रेरा का पंजीयन न नियम अनुसार नक्शा पास फिर भी प्लॉटिंग

– खेती की जमीन पर धड़ल्ले से प्लॉटिंग कर बसा रहे कॉलोनी
शहडोल। शासन के नियमों के तहत बगैर लाइसेंस व डायवर्सन के कोई भी प्लॉट की खरीदी एवं कॉलोनी का निर्माण नहीं कर सकता है। इसके साथ कॉलोनाइजर का रेरा में पंजीयन जरूरी है, लेकिन शहडोल जिले में भूमाफियाओं द्वारा खेती की जमीन पर प्लॉट काटकर क्रेताओं को गुमराह किया जा रहा है।
नगर में करीब एक दर्जन के लगभग कॉलोनाइजर कॉलोनी विकसित करने में लगे हैं। नगर में बड़े पैमाने पर इन कॉलोनाइजर द्वारा खेती की जमीन सीधे आवासीय प्लॉट बनाकर बेचने का कारोबार चल रहा है। इन कॉलोनाइजर में एक दो ही लाइसेंसधारी हैं, बाकी अन्य अपनी बिना लाइसेंस और रेरा टीएनसी से रजिस्ट्रेशन कराए प्लॉटिंग कर रहे हैं। इसमें कुछ कॉलोनाइजर सरकारी एवं एक प्लॉट की दो से तीन बार रजिस्ट्री कर बेच देते हैं। ऐसे मामलों में शिकायत होने के बाद इन राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कॉलोनाइजर पर नगर पालिका, थाना पुलिस कार्रवाई करने से बचती नजर आती है। जिससे नगर में एक के बाद एक अवैध कॉलोनी का निर्माण होता जा रहा है। यहां रहने वाले लोगों को कॉलोनाइजर द्वारा न बिजली व्यवस्था की जाती है न ही पेयजल का समुचित इंताम कराया जा रहा है। नगर पालिका द्वारा इन अवैध कॉलोनी पर कोई कार्यवाही नहीं जाती है। गौरतलब है कि शहडोल में अवैध प्लाटिंगों व सरकारी जमीनों में अवैध कब्जे अवैध कॉलोनाइजर द्वारा खेती की जमीन पर प्लॉट काट कर बेचे जा रहे हैं। इन कॉलोनी में प्लॉट लेने वाले लोग अलग-अलग आवेदन तहसील में लगाकर डायवर्सन एवं नामांतरण करा लेते हैं, जिससे कॉलोनाइजर लोगों को किसी भी प्रकार की सुविधाएं नहीं देते हैं। यहीं नियम अनुसार कॉलोनियों में पंद्रह प्रतिशत कमजोर आयवर्ग एवं निम्न आय वर्ग के लोगों का अनुपालन भी सक्षम अधिकारी द्वारा नहीं किया जा रहा है ।
ये हैं प्लॉटिंग के नियम
अपनी निजी भूमि पर कॉलोनी बनाने से पहले संबंधित व्यक्ति को जिला कलेक्टर के यहां कॉलोनाइजर का लाइसेंस लेना होगा। कॉलोनाइजर को सबंधित भूमि पर प्लॉटिंग करने से पहले नगर पालिका, नगर परिषद से डायवर्सन के लिए एनओसी लेनी होगी। कॉलोनी बसाने से पहले उसमें क्या सुविधाएं होंगी, इसके लिए रेरा में पंजीयन कराना होगा। कॉलोनाइजर को कॉलोनी में स्वयं के व्यय पर विद्युत ट्रांसफर लगवाना होगा। इसके साथ पानी की सप्लाई एवं सड़क बनवानी होगी। टाउन कंट्री से प्लॉटिंग के लिए अनुमति लेनी होगी। नगर परिषद के अधिकारियों ने बताया कि जो नई कॉलोनी का निर्माण किया जाता है, उसमें 25 प्रतिशत प्लॉट गिरवीं रखे जाते हैं। जिससे कॉलोनी में सड़क, बिजली, पानी जैसे विकास कार्य किए जा सके किंतु नगर में अवैध रूप से बसाई जा रही इन कॉलोनाइजर द्वारा इन नियमों का कही से पालन करते नहीं दिख रहे हैं। खेती की जमीन पर मनमाफिक प्लॉट काटकर लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।सांथ ही उप संचालक नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा अनापत्ति में उल्लेख है की भूमि सम्बंधित किसी भी विवाद एवं विसंगति उत्पन्न होने पर यह अनापत्ति स्वंमेव ही निरस्त हो जाएगी व प्रत्येक कालोनियों के भूखंड के सामने छायादार वृक्ष होने का भी नियम है परंतु इन सब विषयों की जांच भी ना हो पाने के कारण उपभोक्ता ठगा रह जाता है बिंदुवार इन सब विषयों की जांच भी की जाना परम आवश्यक है ?

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