पर्यावरण को बचाने अपने दैनिक जीवन में हर संभव बदलाव लाने एवं पर्यावरण की रक्षा की अपील-कमला प्रसाद वर्मा

‘पर्यावरण के लिए जीवन शैली’ की वन कर्मचारीयों ने ली शपथ
अखिलेश कुमार शर्मा की खास रिपोर्ट…….
शहडोल।वन परिक्षेत्र बुढार में वन कर्मचारीयों ने पर्यावरण के लिए जीवन शैली कार्यक्रम के तत्वाधान में बुठार वनपरिक्षेत्र कार्यालय कैंपस में पौधा रोपण किया गया एवं कैंपस की साफ-सफाई उपरांत पांच किलोमीटर पर्यावरण की रैली निकाली गई तथा लोगों को पर्यावरण को बचाने के लिये अपने दैनिक जीवन में हर संभव बदलाव लाने एवं अपने परिवार, मित्रों और अन्य लोगो को पर्यावरण के अनुकूल आदतों और व्यवहारों के महत्व के विषय में सतत रूप से प्रेरित करने की अपील की गई वन परिक्षेत्र कार्यालय कैम्पस में वन कर्मचारीयों को शपथ दिलाई गई ।बुठार वनपरिक्षेत्र सहायक कमला प्रसाद वर्मा ने कहा कि
पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पृथ्वी विभिन्न जीवित प्रजातियों का घर है और हम सभी भोजन, हवा, पानी और अन्य जरूरतों के लिए पर्यावरण पर निर्भर हैं। इसलिए हम सभी का यह कर्तव्य है की पर्यावरण की रक्षा करे है।यह पहल एक ऐसी जीवन शैली को प्रोत्साहित करती है जो संसाधनों के सावधानीपूर्वक और जानबूझकर उपयोग पर ध्यान केंद्रित करती है और इसका उद्देश्य उपभोग की वर्तमान ‘उपयोग और निपटान’ की आदतों को बदलना है। इसके पीछे का विचार लोगों को अपने दैनिक जीवन में साधारण परिवर्तन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है जो जलवायु परिवर्तन में योगदान कर सकते हैं।बुठार वनपरिक्षेत्र सहायक कमला प्रसाद वर्मा ने कहा कि
मनुष्य के स्वस्थ जीवन में पर्यावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।पर्यावरण एकमात्र घर है जो मनुष्यों के पास है, और यह हवा, भोजन और अन्य जरूरतें प्रदान करता है।मानवता की संपूर्ण जीवन समर्थन प्रणाली सभी पर्यावरणीय कारकों की भलाई पर निर्भर करती है।पर्यावरण वायु और जलवायु को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।एक और कारण पर्यावरण इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्राकृतिक सुंदरता का स्रोत है।पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन का प्रमुख अस्तित्व है।इस पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का एकमात्र कारक पर्यावरण है।बुठार वनपरिक्षेत्र सहायक कमला प्रसाद वर्मा ने कहा कि पेड़ों की कमी, बढ़ते प्रदूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के कारण विभिन्न जानवर विलुप्त होने के कगार पर हैं। कभी ग्रामीण जिलों से शहरी क्षेत्रों में प्रवास करने वाले पक्षी अब उद्योगों के हानिकारक उत्सर्जन और इलेक्ट्रॉनिक तरंगों के कारण दिखाई नहीं देते है। प्रकृति का यह असंतुलन पृथ्वी पर लंबे समय तक चलने वाले जीवन के लिए गंभीर समस्याएं और खतरा पैदा कर रहा है।विभिन्न प्रकार की मानवीय गतिविधियाँ हैं जो सीधे पर्यावरणीय आपदाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं, जिसके कारण अम्ल वर्षा, महासागरों का अम्लीकरण, जलवायु में परिवर्तन, ओजोन परत का ह्रास, ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण आदि समस्याएं होती है।इस लिए हमें अपने जीवन शैली में सुधार लाते हुए पर्यावरण की रक्षा करना चाहिए। कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी बुढार प्रमांशु धुर्वे एवं वन परिक्षेत्र सहायक बुढार कमला प्रसाद वर्मा वनरक्षक सुधाकर जयसवाल ,संतोष पनिका राजाराम पनिका ,राजेश रावत लल्लू सिंह, जय प्रकाश मौर्य राकेश बैगा, रानी नामदेव शिवकुमार टाडिया बालेन्द्र दुबेदी हिरदेश अहिरवार ,समारू बैगा उमेश कुमार गौतम , समस्त वन कर्मचारी उपस्थित रहे।
Subscribe to my channel
Comments are closed.