहडोल के जमुई गांव में जनता जनार्दन के बीच में स्वयं को गौरवशाली महसूस करते   यह कहकर की “जमुई की जनता ने कमाल कर दिया है इंग्लैंड और अमेरिका से भी आगे निकल गए हैं वैक्सीनेशन के मामले पर। और उन्हें उनके गांव में पहुंचकर बधाई दे दे। किंतु जब स्वयं मुख्यमंत्री के द्वारा जमीनी हालात टटोली जाते हैं तो जमीन पाव से खिसक जाती है। क्योंकि जिस जमुई गांव की जागरूकता को उन्होंने सिर-माथे लेकर नमन किया, उस के लिए जिम्मेदार विभाग सहायक आयुक्त कार्यालय आदिवासी विकास में माफियागिरी लंबे समय से कामयाब तरीके से शासन और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को लगभग मूर्ख बनाती चली आ रही है। और इसी धोखे में प्रदेश के मुख्यमंत्री भ्रम में पड़ गए और उन्होंने सहायक आयुक्त कार्यालय आदिवासी विकास की “ढोल के पोल” को ही सच समझ लिया। और भावना में बहकर “शेखचिल्ली के सपने” को साकार होता देखने लगे। 

बहराल जब जीटीवी ग्रुप ने जमीनी हालात को टटोला तो पाया की बैगा अति पिछड़ी विशेष जाति के राशन कार्ड ही नहीं बनाए गए। जबकि शहडोल में बैगा विकास परियोजना आदिवासी विभाग के अंतर्गत विधिवत लंबे समय से संचालित है। और करोड़ों  रुपए विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के नाम पर जयश्रीराम हो चुके हैं।

 देर से ही सही अब इस बात का खुलासा आयुक्त कार्यालय भोपाल की फाइलों में खुलकर हो रहा है की सहायक आयुक्त कार्यालय मे लंबे समय से टिका “माफिया-सिस्टम”, कलेक्टर अथवा उच्च अधिकारी को धोखा देता चला आ रहा है। जिस कारण उसने शहडोल में “वरिष्ठ अधिकारी ना होने के कारण” तृतीय वर्ग कर्मचारी एमएस अंसारी को सहायक आयुक्त पद का प्रभारी बनवा दिया और यही कारण रहा कि एक तृतीय वर्ग कर्मचारी एमएस अंसारी तमाम वरिष्ठ अधिकारी होने के बाद भी सहायक आयुक्त कार्यालय में आदिवासी विभाग के मनमानी बंदरबांट कर रहा तथा तमाम कानून व्यवस्था को अपने तरीके से संचालित करता है।

 भारतीय जनता पार्टी की उनके झूठे दंभ हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक सोच को ही अगर आधार माने तो निचले स्तर का एक गैर हिंदू अंसारी नाम का तृतीय वर्ग कर्मचारी पिछले तीन दशक से अपनी पत्नी जाहिदा अंसारी को गैर कानूनी तरीके से प्राइमरी स्कूल के वर्ग 3 की शिक्षाकर्मी होने के बाद भी लगातार हाई स्कूल में शहडोल शहर में पदस्थ रखकर उसके अधिकारी स्वयं मंडल संयोजक एमएस अंसारी ही बने रहे। और इसी तरह धीरे-धीरे प्रशासन में अपनी माफिया गिरी की सफलता से जगह जगह उन्होंने गैर कानूनी आर्थिक लाभ के लिए प्रयास भी किए। कहा जाता है शहडोल में ही नहीं अन्य जगह भी उनके कई भूखंड नामी और बेनामी तरीके से बनाई गए हैं ।

 माफिया गिरी की यह भी सफलता थी कि कोई मंडल संयोजक, क्षेत्र संयोजक के रूप में लंबे समय तक स्वयं को स्थापित करके रखा और यदि कोई क्षेत्र संयोजक आयुक्त कार्यालय से ट्रांसफर होकर उस पद पर शहडोल में आया भी तो न सिर्फ उसका ट्रांसफर उसकी इच्छा अनुसार भोपाल से करवाना बल्कि उसका सम्मान विदाई के साथ उसे पदस्थ करवाना भी एक कला रही है।

 इतने योग्य व्यक्ति अंसारी के लिए सहायक आयुक्त पद को खाली करवाना उसे तत्काल पद मुक्त करवाना कोई बड़ी बात नहीं  और इसके लिए उच्चाधिकारियों को यह गुमराह करके कि कोई वरिष्ठ व्यक्ति उस पद पर नहीं है जो सहायक आयुक्त पद का पदभार ग्रहण कर सके इसलिए तृतीय वर्ग कर्मचारी मंडल संयोजक एमएस अंसारी को सहायक आयुक्त पद के प्रभार के रूप में पदस्थ कर दिया जाना चाहिए जबकि जिले में क्लास वन के रणजीत सिंह धुर्वे कन्या शिक्षा परिसर शहडोल के अलावा करीब दो दर्जन हायर सेकेंडरी के प्राचार्य डिप्टी कलेक्टर आदि भी पूर्व में स्वयं  रणजीत सिंह धुर्वे सहायक आयुक्त के प्रभारी का दायित्व निभा चुके थे जिन्हें छुपाकर माफिया गिरी की गई अपने आप में स्थापित कुशल-माफियागिरी का बड़ा उदाहरण है।जो अब भोपाल के आयुक्त कार्यालय आदिवासी विकास मे के फाइलों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। 

जहां यह स्मरणीय है कि मध्य प्रदेश के इन्हीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को केलमनिया गांव में कई वर्ष पहले इसी अंसारी ने गुमराह किया था जिससे मुख्यमंत्री श्री चौहान नाराज हो गए थे और उसके परिणाम स्वरूप तब मंडल संयोजक के रूप में पदस्थ एमएस अंसारी को आयुक्त शहडोल द्वारा चेतावनी पूर्ण तरीके से गंभीरपद में ना रखे जाने की निर्देश दिए गए थे। किंतु जो व्यक्ति अपनी कुशल-माफियागिरी से कलेक्टर अथवा उच्चाधिकारियों को गुमराह करता रहा हो उसके लिए आयुक्त शहडोल के निर्देश, जूते की नोक में ही रखे रहते हैं। और परिणाम स्वरूप अंसारी पुनः क्षेत्र संयोजक के प्रभार के रूप में अपनी माफिया गिरी बरकरार रखता है। जिसका परिणाम यह होता है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब  फिर से शहडोल के जमुई गांव में आते हैं तो उन्हें आदिवासियों के विकास, उनके जनहित के कार्य “मुफ्त राशन योजना” की उद्देश्य पूर्ति में सिर झुका कर जनता के सामने प्रायश्चित करना पड़ता है।

 देखना होगा कि जब आयुक्त आदिवासी विकास भोपाल की फाइलों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है कि शहडोल आदिवासी विभाग में माफिया गिरी के कारण तृतीय वर्ग कर्मचारी धोखे से सहायक आयुक्त बना बैठा है और गैरकानूनी करोड़ों रुपए के आहरण पर जिला कोषालय अधिकारी की सहमति से वित्तीय अनियमितता अपराधों को अंजाम दे रहा ज़िला कोषालय का फंडा भी सामान्य लोगो के समझ के बाहर की बात है, जहा तृतीय वर्ग के कर्मचारी के हस्ताक्षर से करोड़ों रूपयों का आहरण बिना किसी आपत्ति के किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर एक राजपत्रित अधिकारी जिसको महालेखाकार ग्वालियर से उसके पद को आहरण अधिकार दिया गया है के हस्ताछर से आहरण करने में मार्ग दर्शन के नाम से लटकाया जा रहा है बात बी टी आई के प्राचार्य के अधिकार की है। इन हालातों में भी चाहे आयुक्त हो अथवा कलेक्टर हो इनकी चुप्पी आदिवासी विभाग की माफियागिरी के मनोबल को आखिर कितना बढ़ाएगी…?

 और तब जबकि हाल में एक भू संरक्षण एमके दुबे ,एमएस अंसारी के ही तर्ज पर अपनी माफिया गिरी चमकाते हुए करोड़ों रुपए और सोने की ईट जमा करते रहे, भू मफिया बने रहे और अंतत का है छापामारी से यह बातें स्पष्ट भी हो चुकी हैं। 

तो क्या एमएस अंसारी को भी इस हिंदूवादी सुशासन की व्यवस्था में छापामारी का सामना करना पड़ेगा अथवा “चोर-चोर” नहीं उससे बढ़कर “माफिया-माफिया मौसेरे भाई” के तर्ज पर राजनीत की माफिया,  अंसारी की माफिया से अपनी रिश्तेदारी जोड़कर माफिया-माफिया के खेल को सफलता से चलने देंगे…? अथवा कानपुर के विकास दुबे के भांति ऐसे माफियाओं को उनकी माफिया-गिरी का एनकाउंटर होगा..?

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