शहडोल न्यूज – पर्यावरण सुरक्षा एवं मानव जीवन के लिये स्वच्छ वायु आवष्यक- सीएमएचओ डाॅ. आरएस पाण्डेय !

शहडोल 09 दिसम्बर 2022- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर एस पांडेय ने बताया कि विश्व भर में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारक है। भारत में वायु प्रदूषण का स्तर विश्व में सर्वाधिक है, जो देश के स्वास्यि और अर्थव्यवस्था के लिए भारी खतरा है। भारत की लगभग पूरी आबादी (1.4 अरब लोग) अपने चारों ओर हवा में हानिकारक स्तर पर मौजूद पीएम 2.5 कणों के संपर्क में है, जो सबसे खतरनाक वायु प्रदूषक है और विभिन्न स्त्रोतों से निकल कर हवा में मुक्त हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मार्च 2019 में प्रकाशित अध्यन अनुसार प्रत्येक वर्ष वायु प्रदूषण के कारण दुनियाभर में लगभग 88 लाख लोगों की असमय मौत होती, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत में अस्थमा से अधिक मौते होती है।
वायु प्रदूषण की स्वास्थ्य लागत अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा रही है। 2017 में वायु प्रदूषण के कारण हुई घातक बीमारियों के चलते खोए हुए श्रम की लागत 30 से 78 अरब डॉलर थी, जो भारत की जीडीपी का लगभग 0.3-0.9 प्रतिशत है। वायु प्रदूषण के कारण विभिन्न स्वास्थ्य समस्यायें, फसलों का नुकसान, कोहरा, आदि समस्यायें उत्पन्न होती है। वायु प्रदूषण के कारण खराब हुई वायु गुणवत्ता के मानव स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव होते है। अतः आवश्यक है कि, वायु प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य पर होने वाले दूष्प्रभावों की जानकारी जनसाधारण को प्रदान कर इसकी रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण हेतु कलेक्टर श्रीमती वंदना वैद्य एवं जिला प्रषासन तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सतत् प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण हवा में ठोस कणों, तरल बिन्दु या गैस के रूप में मौजुद पार्टिकुलेट मेटर (पी.एम.) के कारण होता है। ये प्राकृतिक या कृत्रिम हो सकते है। अति-सूक्ष्य पार्टिकल नासिका या मुंह द्वारा श्वसन के दौरान फेफड़ों तक पंहुचते है। वहां से रक्त की धमनियों में प्रवेश कर शरीर के विभिन्न भागों में ये कण पहुंचते है तथा दिल, फेफड़े, दिमाग आदि को हानि पहुचाते है ये वायु प्रदूषण औघोगिम धुऐं, वाहनों के धुऐं, धूल, परागकण, जंगल की आग या ज्वालामुखी के फटने से निकलते है।
वायु प्रदूषण के विभिन्न प्रकारों के बारे में डाॅ. पाण्डेय ने जानकारी दी है कि वायु प्रदूषण के मुख्य कारण रसोई घर में कोयला, कण्डें, लकड़ी का ईधन के रूप मंे उपयोग, कैरोसिन लैम्पध्स्टोव का उपयोग, मच्छर अगरबत्ती, धूपबत्ती का धुंआ, बीड़ी, सिगरेट द्वारा धूम्रपान, सिगड़ी या अलाव जलाना, कूडा कचरा जलाना, घर में धूलाई,सफाई के लिये रसायनों का प्रयोग, घर के बाहर होने वाला वायु प्रदूषण साथ ही इसके कई कारण भी हो सकते है जिसमें शहरों एवं उसके आसपास स्थापित उद्योग द्वारा छोड़ा गया धुआं, पावर प्लांट जिससे बिजली बनती है, अनायास जंगलों मे लगने वाली आग, निर्माण कार्य हेतु लगने वाले ईट के भट्टे, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में होने वाली आतिशबाजी व उसके प्रयुक्त पटाखे, डीजल जेनेरेटर से निकलने वाला धुआं, परिवहन और यातायात के लिय चलने वाल वाहन, मिट्टी और सड़क की धूल, ठोस कचरे का जलाना, बगीचे के कचरे का जलाना, निर्माण को तोड़ते समय निकलने वाली धूल, खेतों मे कचरा जलाना। डाॅ. पाण्डेय ने वायु प्रदूषण से होने वाले बीमारियों के बारे में बताया कि वायु प्रदूषण से फैफडे के कैंसर, निमोनिया, अस्थमा, दिल का दौरा, स्ट्रोक जैसी बीमारियां हो सकती है। फैफड़े के कैंसर से होने वाली मृत्यु में 29 प्रतिशत मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण होता है। स्ट्रोक या दिमागी दौरा पडने से होने वाली मृत्यु में 24 प्रतिशत मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण होता है। दिल की बीमारियों से होने वाली मृत्यु में 25 प्रतिशत मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण होता है। फैफडे की बीमारियों से होने वाली मृत्यु में 43 प्रतिशत मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण होता है। गर्भवती महिला के शिशु का गर्भ में विकास प्रभावित होता है, गर्भस्थ शिशु का समय पूर्व जन्म, कम वजन का होना, आई.क्यू. कम होना, सीखने में कठिनाई होना, बडी उम्र में मोटापा या डाईबिटीज जैसी बीमारी का जोखिम होना।
डाॅ0 पाण्डेय ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के बारे में जानकारी दी कि रसोई घर में स्वच्छ ईधन का उपयोग, खाना बनाते समय खिड़की दरवाजे खुले रखना, वाहनों का पी.यू.पी. प्राप्त करना, पेड़ पोधे लगाना, हरियाली बढ़ाना, कूडा कचरा न जलाना, धूम्रपान ना करना, घर से बाहर निकलने से पहलें, ।पत फनंसपजल प्दकमग चेक करना तथा वायु प्रदूषित होने पर संभवतः घर से न निकलना, पैदल चलना, साईकल का प्रयोग करना आवष्यक है। जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रित कर पर्यावरण एवं मानव जीवन को सुरक्षित रखा जा सके और हमें स्वच्छ प्राण वायु प्राप्त हो सके।
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