तो क्या कुंभकर्णीय निंद्रा निद्रा सो रहे वन विभाग के डीएफओ…. ?

आखिर किसकी शह पर करोड़ों की लकड़ी कटकर पहुंच गई उत्तर प्रदेश….?
शहडोल।”सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का “कहावत पर आधारित है यह खबर जी हां शहडोल जिला आदिवासी जिला है जहां पर बाहर से आए हुए अधिकारी पूरी ईमानदारी के साथ जमकर भ्रष्टाचार करते हैं और भ्रष्टाचार को अगर मीडिया उछाल भी दे तो सारा भ्रष्टाचार जांच में सिमट जाता है वह जांच कभी पूरी ही नहीं होती है कहावत जो है वह इस तरह सही हो रही है कि करोड़ों की लकड़ी कटी है वन विभाग का रेंजर क्या कुंभकरण निद्रा सो रहा था आखिर रेंजर ने अपने एसडीओ और डिएफओ को क्या जानकारी नहीं दी और अगर दी तो एसडीओ और डीएफओ ने क्या कार्रवाई की और अगर एसडीओ डिएओपो को पता था कि लकड़ी कट रही है तो कार्रवाई क्यों नहीं की ऐसे कई सवाल खड़े हैं पर जवाब शुन्य है रेजर कहते हैं कि राजस्व का मामला है और राजस्व के अधिकारी कहते हैं कि वन विभाग का मामला है वन क्षेत्र हो या राजस्व हो अगर लकड़ी की कटाई हो रही है तो बकायदा उसकी परमिशन वन विभाग के आला अधिकारी ही देते हैं आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर इस तरह की लापरवाही हो रही है तो दोषी कौन किससे रिकवरी होनी चाहिए मजे की बात यह है कि जहां एक ओर वन विभाग का रेंजर क्षेत्र में बैठा है वही उसकी धर्मपत्नी राजस्व विभाग के क्षेत्र में बैठी हैं अब ऐसी परिस्थिति में जो करोड़ों की लकड़ी तस्करों ने उत्तर प्रदेश पहुंचाई है शासकीय रुपऐ की वसूली रेंजर से होगी या नायव तहसिलदार से होगी।या फिर एसडीएम से लेकर एसडीओ पर कार्यवाही होनी चाहिए पर क्या कार्रवाई होगी क्या करोडों की लकड़ी पर वसूली होगी या f.i.r. होगी क्या होगा सवाल कई जवाब शुन्य आखिर ऐसा क्यों हुआ क्या अधिकारी कुम्भकरणीय निद्रा सो रहे थे या फिर तस्करों ने किसे खिलाई मलाई…..? आखिर क्यों रेंजर से लेकर एसडीओ, डीएफओ तक और तहसीलदार से लेकर एसडीएम, कलेक्टर तक प्रशासनिक सारी व्यवस्थाएं होने के बावजूद भी करोड़ों की लकड़ी कटी और जेसीबी मशीन से लोड होती है बाई रोड ट्रक में लोड होकर गाड़ियां उत्तर प्रदेश तक पहुंच जाती हैं कैसे…? सवाल बहुत जवाब शुन्य…..?
यह बेबाक शक्ति समाचार है सारा साच बेबाकी के साथ। पढ़ते रहिए बेबाक शक्ति आगे और भी कड़वा सच आपके सामने आएगा स्थानीय संपादक अखिलेश कुमार शर्मा की खास रिपोर्ट…….

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