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रीवा कलेक्टर से की शिकायत: स्कूल में पढ़ने नहीं आते बच्चे, फिर भी 22 वर्षों से तैनात हैं यहां स्थानीय दो शिक्षक..?

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कागजों में दर्ज की फर्जी उपस्थित, पदस्थ शिक्षक है आदतन अपराधी

रीवा। जिले के कलेक्टर से तहसील सिरमौर के संकुल केन्द्र बदरांव में पदस्थ एक सहायक शिक्षक के स्कूल में उपस्थित नहीं रहने, फर्जी छात्र/छात्राओं का नाम दर्ज कर स्कूल संचालन किए जाने सहित उक्त शिक्षक के आपराधिक गतिविधियों में संलग्न रहने के संबंधित शिकायत की गई है। शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री मोदी को भी प्रेषित की गई है। 5 बिंदुओं पर ध्यानाकर्षण कराते हुए शिकायतकर्ता ने ‌दोषी शिक्षक को पद से पृथक करते हुए विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।

यह है पूरा मामला

शिकायतकर्ता बाबूलाल शुक्ला पिता स्व. कालूराम शुक्ला, निवासी हाल मुकाम ग्राम सगरा, तहसील सिरमौर, जिला रीवा ने अपनी लिखित शिकायत में बताया है कि, हमारे गांव सगरा, संकुल केन्द्र बदराँव (गौतमान) में शा. प्राथमिक पाठशाला खुला हुआ है। जहां अध्यापक अश्वनी कुमार शुक्ला पिता केशरी प्रसाद एवं उनकी सगी भाभी ममता शुक्ला दोनों शिक्षाकर्मी वर्ग-2 (सहायक अध्यापक) के पद पर नियुक्त हैं। नियुक्ति दिनांक से आज तक लगभग 22 वर्षों से इसी विद्यालय में पदस्थ हैं, जो स्थानीय निवासी भी हैं।

उन्होंने बताया कि, इस शासकीय प्राथमिक पाठशाला में एक भी विद्यार्थियों का आना जाना नहीं होता है, किंतु कागजों में यह विद्यालय बकायदा संचालित हो रहा है। बावजूद इसके, इस विद्यालय में दो शिक्षक अश्वनी एवं ममता पदस्थ हैं। स्कूल शिक्षक होने के बावजूद अश्वनी कुमार शिक्षा का मंदिर माने जाने वाले विद्यालय में ही बैठकर मंदिरा एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है।

बताया गया है, शिक्षक अश्वनी कुमार आद्यतन आपराधी एवं नशे के सेवन करने वाले व्यक्ति है। हाल ही बीते माह मार्च में थाना समान, जिला रीवा में इनके विरूद्ध प्रकरण कायम किया गया। नशे की हालत में अपनी कार क्रं. एमपी 17 सीसी 9475 चला रहे थे। जिस पर पुलिस ने धारा 185 मोव्ही. एक्ट के तहत न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रीवा के समक्ष चालान प्रस्तुत किया था। जिस पर न्यायालय ने उन्हें न्यायालय उठने तक की सजा एवं 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दंडित करते हुए अर्थदण्ड अदा करने में व्यतिक्रम होने पर 10 दिवस पृथक से कारावास भुगतने का आदेश पारित किया था।

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है, अश्वनी कुमार के विरूद्ध थाना विश्वविद्यालय में एक महिला की शिकायत पर प्रक्र. क्रं. (प्र.सू.रि.स.)-0005 दिनांक 4 जनवरी 2022 में धारा 294, 323, 506, 34 कायम है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। उक्त प्रकरण में शिक्षक अंश्वनी के साथ उनके पुत्र भी सम्मिलित है। सहायक शिक्षक आद्यतन अपराधी है व अपने पुत्र के साथ अपराधिक प्रवृत्तियों में संलिप्त रहते हैं। वह अपने पुत्र को अपराध करने उत्प्रेरित करते रहते हैं। पिता-पुत्र के विरुद्ध थाना सिविल लाईन, जिला रीवा में दिनांक 24 जून 2020 को धारा 307, 34, 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत भी अपराध दर्ज है और प्रकरण विचाराधीन है।

शिकायतकर्ता ने इस बात पर भी ध्यानाकर्षण कराया है कि, जहां उक्त शिक्षक अश्वनी कुमार शिक्षा जैसे पवित्र कार्य को कलंकित कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर शिक्षा अधिनियम के विपरीत विद्यालय में छात्र/छात्रा न होने के बावजूद भी विद्यालय कागज में संचालित कराने का काम एक लंबे अर्से से करते आ रहे हैं। इस स्कूल संचालन के नाम पर दो-दो शिक्षकों का वेतन प्रदाय भी हो रहा है। जिसे एक लंबे समय से निश्चित रूप शासन को भी राजस्व क्षति हुई है।

सवाल यह है कि, आखिरकार इतने लंबे समय से इस तरह से संचालित हो रहे स्कूल पर क्या कभी कोई अधिकारी जांच या निरीक्षण पर नहीं पहुंचे? क्या कभी वरिष्ठ जिम्मेदार विभागीय अधिकारी के यह नहीं संज्ञान नहीं आया कि, इस स्कूल में पदस्थ शिक्षकों की गतिविधियां या कार्यशैली कैसी हैं और वह यहां के स्थानीय निवासी होने के बाद भी करीब 22 वर्षों से यहां पदस्थ रहकर मौज कर रहे? ऐसे और भी कई सवाल हैं, जिनका जवाब शायद ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरना दे सकें।

बहरहाल, संबंधित मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने उपरोक्त तथ्यों की व्यक्तिगत जांच कराते हुए विधि सम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। ताकि न्याय पर लोगो की आस्था बनी रहे। वहीं शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, भारत सरकार नई दिल्ली एवं आयुक्त कार्यालय लोक शिक्षण भोपाल, संयुक्त संचालक कार्यालय लोक शिक्षण रीवा, कमिश्नर सहित जिला शिक्षा अधिकारी रीवा को भी प्रेषित की गई है।

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