अनुपपुर में तीन माह की आदिवासी बच्ची की मौत, लिखित शिकायत के बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्यवाही

शिव के राज में मासूम को दिया मौत का इंजेक्शन एक तरफ डॉक्टर लापरवाह स्वार्थी दूसरी तरफ पुलिस भी उदासीन
अनुपपुर:- एक तरफ जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज मामा की मेरे भांजे भांजी को कोई दिक्कत नहीं होनी अगर मेरे भांजे भांजी उनको गलत निगाह से देखता है तो आंखें निकाल लूंगा यह सब खुले मंच से कहते हैं।
मगर कथनी ओर करनी का खुलासा मृत्यु हो चुकी छोटी मासूम भांजी ने जीवंत कर दिया है मामला है मध्यप्रदेश के आदिवासी जिले अनुपपुर का जहां डॉक्टर की लापरवाही व लालच की भेंट में अपनी जान दे चढ़ाया है। विषय अंतर्गत अनूपपुर के गांव मानिकपुर में रहने वाले आदिवासी परिवार अपनी बीमार बच्ची का इलाज कराने अनुपपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल बी केयर आया था जहां सरकारी विरेंद्र खेस अपनी सेवा दे रहे थे उन्होंने ने ही मृतक बच्ची का इलाज किया था और इलाज के दौरान ही बच्ची की मौत हो गई मृतिका के पिता मुकेश सिंह मरावी ने पुलिस को लिखित शिकायत में बताया है कि बच्ची भूखी थी जिसकी जानकारी डॉ विरेंद्र किसको दी गई थी बच्ची की पूरी स्थिति के बारे में भी बताया गया था और गंभीरता को जानते हुए भी प्राइवेट हॉस्पिटल में ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया जहां वेंटिलेटर सहित इमरजेंसी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था मृतका के पिता ने लिखित आरोप लगाया है कि इंजेक्शन देने के बाद बच्ची की मौत हो गई और जब बात विरेंद्र खेस के हाथ से निकल गई तो उन्होंने बच्ची को जिला हॉस्पिटल रेफर कर दिया जहां बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया था जिसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राय को भी दी गई है मृतक बच्चे के पिता मुकेश सिंह मरावी ने पुलिस से लिखित शिकायत कर बच्ची का पोस्टमार्टम कर आरोपियों खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इसी विषय पर जब स्थानीय थाना प्रभारी अमर वर्मा से बात की गई तो लापरवाही पूर्वक टालमटोल करते हुए कहा गया कि रात में शिकायत प्राप्त हुई है दिन में तो बॉडी को गाड़ दिया गया है।
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