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आरोपी डॉक्टरों को बचाने वाले नेता भी बनाया जाये सह आरोपी,पत्रकारो ने एडीजी को सौंपा ज्ञापन

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अखिलेश कुमार शर्मा (7999140850 )

शहडोल। पिछले दिनों शहडोल के देवांता अस्पताल में भर्ती महिला मरीज के मरने के बाद भी उसके शव को वेंटिलेटर में रखकर परिजनों से पैसा वसूलने का सनसनीखेज मामला सामने आया। समाचार पत्रों की खबरों के बाद जिला प्रशासन ने एक टीम गठित कर मामले की जांच कराई और प्रथम दृष्टया अस्पताल के मालिकों एवं डॉक्टरों को दोषी मानते हुए अस्पताल को सील कर दिया। पुलिस ने इस मामले में अस्पताल संचालकों के खिलाफ एफआईआर भी पंजीबद्ध किया है।

गंभीर और संवेदनशील मामला, जमानत खारिज

इस बीच अस्पताल के संचालक फरार हो गए और अभी भी फरार हैं, क्योंकि अदालत ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह एक बहुत ही संवेदनशील मामला है, जिसमें यह बात लगभग स्पष्ट हो चुकी है कि, मृतक महिला के परिजनों ने खेतबाड़ी बेचकर अस्पताल का लाखों रुपए चुकाया है। इसके बावजूद बचे हुए कुछ और रूपये नहीं मिलने पर, परिजनों को डेड बॉडी तक नहीं दी जा रही थी। तब मीडिया के माध्यम से यह प्रकरण उजागर हुआ और मुर्दाखोर अस्पताल के मालिकों की करतूत आम जनता के सामने आई।

जन भावनाओं के विपरीत नेता

उक्त घटना के बारे में जिसने भी सुना उसने अस्पताल मालिकों को भला बुरा कहा। परंतु इतने संगीन और शर्मसार करने वाले आरोप में फंसे आरोपियों को बचाने में, कांग्रेस नेता रविंद्र तिवारी जिसे नगर पालिका चुनाव में लगभग 17000 मतदाताओं ने अपना विश्वास प्रकट किया था। ऐसे नेता ने आम जनमानस की भावनाओं पर कुठाराघात करते हुए मुर्दाखोर एवं पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए फरार अस्पताल मालिकों का पक्ष लेते हुए, उन्हें निर्दोष बताने का प्रयास किया। यहां तक कि, पत्रकार वार्ता आयोजित कर प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ को भला बुरा कहते हुए धमकी दे डाली।

मोबाइल की पाताल से पड़ताल से आसान होगी जांच


मीडिया के बलबूते नेतागिरी में अपनी पहचान बनाने वाले नेता ने इतनी ज्यादा होशियारी दिखा दी कि, यह होशियारी उन पर ही भारी पड़ रही है। नेता ने मीडिया कर्मियों को अपमानित करते हुए जिस ढंग से पत्रकार वार्ता का आयोजन किया उससे नाराज लगभग जिले के सभी पत्रकारगणों ने एडीजी को एक ज्ञापन सौंप कर यह मांग की है कि, अपराधियों को बचाने वाले नेता को सह आरोपी बनाया जाए। अगर सही ढंग से जांच की जाए, तो नेताजी के मोबाइल के माध्यम से इन राज बरार फरार आरोपियों तक पहुंचने में भी पुलिस को सफलता भी मिल सकती है।

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